विजयदशमी

Image result for vijaydashmiतानिया का सपना

विजयदशमी यानी दशहरे के दिन श्री रामचंद्र जी ने दस सिरों वाले राक्षस का विनाश किया था । इसकी खुशी में हज़ारों शहरों में दस सिर वाले रावण का पुतला जलाया जाता है । तानिया भी दशहरे के मेले में गई और पुतला जलने के बाद घर आ गई । वह थकी हुई थी और सो गई । अचानक डर से कांपती हुई उठी और चीख मारते हुए बोली – दादाजी ।

दादाजी ने पूछा: क्या हुआ ? तू डर से कांप क्यों रही है ?

तानिया: मैने सपने में एक राक्षस देखा जिसके दस हाथ और दस मुंह थे । जो कुछ भी उसे दिखता था, वह उसके दस समान टुकड़े कर देता था और फिर हर टुकड़े को अपने दस मुहों में डाल लेता था । उसने एक बहुत बड़ा पहाड़ देखा । उसके 10 टुकड़े कर दिए । हर टुकड़े को तोड़ कर फिर से उसके 10 शिलाखंड बना दिए । जब भी वह कुछ तोड़ता था तो टुकड़ों का आंकड़ा 10 गुणा बढ़ जाता था पर हर टुकड़े का भार केवल एक दसवां भाग रह जाता था । एक पत्थर मुझे भी लगा तो मैं उठ गई । अभी भी मुझे बड़ा डर लग रहा है ।

दादाजी: हां, तू आज विजयदशमी के मेले में गई थी और वहां तूने दस सिर वाले रावण का पुतला देखा था । तेरा  सपना उसी के बारे में होगा ।

तानिया: मुझे डर लग रहा है ।

दादाजी: मैं तुझे दसों की एक कहानी सुनाता हूं । यह कहानी मुझे अच्छी तरह याद है । हमें स्कूल में हमारे गणित सर ने सुनाई थी । तुझे यह तो पता है कि एक रुपए में सौ पैसे होते हैं ।

तानिया: कोई भी पैसे का प्रयोग नहीं करता । बेकार है, एक पैसे का कुछ भी नहीं मिलता ।

दादाजी की कहानी

            दादाजी: सन 1955 में, रुपए की कीमत आज से बहुत अधिक थी और इसे किसी अलग मूल्य के सिक्कों में बांटा जाता था । एक रुपए में 64 पैसे होते थे । चार पैसों का एक आना, आठ पैसों की दवन्नी, सोलह पैसों की चवन्नी और बत्तीस पैसों की अठन्नी होते थे ।

तानिया: इसका अर्थ है कि एक रुपए मे 64 पैसे, 16 आने, 8 दवन्नियां, 4 चवन्नियां या 2 अठन्नियां होते थे । मतलब कि हर सिक्का उससे ऊपर वाले का आधा होता था । क्या दो पैसे का भी कोई सिक्का होता था ?

दादाजी: हां, उसे टका कहते थे ।

तानिया: दादाजी, इस बात का दस सिर वाले राक्षस से क्या संबंध है ?

दादाजी: सरकार ने एक नया सिस्टम निकाला । अब एक रुपए में 100 न​ए पैसे हो गए । अब 1, 10, 20 और 50 न​ए पैसे के सिक्के आ गए । लोग अपने पुराने सिक्कों को फैंक तो नहीं सकते थे । सरकार ने कई वर्षों तक लोगों को दोनो सिक्के प्रयोग करने दिए – न​ए भी और पुराने भी । अब तू इन सिक्कों के बारे में सोच और सो जा । मैं तेरी मां को कहूंगा कि कल स्कूल से आने के बाद वह तुझे सिखाएगी कि न​ए और पुराने सिक्कों में क्या संबंध था । गुड नाइट ।

तानिया का दिमाग अब डरावने राक्षस की ओर नहीं था और वह सो गई ।

स्कूल में

तानिया को दादा जी की कहानी इतनी मनोरंजक लगी कि अगले दिन स्कूल में भी मित्रों से इसकी बात करती रही ।  गणित के अध्यापक ने उसे क्लास में बातें करते हुए देख लिया ।

