महाराजा सूर्यमान

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महाराजा सूर्यमान

बच्चों को मज़ा आता है जब अध्यापक साधारन पढ़ाई की जगह एक कहानी सुनाते हैं । इस कक्षा के विद्यार्थी भी बहुत प्रसन्न हुए जब अध्यापक ने कहा कि आज कहानी का दिन है ।

प्राचीन काल में एक राजा था जो प्रतिदिन प्रात: सूर्यभक्ती करता था । उसका नाम था महाराजा सूर्यमान । राजा लँबे कद का और देखने में सुंदर था । वह बहादुर भी था जैसे एक राजा को होना चाहिये । उसकी प्रजा उसे सराहती थी पर उसके  शत्रु उससे डरते थे क्यों की उसकी सेना बहुत बड़ी थी ।

महाराजा सूर्यमान बुद्धिमान व्यक्तियों का प्रशंसक था ।  सम्मान  से वह उन्हें बुद्धिमान कह कर ही पुकारता था । हर महीने में वह उनकी एक सभा करता था ।  सभा के बाद हर बुद्धिमान को वह राजसी भोजन और भेंट देता था ।  यदि कोई बुद्धिमान बहुत अच्छी चीज़ बताए  तो उसे राजा बड़ी बड़ी भेंट देता था ।

बुद्धिमान का प्रश्न

एक सभा में एक बुद्धिमान ने हाथ उठा कर कहा: महान महाराजाजी, क्या मैं पूछ सकता हूं कि आपकी सेना में कितने योद्धा हैं ?

महाराजा: हमें अपनी सेना के वीर योद्धाओं पर गर्व है । हमारे पास नौ नौ घुड़सवार तलवार वाले योद्धाओं की तीन तुकड़ियां, नौ नौ पैदल तीर चलाने वाले योद्धाओं की तीन तुकड़ियां और नौ नौ पैदल शूलधारी योद्धाओं की तीन तुकड़ियां हैं ।  हमारी सेना बहुत शक्तिमान  है ।

राजा को इस तरह गणना करनी पड़ी क्योंकि उस समय नौ ही सबसे बड़ा आंकड़ा था । उसके बाद उसे कहना पड़ता था “नौ और इतने योद्धा” या “इतने बारी नौ के नौ” । वह ठीक ढंग से गणना नहीं कर पाता था कि उसके पास कितना धन है या उसकी प्रजा की क्या संख्या है ।

मैं आपके लिए एक भेंट लाया हूं, यह अंडा

बुद्धिमान: महान महाराज, मैं आपके लिए एक भेंट लाया हूं, यह अंडा ।

महाराजा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया ।  वह बोला: बुद्धिमान अपनी सीमा में रहो । इस तुच्छ भेंट से मेरा अपमान मत करो ।  हमारे मुर्गघर में इससे भी अच्छे नौ के नौ के नौ से भी अधिक संख्या में अंडे हैं ।

बुद्धिमान: प्रतिष्ठित महाराजा जी यह एक साधारण अंडा नहीं है । यह एक नया चिन्ह है । आपकी बुद्धिमत्ता की प्रतिश्ठा में मैं एसे सूर्य का नाम दूंगा । इस अंडे पर आधारित मैं एक नवीन गणना सिद्धांत का प्रस्ताव दूंगा । आंकड़े 1 से 9 पहले की तरह ही प्रयोग किए जाएंगे पर अगला आंकड़ा होगा दस – जिसे लिखा जाएगा 10 । इससे आगे हम लिखेंगे 11, 12, 13 इत्यादि जब हम 19 तक नहीं पहुंच जाते । फिर हम सूर्य का प्रयोग कर के 19 के आगे वाले आंकड़े को बीस (20) का नाम देंगे । ऐसे ही हम 30, 40, 50, 60, 70. 80 और 90 भी लिखते जाएंगे । 90 के बाद लिखेंगे 91, 92, 93 इत्यादि 99 तक । फिर अगला आंकड़ा होगा 100 – बोलने में सौ ।

अब राजा अपनी सेना के योद्धा गिन सकता था

राजा कुछ हक्का बक्का सा हो गया और बोला: इस चिन्ह का मेरी सेना की संख्या से क्या संबंध है ?

