जानी की नई साइकिल

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  जानी

जानी एक उच्च माघ्यम आर्थिक परिवार का लड़का है ।  वह अच्छे और मंहगे वस्त्र पहनने वाला संगमप्रिय युवक  है । एक गुण  जो उसे सबसे अलग करता है वह है उसका साइकिलों से प्रेम ।  जब वह 18 माह का था, उसके मां बाप ने उसे एक छोटी सी तीन पहियों वाली साइकिल ला कर दी थी । बस उसे इससे प्यार हो गया । वैसे तो उसके पास ढेरों खिलौने थे जिन से वह कुछ पल ही खेलता था, किंतु फिर साइकिल पर वापिस आ जाता था । कभी वह उसे चला कर घर में इधर उधर घूमता था और कभी उसे कंधों पर रख कर चलता था ।  यह कोई 6 माह चलता रहा पर तब जानी की आंखें दो पहियों वाली साइकिल पर पड़ी । मां बाप ने उसकी इच्छा समझ ली ।  उसके तीसरे जन्म दिन पर दो पहियों वाली साइकिल  ला दी ।  इस दो पहिए वाली साइकिल के पिछले पहिए के साथ छोटे से दो सहायता के पहिए लगवा दिए ताकि वह गिरे नहीं । वह इस साइकिल को सजाता था, रिबन बांध कर और रंग बिरंके स्टिकर्स लगा कर ।  फिर कुछ दिन बाद जानी कि जिद हुई की वह घर के बाहर भी साइकिल चलाएगा ।  स्वीकृति मिल गई कि वह घर के पिछले वाले हिस्से में चला सकता है । अब नई इच्छा थी कि सहायता वाले पहिए नहीं चाहिए क्योंकि वह तो छोटे बच्चों के लिए होते हैं ।  इज़ाज़त मिल गई पर इस शर्त पर की हैल्मेट पहननी होगी । उसे एक सुंदर सी उसकी मर्जी की हैल्मेट ले दी तो वह मान गया ।  अब वह अड़ौस पड़ौस में हर जगह यह साकिल चलाता था । उसे यह करने दिया गया था क्योंकि उनका घर एक बंद गली के अंत में था जहां दूसरों की गाड़ियां कभी कभार ही आती थी ।  तब से हर दो या तीन साल बाद उसे एक नई साइकिल मिल जाती थी – कभी जानी के मां बाप से और कभी उनके मां बाप से । उसे इनसे घना प्रेम था ।  अब वह हाइ स्कूल में है । उसमें नई साइकिलों और उनकी टैक्नोलोजी में मनोग्रस्ति पैदा हो गई है – उच्च श्रेणी की धातुएं जिन से यह बनती हैं, गति संबंधी बारीकियां और जो छोटी छोटी चीज़ें जो उन पर लगाई गई हैं  ।

 सैरा

जानी की गर्लफ़्रैंड सैरा थी । दोनो एक दूसरे से बड़ा प्रेम करते थे । सैरा के माता पिता विजय और सोनिया दोनो इंडिया से आए थे – दोनो सॉफ़्टवेयर इंजिनीयर थे और अब यू एस ए के नागरिक थे । उनका आरंभिक जीवन यहां कठिन था पर अब तो वह अच्छी तरह बस गए थे । व्यावहारिक दृष्टि से तो सैरा को उसकी दादी ने ही पाला था जिसे वह शुरू से ही नैना कहती थी । सैरा एक तीव्रबुद्धि वाली लड़की थी – पतली सी, कंधों तक आने वाले बाल, अच्छे पर सादे पहनावे वाली  और दयालू स्वभाव की । अब सैरा और जानी दो साल से इस दोस्ती के रिश्ते में थे और अक्सर एक दूसरे कर घर आते जाते थे ।  दोनो एक ही स्कूल में एक ही श्रेणी में थे । लगभग हर रोज़ स्कूल भी इकट्ठे आते जाते थे ।

बाइसिकल का इश्तिहार

एक दिन जानी इंटरनैट पर वैसे ही देख रहा था तो उसे एक बाइसिकल का इश्तिहार दिखा । उसे लगा कि यह साइकिल उसके लिए बिल्कुल उचित थी । साइकिल का सपना तो देखा पर इसे खरीदने के लिए $2800 कहां से आएंगे ?