      अध्यापक: तानिया, साथ बैठे व्यक्ती के साथ बातें न कर । यदि बात इतनी ही मनोरंजक है तो सब को बता । चल आजा क्लास के सामने और बता ।

पहले तो तानियां ने सोचा कि अध्यापक गुस्सा हो गए हैं, इसलिए चुप रही । अध्यापक के आग्रह पर उसे उठ कर क्लास के सामने आना ही पड़ा । उसने पूरी कहानी बता दी कि पहले रुप​ए में 64 पैसे होते थे और बाद में 100 न​ए पैसे । दोनो समय के सिक्कों के बारे में भी बता दिया ।

अध्यापक: क्या दादाजी ने तुझे बताया कि न​ए और पुराने सिक्कों के अदल बदल की गणना कैसे करते थे ?

तानिया: नहीं, यह स्कूल के बाद मेरी मांजी मुझे सिखाएंगी ।

अध्यापक: तानिया, तूने एक बड़ी मनोरंजक कहानी सुनाई है । मेरी सोच में सारी क्लास को यह सिक्कों की अदला-बदली की गणना सीखनी चाहिए । हम इसे आज की शिक्षा का विषय बना लेते हैं । हम इसे पहले एक भिन्न की समस्या की तरह सोचेंगे । आशा है कि सब ने तानिया की कहानी ध्यान से सुनी होगी । कौन बता सकता है कि पुराने सिस्टम में सिक्कों की भिन्न क्या थीं ?

टिंकू: मैं हमेशा ही तानिया की बातों को ध्यान से सुनता हूं क्यों कि वह मेरी बैस्ट फ़्रैंड है । पुराने सिक्के एक रुप​ए के 1/2, 1/4,  1/8, 1/16, 1/32 और 1/64 भाग थे ।

अध्यापक: अब हम इन भिन्न अंकों को उन में बदलेंगे जिन भिन्न अंकों के हर 10 के गुणाकार हों जैसे 10,100,1000 इत्यादि । उदाहरण है 1/2 = 5/10 या 50/100  । इसका मतलब है कि एक रुपए का आधा 50/100 रुप​ए होगा । क्योंकि एक नया पैस 1/100 रुपए के बराबर है, एक अठन्नी यानी आधे या 50/100 रुपए हो जाएंगे 50 न​ए पैसे । ऐसी भिन्न अंकों को लिखने की दूसरी या भी है जिसे दशमलव कहा जाता है । इस विधि में 50/100 = 5/10 = 0.5   ।  तो हम कहेंगे कि अठन्नी का मूल्य 0.5 रुपए था ।  तो सब सिक्कों का बदलाव हम ऐसे ही करेंगे क्यों की कोई भी सिक्कों का प्रयोग करें, रुपए का मूल्य तो वही रहेगा । तानिया, अब तू बता कि दशमलव में  चवन्नी कितने रुपए की होगी ।  लिखने में रुपए का मुद्रा चिन्ह (₹) का प्रयोग कर ।

तानिया: चवन्नी = ₹1/4 = ₹25 /100 = ₹0.25

अध्यापक: शाबाश । पुरू तू अब इसी प्रकार दवन्नी का दशमलव में मूल्य निकाल ।

पुरू: दवन्नी = ₹1/8 = ₹125 /1000 = ₹0.125

टिंकू ने हाथ उठाकर पुछा: दवन्नी होति है  ₹0.125, और नया पैसा होता है ₹0.01  , तो एक दवन्नी के कितने नए पैसे मिलते थे ?

केट: यहां तो धोखा होता होगा । कभी 12 और कभी 13, जिसमें किसी का लाभ हो ।

अध्यापक​: नहीं, सरकर ने दवन्नी के 12 न​ए पैसे नियमित कर दिए थे । मनाल, अब एक आने के कितने नए पैसे ?

