तानिया का सुहावना सपना

ankafig.15.1

तानिया का सपना

दीपावली की रात थी । तानिया के घर के बाहर बिजली की तारों की लड़ियां लगी हुईं थी । इन लड़ियों से लटक रहे थे छोटे छोटे रंग बिरंगे जगमगाते हुए लट्टू । केवल तानिया के घर ही नहीं, अड़ोस पड़ोस में जिधर भी देखो ऐसा ही हर्षपूर्ण वातावरण था । घर घर में भेंटों के भी ढेर लगे हुए थे – यह भेंटें संबंधियों, मित्रों और पड़ौसियों ने दी थी ।  तानिया उत्साहित तो बहुत थी पर किसी तरह सो गई । सोते सोते उसने एक बहुत सुहावना सपना देखा ।

वह अगले दिन स्कूल में सब दोस्तों को पिछली रात के सपने  के बारे में बता रही थी । गणित के अध्यापक ने तानिया को क्लास में बातें करते हुए पकड़ लिया ।

अध्यापक: तानिया, साथ बैठे हुए दोस्त से बात न कर । यदि बात इतनी ही मज़ेदार है तो क्लास के सामने आ और सब को बता ।

तानिया ने पहले तो सोचा कि अध्यापक गुस्से में है, और वह हिचकिचाई, पर जब अध्यापक अपनी बात पर डटा रहा तो वह उठ कर क्लास के सामने खड़ी हो गई । वहां उसने अपने सपने की पूरी कहानी सुना दी, “मैंने सपना देखा कि हमारे घर में भेंटों के ढेर लगे हुए थे । एक भेंट के डिब्बे पर लिखा हुआ था, “तानिया को चाचाजी से” । वह एक बहुत बड़ा डिब्बा था और उस पर  लिखा हुआ था, “दीवाने चाकलेट” । मैंने डिब्बा खोला तो उसमें एक भी चाकलेट नही दिखा, पर उसमें १० डिब्बे थे – सभी एक जैसे । मैंने उत्सुकता से सारे डिब्बे खोल डाले । यह कोई दीवानापन अवश्य था । कोई चाकलेट नहीं दिखा । पर हर डिब्बे में दस एक जैसे डिब्बे थे । मैं तो व्याकुल हो गई । यह कैसी शरारत है?  मैंने इन डिब्बों को भी खोल दिया । अब मैं खुशी से कूद पड़ी । हर डिब्बे में दस एक जैसे दीवाने चाकलेट थे । हर एक चाकलेट इतना बड़ा था कि मेरे मुंह में तो पूरा भी न आता । पर उस पर निशान लगे हुए थे जहां से तोड़कर मैं हर चाकलेट के समान आकार के दस टुकड़े बना सकती थी । मैंने पहला टुकड़ा खाया तो बस मज़ा आ गया । सपना यहीं समाप्त हो गया । सुबह उठकर देखा तो बड़ी निराश हुई । ऐसा कोई डिब्बा ही नहीं था जिस पर लिखा हो तानिया को चाचाजी से ।”

भिन्न और दशमलव संख्याएं

अध्यापक​: तामिया, तूने दशमलव विधि का बढ़िया व्यौरा दिया है । एक बड़े डिब्बे में दस छोटे डिब्बे, हर छोटे डिब्बे में दस नन्ने मुन्ने डिब्बे, हर नन्ने मुन्ने डिब्बे में दस दीवाने चाकलेट और हर दीवाने चाकलेट के दस टुकड़े । गणित की भाषा में यह था तानिया का सपना: 1 = 10 x 0.1, 0.1 = 10 x 0.01, 0.01 = 10 x 0.001, इत्यादि ।

यह बिन्दु दशमलव का बिन्दु (decimal point) है । जो भी अंक इस दशमलव के दाईं ओर होता है उसका संख्या मूल्य कम हो जाता है । यदि अंक बिन्दु के बिल्कुल  साथ हो जैसे 0.1 तो इस 1 का मूल्य 1/10 होगा, यदि एक स्थान छोड़ कर हो जैसे 0.01 तो इसका मूल्य 1/100 होगा, इत्यादि । तो दशमल उन भिन्न संख्याओं को लिखने का तरीका है जिन का हर 10 या 10 का कोई गुणज हो ।

अब यदि तुमने भिन्न 3572/10000  लिखना हो तो इसे 3000/10000 + 500/10000 + 70/10000 +2 /10000  या 3/10 + 5/100 + 7/1000 + 2/10000 भी लिख सकते हो । इसको आसानी से दशमलव बिन्दु लगा कर 0.3572 लिखा जाएगा ।

तानिया: यह तो बड़ा अच्छा है । भिन्न अंकों के योग और घटाव के लिए तो गुणज निकालने पड़ते थे, लगता है कि दशमलव संख्याओं को तो यह भी नहीं करना पड़ेगा ।

अध्यापक​: देख लेते हैं कि दशमलव का योग अधिक सरल है या भिन्न अंक का । पहली और दूसरी पंक्ती वाले छात्रो, तुम 1/6 + 1/16 का हल निकालो और हल को दशमलव संख्या में बदलो । तीसरी और चौथी पंक्ती वालो पहले,  तुम 1/6 और 1/16 को दशमलव में बदलो और बाद में योग करो । अंकों की दशमलव की स्थिति का पूरा पूरा ध्यान रखना ।

तीसरी और चौथी पंक्ती के छात्रों ने थोड़ी सी देर के बाद कहा “1/6 = 0.16666 और 1/16 =0.0625, दोनो का योगफल 0.22916  । थोड़ी और देर बाद पहली और दूसरी पंक्ती ने कहा “6 और 16 का लघुतम सार्व गुणज (lowest commom multiple or LCM) है 48, 1/6 + 1/16 = 8/48 + 3/48 = 11/48 = 0.22916” । दोनो गुटों का वही उत्तर था ।

टिन्कू ने हाथ उठा कर कहा “इन दोनो में से कोई भी उत्तर  पूरी तरह ठीक नहीं है ।

अध्यापक: इस समय हम केवल 5 दशमलव तक का  उत्तर ठीक समझेंगे । बाकी किसी दूसरी क्लास में सिखाऊंगा ।

घंटी बजी और क्लास खतम हो गई ।

चुनौती

सन 1955 में एक रुपए में 64 पैसे होते थे । चार पैसों का एक आना होता था । आठ पैसों या दो आने का सिक्का होता था दवन्नी ।  चार आने का सिक्का था चवन्नी और आठ आने का सिक्का था अठन्नी । सरकार ने कहा कि अब एक रुपए में 100 न​ए पैसे होंगे । आना, दवन्नी, चवन्नी और अठन्नी का मूल्य  नए पैसों में निकालो ।

उत्तर:

अठन्नी = 1/2 रुपए = 50/100 रुपए = 50 न​ए पैसे ।

चवन्नी= 1/4 रुपए = 25/100 रुपए = 25 न​ए पैसे ।

दवन्नी= 1/8 रुपए = 12.5/100 रुपए = 12.5 न​ए पैसे । सरकार ने दवन्नी का मूल्य 12 न​ए पैसे नियत कर दिया ।

आना= 1/16 रुपए = 6.25/100 रुपए = 6 न​ए पैसे ।