जब सैरा आई तो जानी ने उसे साइकिल की फ़ोटो दिखाई और इसका दाम भी बताया ।

सैरा: क्या यह साइकिल सोने की बनी हुई है ? इतनी मंहगी क्यों है ?

जानी: इसका फ़्रेम टाइटेनयम का बना होने के कारण मज़बूत और हल्का एक साथ दोनो है । यह कमाल की वायुगतिकीय (aerodynamic) विधि से बनी है  और इसमें दूसरे टैक्नोलोजिकल चीज़ें भी हैं ।  इसमें एक gyroscope compass (घूर्णाक्षस्थापी दिक्सूचक) भी है जिससे तुम कह सकते हो कि साइकिल ने कितना घूमा है । इससे तुम गणना कर सकते हो कि तुम कितनी दूरी पूर्व या पश्चिम की ओर ग​ए और कितनी दूरी उत्तर या दक्षिन की ओर । है ना कमाल की चीज़ ?   देख, मुझे तो यह साइकिल बड़ी प्यारी लग रही है । इसका असली दाम $7000 था पर अब रियायत में $2800 की मिल रही है ।

सैरा: क्या तेरे पास इतने पैसे हैं ?

जानी: नहीं, पर सपने देखने तो मुफ़्त होते हैं ।

सैरा: क्या तूने डैड से इस बारे में बात की है ?

जानी के डैड भी पिछे खड़े थे और उन्होंने कहा: डैड को क्या पूछना था ?

जानी: डैड, कुछ भी नहीं । मुझे यह सुंदर साइकल पसंद आई । यह $2800 की है पर मेरे पास इतने पैसे नहीं है । मैं आपसे नहीं मांग रहा ।

जानी के डैड की शर्त

जानी ने तो सोचा था कि इस बात का अंत हो गया था जब तक उसी दिन थोड़ी देर बाद डैड ने कहा: जानी, मैने तेरी मां से बात की है । हम तुझे साइकिल के लिए पैसे दे देंगे पर एक शर्त पर । इस टर्म तुझे मेहनत करके 85% से ऊपर औसतन ग्रेड लाने होंगे । यदि इतने नंबर नहीं लाया तो यह पैसे वापिस करने पड़ेंगे । तो इन साइकिल के पैसों को अगली टर्म में अच्छे नंबर लाने की प्रलोभना समझ ले ।

जानी ने डैड की शर्त मान ली हालांकी पहले तो उसके इतने अच्छे नंबर नहीं आते थे । सोचा कि पढ़ाई के लिए मेहनत कर लेगा तो छुट्टियों में नौकरी कर के डैड को पैसे वापिस नहीं करने पड़ेंगे । उसे यह भी खुशी थी की मां बाप उसे सपनों की रानी साइकिल लेने का मौका देर हे थे और वह उसके भविष्य का भी इतना ध्यान रखते थे । उसने सोचा कि वह दूसरे विषयों में तो फिर भी अच्छा कर सकता है पर गणित में उसके कभी भी अच्छे नंबर नहीं आते थे । इस टर्म वह त्रिकोणमिति ले रहा था, वह उसे ट्रिग कहता था । वह सैरा से पूछेगा क्यों कि गणित में उस लड़की के तो अकसर 100% नंबर आते थे ।

अगले दिन स्कूल जाते हुए उसने सैरा को डैड वाली सारी कहानी बताकर पूछा: सैरा क्या तू मेरे ट्रिग में ए ग्रेड लाने के लिए सहायता करेगी ? नहीं तो मुझ नौकरी कर के डैड को $2800 वापिस करने पड़ेंगे ।

सैरा ने थोड़ी देर के लिए इस नई साइकल की टैक्नोलोजी के बारे में सोचा – खास तौर पर घूर्णाक्षस्थापी दिक्सूचक ।  उसने ट्रिग की किताब पर थोड़ी सी नज़र मारी हुई थी । मन में एक योजना बनाई और फिर कहा: जानी, मैं तेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं, मैं तुझे एक ट्रिग का विज़ किड बना दूंगी ।