इस विधि में 9 और 9 हो जाएंगे 18 और तीन बार नौ बनेंगे 27 । अत: आप की सेना में होंगे 27 घुड़सवार तलवार वाले योद्धा, 27 पैदल तीर चलाने वाले योद्धा और 27 पैदल शूलधारी योद्धा । तब 27, 27 और 27 का योग कर के कह सकेंगे कि आप की सेना में कुल 81 योद्धा हैं । यह कहना सरल और स्प्श्ट हो जाएगा बिना किसी नौ के नौ के चक्कर से ।

राजा ने थोड़ी देर विचार करने के बाद प्रसन्नता से कहा: यदि मैं सेना में नौ योद्धा और ले लूं तो मेरी सेना की संख्या 90 हो जाएगी । बुद्धिमान, क्या तुम यही कह रहे हो  ?

बुद्धिमान: हां प्रतिष्ठित महाराजा । इस विधि की सरलता देखें । नौ और एक 10 बन जाते हैं, फिर एक एक बढ़कर 11, 12, 13……19 और फिर 19 और एक 20 । 10 दसों का सौ (100) होता है, 10 बारी सौ का हज़ार (1000) इत्यादि ।  इस विधि में आंकड़े का मूल्य उसके स्थान पर निर्भर होगा । उदाहरण है 3572 – इसमें आंकड़ा 2 सब से दाईं ओर है तो इसका मूल्य 2 ही रहेगा, आंकड़े 7 क मूल्य होगा 70, 5 का 500 और 3 का मूल्य होगा 3000 । तो 3572 का अर्थ है 3000 + 500 +70 +2 ।

आप और भी बड़े आंकड़े लिख सकते हैं । इस विधि से आप अपने विशाल धन की गणना कर सकेंगे और अपने राज्य में प्रजा की संख्या भी जान जाएंगे ।

शून्य

राजा इस आविश्कार से बहुत प्रसन्न हुआ । उसे यह गणना विधि अकलमंद और उपयोगित लगी । उसने बुद्धिमान को बहुत बड़ा पुरस्कार दिया: एक मकान, एक खेत और कुछ पशु । इतना बड़ा पुरस्कार उसने पहले किसी को नहीं दिया था । किन्तु उसने सभा के सामने घोशणा की कि इस अंडे के चिन्ह का नाम सूर्य नहीं शून्य होगा । तब से भारत में शून्य वाली गणना विधि प्रचलित है, और दूसरे देशों में भी इसका प्रयोग ज़ीरो या सिफ़र के नाम से होता है । राजा ने शून्य विधि के आविश्कार के लिए बुद्धिमान को पुरस्कार तो दिया पर यह भी कहा कि वह सबको समझाए कि इस विधि का प्रयोग योग, गुणा, विभाजन (भाग) इत्यादि में कैसे होगा । अब बुद्धिमान को अपनी प्रतिश्ठा बचानी थी । और फिर जीवन भर निर्वाह करने के लिए पुरस्कार तो उसे मिल ही चुका था ।

कैरी या हासिल

अगली बैठक में राजा ने बुद्धिमान से कहा: दिखाएं यह नई विधि योग में कैसे उपयोग होगी ।  किसान की तो दस ही उंगलियां हैं ।  वह दस से बड़े आंकड़ों का योग कैसे करेगा ?

बुद्धिमान:  9 + 2 के लिए पहले वह 9 में 1 जोड़ कर 10 बना देगा  ।  फिर वह अंक 1 को कसी के साथ कैरी कर के बाईं ओर रख देगा । फिर बचा हुआ 1 दाईं ओर के आंकड़े 0 में जोड़ देगा तो नया आंकड़ा 11 हो जाएगा ।

एक और उदाहरण देता हूं । महाराजाजी की सेना में 81 योद्धा हैं, यदि आप एक दूसरा राज्य जीत कर उनके 69 योद्धा भी अपनी सेना में मिला लें तो इसका योग ऐसे होगा ।

8 1
6 9
9 +1  बने 10, 1 को बाईं ओर कैरी करें 1 0
8 + 6 +1=15, 1 को बाईं ओर कैरी करें 1 5 0

 

राजा ने सब बुद्धिमानों की ओर देखा और उनकी राय ली ।  उन्हें यह विधि पसंद तो आई पर कहा कि किसानों को इसके बारे में सिखाना  पड़ेगा । घटाने की विधि भी योग जैसी ही थी, ज़रूरत पड़ने पर बाईं ओर से एक कैरी उधार लिया जाता था ।

गुणा

पुरु: सर, यह कहानी नहीं थी । बस हमें योग और घटाना सिखाने की आपकी चाल थी ।

अध्यापक​: पुरु, तुम जल्दी समझ जाते हो । अब बोर्ड पर आओ और सब को दिखाओ इस विधि को गुणा करने में कैसे प्रयोग करोगे । कैरी का प्रयोग कर के 63 को 12 से गुणा करो ।