मनाल: यह प्रश्न थोड़ा कठिन है । एक आना = ₹1/16 = ₹625 /10000 = ₹0.0625  या एक आने के ६ नए पैसे ।

तानिया: मुझे तो यह दशमलव सिस्टम बहुत अच्छा लग रहा है । इसमे योग और घटाव तो भिन्न अंकों की अपेक्षा बहुत सरल होगा ।

अध्यापक: देखते हैं । मैं एक प्रश्न देता हूं । पहली और दूसरी पंक्ती वाले पहले भिन्न अंकों का योग करें और फिर दशमलव में बदलें । तीसरी और चौथी पंक्तियों वाले पहले दशमलव में बदलें और बाद में योग करें । यह रहे दो भिन्न अंक 1/6 + 1/16   ।

पंक्ती तीन और चार ने उत्तर पहले निकाले: 1/6 = 0.16666 और 1/16 = 0.0625,   0.16666 + 0.0625 = 0.22916

पंक्ती एक और दो ने किया: 1/6 + 1/16 = 8/48 +3/48 = 9/48 = 22916/100000 = 0.22916

घंटी बजी और क्लास खतम हो गई ।

जब तानिया घर पर पहुंची तो उसकी मांजी तैयार बैठी थी उसे न​ए और पुराने सिक्कों की अदला बदली के बारे में बताने के लिए पर यहां तो तानिया ने मांजी को ही सिखा दिया । उसने मांजी को बताया कि कैसे गणित सर जी ने उसकी कहानी को लेकर आज का पाठ बना दिया । मांजी ने तानिया को कहा कि जाकर दादाजी को कहानी के लिए धन्यवाद दे और बताए की स्कूल में गणित सर ने इसे कैसे प्रयोग किया था ।

अगले दिन तानिया ने क्लास में गणित सर को बताया कि दादाजी ने वह कहानी इस लिए सुनाई थी क्यों कि वह एक  डरावने सपने के कारण सहम गई थी । उसका सपना तब तो डरावना था पर अब वह दशमलव की क्लास से बिल्कुल जचता है । मैने सपने में एक राक्षस देखा जिसके दस हाथ और दस मुंह थे । जो भी उसे दिखता था, वह उसके दस समान टुकड़े कर देता था और फिर हर टुकड़े को अपने दस मुहों में डाल लेता था । उसने एक बहुत बड़ा पहाड़ देखा । उसके 10 टुकड़े कर दिए । हर टुकड़े को फिर से 10 शिलाखंड बना दिए । जब भी वह कुछ तोड़ता था तो टुकड़ों का आंकड़ा 10 गुणा बढ़ जाता था पर हर टुकड़े का भार केवल एक दसवां भाग रह जाता था । एक पत्थर मुझे भी लगा तो मैं उठ गई ।

अध्यापक: तूने तो इस सपने में दशमलव विधि की पूरी व्याख्या दे दी सिवाय इसके कि वह एक राक्षस नहीं है । अब हम इसी तरह के अदला बदली का एक और उदाहरण दूंगा । दूरी को मीलों में नापा जाता था पर अब किलोमीटर में । एक मील 1.6 किलोमीटर होता है यानी 1600 मीटर । हम मीटर को इसके छोटे अकांकों में भी बांट  सकते हैं: 0.01 मीटर = 1 सैंटीमीटर और  0.001 मीटर = 1 मिलीमीटर ।

पुरू: सर बाट के लिए भी तो पुराना सिस्टम पौंड में होता था और अब किलोग्राम में है । हम दूध को भी लिटर, डैसीलीटर इत्यादि में नापते हैं ।

अध्यापक: शाबाश, लगता है कि सबको दशमलव की समझ सबको आ गई है । आज का होमवर्क है कि इन्न भिन्न अंकों को दशमलव में बदलो और फिर उनका योग करो: 1/2, 100/8. 20/3 और 100/7  ।

चुनौती

सेव का भाव 39.5 ₹ प्रति पाउंड है । अम्माजी 5 किलोग्राम आम का मुरब्बा बनाना चाहती हैं । कितने पैसे लगेंगे ?

उत्तर: 5  किलोग्राम   5 x 2,2 = 11 पाउंड ।

कुल दाम = 11 x ₹ 39.5 = ₹ 434.5