जानी:  ट्रिग का विज़ किड, मज़ा आ गया ।

जानी अपने डैड के साथ गया और दोनो वह साइकिल खरीद कर ले आए । जानी को इसके फ़ीचर्स बड़े अच्छे लगे । उसकी सोच में यह साइकिल उसकी उम्मीद से कहीं बढ़ कर सुंदर थी । उसने सैरा को घर आने को कहा । सैरा आई, आम दिनों जैसे एक आधी बाजू वाली टी शर्ट और स्कर्ट पहन कर, पर जानी ने कहा कि आज वह बड़ी सेक्सी लग रही थी ।  वह मुस्कुराती हुई आई थी क्यों कि वह अपने बायफ़्रैंड की नई साइकिल के कारण खुशी के लिए प्रसन्न थी ।  जानी ने उसे साइकिल दिखाई ।  सैरा को साइकिलों के बारे में कुछ नहीं पता था पर वह प्रसन्न थी तो इसलिए कि साइकिल से जानी आनंदमय हो गया था ।

जानी: तूने इतने आत्मविश्वास से क्यों कहा था कि तू मुझे ट्रिग विज़ बना देगी ?

सैरा: अभी देख लेना । दिन तो बहुत सुंदर है । चल स्कूल की सैर करने चलते हैं ।  तू साइकिल पर चढ़ कर जा और मैं पैदल, वहां मिलेंगे ।

जानी: अच्छा, स्कूल में मिलेंगे ।

  स्कूल के इर्द गिर्द की गोल सड़क

सैरा ने जानी के लिए स्कूल का एक चित्र बनाया था । स्कूल के इर्द गिर्द एक गोल सड़क थी जिस पर लोग पैदल या साइकिल पर जा सकते थे । स्कूल के अंदर एक पटरी थी जिस पर स्कूल ले अंदर उत्तर के दरवाज़े में से घुस कर दक्षिन के दरवाज़े से निकल सकते थे ।  ऐसी ही पटरी पूर्व के दरवाज़े से पश्चिम के दरवाज़े तक थी ।  दोनो पटरियां स्कूल के केंद्र पर एक दूसरे को मिलती थी । इस केंद्र  से स्कूल की गोल सड़क 100 मीटर दूर थी ।

सैरा और जानी स्कूल के पूर्वी दरवाज़े के पास गोल सड़क पर मिल कर चलने लगे (तीर का निशान देखें) । अरे भाई, जानी को चाहत और क्या हो सकती थी, दाईं हाथ में उसकी नई साइकिल थी  और उसका बायां हाथ उसकी ड्रीम गर्ल की कमर को लिपट रहा था ।  जानी ने अपनी साइकिल के दो बटन दबाए ताकि उसकी चली हुई दूरी और परिक्रमण (rotation) दोनो शून्य दिखें ।   अब वह एक हंसों के जोड़े की तरह इस गोल सड़क पर चल रहे थे । जानी को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ जब सैरा ने उसे रुकने के लिए कहा ।  उसने अपनी साइकिल पर देखा, उसकी परिक्रमण का कोण 45° था । उसकी साइकिल का मीटर दिखा रहा था कि वह  70.7  मीटर उत्तर की ओर जा चुके थे । उसके बाद सैरा अपने घर गई और जानी अपनी नई साइकिल पर सैर करने ।

बाद में सैरा जानी के घर गई । उसने पुराने चित्र पर कुछ और लिखा – वह कहां से चले थे, कहां पर रुके थे  । उसने केंद्र A से आरंभिक स्थान B को मिलाते हुए, और अंत स्थान C को A से मिलाते हुए रेखाएं भी खींची थी । एक रेखा C  और B को मिलाते हुए भी खीच दी थी ।  क्योंकि यस सड़क गोल थी AB और AC की लंबाई 100 मीटर थी ।  जानी की प्रतिकर्ण का 45° का माप अब कोण ∠BAC बन गया था, और ∠ CBA 90° था  ।

पुराने चित्र पर  समकोण त्रिकोण

जानी: पुराने चित्र पर यह त्रिकोण क्यों बनाई है ?

सैरा: क्योंकि ट्रिग त्रिकोणों का विषय है, बल्कि अधिकतर समकोण त्रिकोणों का । क्या तू इस चित्र में देख रहा है कि हम कहां से चले थे, कहां पर रुके थे और  जो 45° का परिक्रमण बना था ?

