जयपाल भगत

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कहानी के सब नायक काल्पनिक हैं

जयपाल भगत एक होनहार व्यापारी था । वह बहुत कम पढ़ा लिखा था पर उसकी व्यापार संबंधी बुद्धि बहुत अच्छी थी । वह कानपुर के पास एक छोटे से गांव में अपनी पत्नी जानकी के साथ रहता था । उनका एक बेटा भी था जिसका नाम मनीराम था । गांव के आसपास कोई अच्छे स्कूल नहीं थे । इसलिए मनीराम शहर में एक बोर्डिङ स्कूल में रहता था ।

जयपाल अक्सर अपनी पत्नी के साथ कार में इधर उधर घूमने जाता था । एक दिन गाड़ी में सैर करते हुए उसने एक भू-सम्पत्ती की बिक्री का इश्तिहार देखा । एक बूढ़ा आदमी मर गया था –  पत्नी और एक जमीन के टुकड़े को पीछे छोड़ कर । ज़मीन का टुकड़ा लगभग 5 किलोमीटर लंबा और 1 किलोमीटर चौड़ा था, पर वीराने में था – उसके समीप दूर दूर तक कुछ भी नहीं था ।  वह अकेली औरत अब वहां नहीं रहना चाहती थी । इस ज़मीन की गुप्त नीलामी हो रही थी । उसे कोई और लोग वहां नहीं दिखे क्योंकि यह एक वीराना स्थान था और शायद नीलामी  की घोषणा भी अच्छी तरह से नहीं की गई थी । होनहार व्यापारी होने के कारण उसने  बोली लगा दी; 50 लाख रुपए की। यह बोली बहुत ऊंची नहीं थी और इतना खर्चा वह आसानी से सह सकता था ।

खरीदी हुई भूमी का क्या किया जाए

जयपाल को अचम्भा हुआ कि उसकी बोली सफ़ल हो गई थी । यह प्रसन्नतापूर्ण आश्चर्य था और  अब वह इस भूमी के टुकड़े का स्वामी था । उसे नहीं पता था कि अब वह इस खेतीबाड़ी वाली भूमी का क्या करेगा । वह एक किसान तो नहीं था पर एक चतुर मनुश्य अवश्य था । इधर उधर लोगों से बात करने पर उसे एक भूमि-भवन व्यापार का दलाल (real estate agent) मिला जो उस ज़िले को अच्छी तरह से  जानता था । उसने परामर्श दी कि अच्छे लाभ के लिए उस भूमि को एक आवासीय परियोजन (housing project) के लिए प्रयोग करे । अच्छा यही रहेगा कि वह किसी ऐसे व्यापारी से बात करे जो ऐसे परियोजन का विकास करता हो ।

किसी और से बात करने से पहले दलाल और जयपाल ने कुछ हिसाब लगाया । यदि इस भूमी पर मकान बनाने हों तो इसका 6/10 भिन्न तो सड़कों और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में लगाना पड़ेगा । इसका मतलब है कि भूमि के 4/10 भाग पर मकान बन सकते थे ।

दशमलव का बिन्दु

उन्ही दिनों जयपाल का बेटा मनीराम स्कूल से छुट्टियों पर घर आया । बातें करते करते मनीराम ने बताया कि स्कूल में उसने दशमलव विधि सीखी है । इसका प्रयोग ऐसे हिसाब को सरल बना देगा । जयपाल गर्वपूर्वक प्रसन्न था कि उसके बेटे के पास एक नया ज्ञान थाऔर वह इसे जानने के लिए उत्सुक था ।

मनीराम: पिताजी. आप 1/10 को (1) और 1/100 को ((1)) कर के लिखते हो । तो आप दशमलव का प्रयोग तो कर ही रहे हो । मैंने सीखा है कि 1/10 को 0.1 लिखा जा सकता है । जो भी अंक इस दशमलव के दाईं ओर होता है उसका संख्या मूल्य कम हो जाता है । यदि अंक बिन्दु के बिलकुल साथ हो जैसे 0.1 तो इस 1 का मूल्य 1/10 होगा, यदि एक स्थान छोड़ कर हो जैसे 0.01 तो इसका मूल्य 1/100 होगा, इत्यादि ।