6 3
2
63 x 2 1 2 6
63 + 10 6 3 0
126+ 630 7 5 6

पुरु: 10 + 2 = 12,  मैं पहले 63 x 2 का उत्तर निकालूंगा ।  यह हो जाएगा 126 ; 63 को 10 से गुणा करने पर 6 और 3 बाईं ओर कैरी हो जाएंगे और दाईं ओर केवल शूम्य रह जाएगा । तो गुणा का फल हो जाएगा 630 ; 630 + 126 = 756 – यह मेरा उत्तर है ।

विस्तृत विभाजन (long division)

अध्यापक​: किसान को विभाजन (भाग) भी करना पड़ेगा । तानिया, दिखाओ भाग कैसे करते हैं । 425 को 25 से भाग कर के दिखाओ ।

तानिया: मैं यहां  विस्तृत विभाजन (long division) नहीं करूंगी । मैं जानती हूं कि 25 x 4 =100 और 425 x 4 =1700. अत​: 425 को 25 से भाग करने का उत्तर वही होगा जो 1700 को 100 से भाग करने का, जो है 17.

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टिन्कू: सर, तानिया को चालाकी से प्रेम है । मैं विस्त्रित विभाजन कर सकता हूं । मैं पहले भाज्य  लिखूंगा 425 और उसके बाईं ओर भाजक लिखूंगा 25 । क्यों कि भाज्य में सबसे बाईं ओर का अंक 4 है, मैं पहले 4 भाग 25 निकालने का प्रयत्न करूंगा । क्यों कि 4 तो 25 से कम है, मैं अगला आंकड़ा यानि 2 नीचे लाकर 42 लिख दूंगा । 42 को 25 से एक  बारी भाग किया जा सकता है, मैं ऊपर 1 लिख दूंगा और 42 – 25 यानि 17 को नीचे लिख दूंगा । फिर मैं 425 के आखिरी अंक 5 को नीचे कैरी के 175 बना दूंगा । 175 को 25 से 7 बारी भाग किया जा सकता है, इस लिए मैं ऊपर भाजफल मे 7 लिखूंगा । क्यों कि 25 x 7 =175, हमारा शेषफल शून्य होगा । इस लिए उत्तर है 425 ÷ 25 = 17 ओर शेषफल शून्य ।

अध्यापक​: शाबाश टिन्कू । जैसे तूनें बताया कि कई बार विभाजन पूर्ण नहीं होता और एक विशेषफल भी बच जाता है । सब लोग घर जा कर अभ्यास के प्रश्न करो ।

हरीहरण ने स्कूल से घर जा कर अपने पिता से बात की: पिताजी, याद है कि योग और घटाव करते हुए मैं अपनी उंगलियों का प्रयोग करता था तो आप को बहुत गुस्सा आता था ?

पिता: हां, तू अटक जाता था क्यों की उंगलियां तो तेरी दस ही हैं । फिर तुझे जूते उतारने पड़ते थे ।

हरीहरण: आज हमारे अध्यापक ने एक कहानी सुनाई जिस के बाद मैं बड़ी संख्या वाले प्रश्न भी कर लेता हूं ।

इसके बाद हरीहरण ने पिता को महाराजा सूर्यमान वाली पूरी कहानी सुनाई ।  पिता प्रसन्न हो गए पर वह​ प्रभावित तो हुए वार्षिक समारोह में जब इस कहानी पर विद्यार्थियों ने नाटक किया ।

चुनौती

एक  दुकान वालों ने कहा कि वह 3456 खिलौने मुफ़्त में देंगे । वह लाइन  में खड़े हर व्यक्ति को 9 खिलौने देंगे । लाइन मे तुम्हारा नंबर 400 है ।  कितने लोगों को किलौने मिलेंगे ?  घबराओ नहीं, अभी भी तुम्हारी बारी आ सकती है क्यों कि कुछ लोग ऊब कर घर जा रहे हैं । कितने लोगों के छोड़ जाने के बाद तुम्हारी बारी आ सकती है ?

उत्तर: 3456 खिलौने हैं और हर व्यक्ति को 9 मिल सकते हैं । खिलौने मिलने वालों की संख्या निकालने के लिए विभाजन करो – भाज्य 3456 और भाजक 9 तो पता चलेगा कि केवल 384 लोगों की बारी आएगी । यदि तुम 400 नम्बर पर हो तो 400 – 384 यानि 16 लोगों के छोड़ जाने पर तुम्हारी बारी आ जाएगी ।