Fig.1.1

जानी: हां, मैं देख और समझ रहा हूं । एक और बात ∠BCA भी  45° होगा क्योंकि हमें रेखागणित में सिखाया गया था कि एक त्रोकोण के सारे कोणो का योग 180°   होता है ।   क्योंकि यह इस त्रिकोण के दो कोण समान हैं, यह एक समद्विबाहु त्रिकोण है जिसमें भुजा AB = भुजा AC  ।

सैरा ने जानी को चुम्मा दिया और फिर कहा: जानी तू तो जीनियस है । फिर तो तुझे रेखागणित में सीखी हुई पाइथागोरस प्रमेय भी याद होगी ।

जानी: थोड़ी थोड़ी । मुझे याद है कि इसका प्रमाण कठिन था और यह समकोण त्रिकोणो के बारे में थी ।

सैरा: पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार  AC2 = AB2 + BC2  क्योंकि AC समकोण का कर्ण है और AB और BC इसकी दो भुजाएं ।

जानी: हमने पहले ही कहा है कि  AB = BC, इस लिए  AC2 = 2AB2 = 2BC2

सैरा: तो इसका मतलब है AB = BC = AC/√2, याद है AC = 100 मीटर ।  हम 100/√2 = 70.7  मीटर उत्तर की ओर गए और 100 – 70.7 = 29.3   मीटर पश्चिम की  ओर  ।

जानी: अरे यह तो मेरी साइकिल बता रही थी, हम आरंभिक स्थान से 70.7   मीटर उत्तर और  29.3    मीटर पश्चिम की ओर गए ।

सैरा: इसका मतलब है कि तेरी साइकिल की रीडिंग हमारे गुणन के साथ मिलती है ।

जानी: वह तो हो गया पर इसमें तो कोई ट्रिग नहीं दिखाई दी ।

सैरा: ट्रिग का रेखागणित से वही संबंध है जो बीजगणित का अंकगणित से  ।  यह रेखागणित की व्याख्या को लिखने की एक संक्षिप्त विधि है ।  हम एक समकोण त्रिकोण के लिए निम्नलिखित रेखागणित और ट्रिग में समकक्ष  व्यंजक लिख सकते हैं ।

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जानी: रेखागणित से लेकर ट्रिग के व्यंजक क्यों लिखें ?

सैरा: पहले में देखना चाहती हूं कि तू कितना घ्यान दे रहा है।   tan 45°  की मूल्य संख्या क्या होती है ?

जानी:  45° कोण वाली समकोण में ऊंचाई और आधार समान होंगे । इस लिए tan 45° = 1 है ।

सैरा: देखा  ट्रिग में मैने सिर्फ़ पूछा कि tan 45°  की मूल्य संख्या क्या होती है   ।  कितना संक्षिप्त था यह सवाल ?   रेखा गणित में मुझे पूछना पड़ता कि एक समकोण जिसमें आधार और कर्ण का कोण 45°  है, ऊंचाई और आधार का अनुपात क्या होगा ?

जानी: तो  ट्रिग में रेखागणित के प्रश्नों को खटाखट संक्षिप्त समीकरण बना कर उनका उत्तर निकालना सरल हो जाएगा ।

सैरा: अरे, तू तो ट्रिग जीनियस बन गया लगता है  ।

सैरा के घर से फ़ोन काल आई । उसे डिन्नर के लिए बुलाया गया था और वह वापिस चली गई ।

जानी ने सैरा के दिए गए ट्रिग फ़लनो को ध्यान से पुस्तक में देखा । वह उत्साहित था कि वह ट्रिग विज़ बन सकता था । वह सैरा से प्रभावित भी था जैसे वह नई साइकिल पर लगे खिलौनो (यद्यपि इन्हें यह नाम नहीं देगा) के आधार पर उसे ट्रिग सिखा रही थी । बहुत आनंद आ रहा था उसे ।

चुनौतियां

  1. माउंटऐज टेर्रा पार्क

जानी और सैरा इस पार्क में ऊपर जाना चाहते थे । दो रास्ते थे और दोनो सीधे एक ही दिशा में । एक रास्ते से 320 मीटर चलने के बाद   600 सीढ़ियां थी । हर सीढ़ी का नाप था: 30  सै.मी. क्षैतिज दिशा में और 25 सै.मी. ऊंचाई । दूसरा रास्ता था सीधी सड़क । जानी अपनी साइकिल पर सड़क से ऊपर गया और सैरा सीढ़ियों से । ऊपर जाकर जानी पूछता हि कि सड़क का स्लोप कितना था  । सैरा तो सीड़ियां चढ़कर थकी हुई है । आप ही बताइए ।