आवासीय परियोजन का ढांचा

इस विधि का प्रयोग करके मैं लिखूंगा कि भूमि का 0.6 हिस्सा तो सड़कों, पार्कों, चिकित्सालय और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं मे प्रयोग होगा और 0.4 हिस्से पर व्यक्तिगत मकानो के प्लाट बनेगे । इस विधि की खूबी यह है कि आप 0.4 का सरलता से योग, घटाव, गुणा और भाग कर सकते हो ।           आपने 5000 मीटर (5 किलोमीटर) लम्बी और 1000 मीटर (1 किलोमीटर) चौड़ी यानि 5000000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की ज़मीन खरीदी है ।  प्लाट बनाने वाला 0.4 भाग सीधा 0.4 x 5000000 अथवा 2000000 वर्ग मीटर हो गया ।

जयपाल: शाबाश बेटा । एक बड़े घर का प्लाट 500 वर्ग मीटर होता है, तो तेरे हिसाब से इसमें कितने प्लाट बन जाएंगे ?

मनीराम: इस में 2000000/500 यानि 4000 प्लाट बनेगे । देखो 1/4000 भिन्न को 2.5/10000 भिन्न या 0.00025 भाग भी लिखा जा सकता है । तो आप आवासीय परियोजन के विकास करने वाले व्यापारी को यह भी कह सकते हैं कि इस भूमी का 0.6 भाग सार्वजनिक प्रयोग कार्य में होगा और 0.00025 भाग प्रति मकान 4000 मकान बनाने में लगेगा ।

जयपाल ने अपने दलाल को बुलाया और दोनो कई परियोजन के विकास करने वाले व्यापारियों से मिले । सभी यही कहते थे कि यह भूमी खेतीबाड़ी के लिए है और सरकार इस तरह के परियोजन की आज्ञा नहीं देगी । अंत में एक व्यापारी ने कहा कि देखो इस परियोजन की सफ़लता की संभावना बहुत कम है ।  अगर आज्ञा मिल भी गई तो शायद 10 या 20 सालों के बाद मिले । परियोजन का सारा ख़र्च भी उसे ही उठाना पड़ेगा । आप तो सोच रहे हैं कि प्रति प्लाट 50 लाख रुपए मिल जाएंगे । शायद, पर संभावना बहुत कम है पर मैं आप को निराश नहीं करूंगा । यदि आप चाहें तो मै आपको 50000 रुप​ए प्रति प्लाट के लिए नकद दे दूंगा । उसके बाद सब घाटा या फ़ायदा मेरा होगा ।

जयपाल को भारी लाभ हुआ

मनीराम  ने हिसाब लगाया कि उसको 50000 रुपए प्रति प्लाट के भाव से 4000 प्लाटों के पैसे मिल जाएंगे । यह बने 50000 यानि 0.5 लाख x 4000 जिसका मतलब है 2000 लाख या 20 करोड़ रुपए । उसने पिताजी को कहा, “सौदे में बड़ा अच्छा लाभ है, एक दम कर लो”।

जयपाल बेटे की बुद्धि से बहुत प्रसन्न था । उसने सोचा कि उसने तो केवल 50 लाख रुपए नीलामी के, और फिर दलाल का शुल्क और थोड़े बहुत छोटे छोटे खर्चे किए थे और इसमें बीस करोड़ रुप​ए मिल रहे हैं । वह व्यापारी के पास गया, भूमी बेची और 20 करोड़ रुपए ले आया ।

तब उसने मनीराम को बुला कर कहा, “बेटा, मैं यह 20 करोड़ रुप​ए एक अलग खाते में डाल रहा हूं, तेरे लिए । मेहनत कर के पढ़ तो विश्व में कहीं भी शिक्षा के लिए जा सकता है ।”

चुनौती

तानिया ने 384.6 रुप​ए का सामान खरीदा और दुकानदार को 500 रुपए का नोट दिया जिसने 15.4 रुप​ए वापिस लौटाए । तानिया को दुकानदार पर बहुत गुस्सा आ रहा है । क्या उसने कुछ गलत किया ?

उत्तर: सामान था 384.6 रुप​ए का और उसने वापिस लौटाए  15.4 रुप​ए । इन दोनो का योगफल है 400 रुपए पर तानिया ने तो 500 रुपए का नोट दिया था । दुकानदार को 115.4 रुप​ए वापिस लौटाने चाहिए थे । ठीक ही तानिया गुस्सा कर रही थी ।