उत्तर: सैरा का क्षैतिज रास्ता है 320 मीटर चलना और  600 x  30 = 18000 से. मी. = 180  मीटर सीढ़ियां,   कुल 320 + 180 = 500  मीटर ।  सीढ़ियों में  25 x 600 =15000  से.मी. = 150    मीटर लंब गति भी शामिल है ।  यदि  स्लोप का कोण x है तो  tan x =  ऊंचाई / आधार  = 150/500 = 0.3    है । कैल्कुलेटर से देख कर  arctan 0.3 = 16.7°    कोण   होगा ।  तो यह है जानी की सड़क का स्लोप ।

 2. पिस्ते और अखरोट की बर्फ़ी

जो की मां की बेकरी एक बर्फ़ी बनाती है जिसे वह पिस्ते और अखरोट के वर्ग कहते हैं हालांकि वह त्रिकोण होते हैं । वह पहले तो बर्फ़ी के 50   से.मी.  x 2.5 से.मी  टुकड़े बनाती है,  जिन्हें काट कर   2.5 से.मी x 2.5 से.मी  के वर्ग बनाती है और हर वर्ग को कोनो से काट कर दो समकोण त्रिकोण बनाती है ।  इस तरह से वह एक   50   से.मी.  x 2.5 से.मी  फांक से 40 टुकड़े बनाती है ।  वह हर टुकड़े का $1 लेती है ।  बच्चे यह दाम दे कर इसे बड़ी खुशी से खाते हैं । मंहगाई के कारण सामग्री के दाम बढ़ गए हैं ।  वह अपना नुस्खा नहीं बदलना चाहती और ना ही इस बर्फ़ी की मोटाई को कम करने के लिए तैयार है ।  यदि दाम बढ़ा दे तो शायद आधे बच्चे ही पिस्ता अखरोट को खरीद सकेंगी । दुविधा में बात जो से करती है ।  जो मां को राय देता है कि वह  फांक को पहले ही तरह से बनाए ।  उसके बाद वह काट कर अंत में एक समकोण त्रिकोण बनाती थी जिसके दो कोण 45°  के होते थे । वह अब समकोण त्रिकोण ऐसे बनाए की आधार तो वही    रहे, एक कोण  41°का बन जाए और सामने वाला कोण  49° का । ऐसे उसे थोड़े ज्यादा टुकड़े मिल जाएंगे और शायद डिज़ाइन भी थोड़ा बेहतर लगेगा ।

Fig.1.3

उत्तर: पहले वाली विधि से टुकड़े का आधार 2.5 से.मी. था और कोण   था । इस लिए इसके ऊंचाई     से. मी. थी और लंबी फांक में से 40 टुकड़े बनते थे ।जो की राय है कि आधार तो वही 2.5 से.मी.     रहे पर ऊंचाई कम कर दी जाए ताकि आधार के साथ का कोण  41°  हो । ऐसा करने से समकोण की ऊंचाई  2.5 tan 41° =2.5 x 0.859 = 2.173  से.मी. हो जाएगी ।   तो  50   से.मी.  x 2.5 से.मी  फांक से फांक में से  50/2.173 = 23 आयत बन जाएंगी जिन्हें कोनो से काटने पर 46 टुकड़े बन जाएंगे जब कि पहले   बनते थे । क्या हम उसे ट्रिकमास्टर जो कहें या ट्रिगमास्टर जो ?

३. ट्रिग फलन

दिखाओ कि: sin (90°- x) = cos x, tan (90°- x) = cot x, sec (90°- x) = cosec x, sin (90°- x) = cos x.

Fig.1.4

उत्तर: एक त्रिकोण के सारे कोणो का योग   180° होता है । इसलिए एक समकोण ABC  में यदि ∠ BAC = x, तो ∠ACB = 90° – x   होगा ।

sin (90° – x) = AB/AC = cos x

tan (90° – x ) = AB/BC = cot x

sec (90° – x) = AC/BC = cosec x