जोगी की जिज्ञासा

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जोगी का प्रश्न

जोगी ने मैडम बैनर्जी, गणित अध्यापिका, से द्विघाती समीकरण के हल के बारे में एक प्रश्न पूछा था । उसे लगा  कि मैडम ने सिर्फ़ उसे टालने के लिए कह दिया था कि इसके बारे में किसी और क्लास में बात करेंगे ।  द्विघाती संबंधी सारी क्लास निकल गई, एक दूसरे विद्यार्थी माला के प्रश्न पर भी एक पूरी क्लास लगी पर जोगी के प्रश्न का उत्तए अभी तक नहीं दिया गया था ।  जोगी को जिज्ञासा तो थी पर वह अपने आप पढ़ लेने वालों में से नहीं था । उसने मैडम जी को स्कूल में देखा और पूछा कि वह कब उसके प्रश्न के बारे में बात करेंगी । उनका उत्तर था, आज । जोगी खुश हो गया ।  दोनो क्लास में आए जहां बाकी छात्र भी बैठे थे ।

मैडम बैनर्जी: आज हम एक प्रश्न पर चर्चा करेंगे जो जोगी ने द्विघाती समीकरण के बारे में किया था । सब को याद होगा कि        y = ax2 + bx + c = 0 समीकरण को हल करने की चार विधियां थी जिनमें एक सूत्र   x = (-b ± (√(b2-4ac)))/2a  था ।

द्विघाती समीकरण के हल का अजीब सा उत्तर 

अब मैं बोर्ड पर एक समीकरण लिखूंगी और क्लास को इसे हल करने के लिए 5 मिनट दूंगी: y = x2 + 3x + 3 = 0

पांच  मिनट बाद, मैडम बैनर्जी: क्या किसी ने उत्तर निकाला है ?

सैरा: हां, मैने निकाला है पर उत्तर थोड़ा अजीब सा लग रहा है । मेरा उत्तर  x = -3/2 ± (√-3)/2  है ।

मैडम बैनर्जी ने पूछा कि यदि किसी और का उत्तर इससे मिलता  है और कई विद्यार्थियों ने हां में जवाब दिया । फिर उन्होंने कहा: टिंकू, तून रेखा चरित्र बना कर द्विघाती समीकरण का हल किया था । आ, बोर्ड पर  y = x2 + 3x + 3  समीकरण का रेखा चित्र बना । क्लास में कैल्कुलेटर वाले छात्रों से सहायता ले सकता है ।

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रेखा चित्र से इसका कोई हल नहीं है

टिंकू ने मित्रों की सहायता से एक रेखा चित्र बनाया जो ऊपर से शुरू हो कर नीचे आया और फिर शीर्ष के बाद ऊपर चला गया । पर कहीं भी वह क्षैतिज अक्ष को नहीं काट पाया । तो टिंकू ने कह दिया: लगता है x की किसी भी संख्या पर y शून्य नहीं होगा यानि इस विधि के अनुसार इस समीकरण का कोई हल नहीं है ।

क्लास ने इस प्रश्न को शीर्ष निकाल कर भी देखा ।  समीकरण   y = ax2 + bx + c का स्लोप   2ax + b  है । शीर्ष पर यह स्लोप शून्य होगा, यानी  2ax + b = 0 होगा ।  जिसका मतलब शीर्ष होगा x = -b/2a  पर । समीकरण y = x2 + 3x + 3  में  a = 1 और  b = 3, 2ax + b = 0, जब x = -3/2 है, और y = 9/4 – 9/2+ 3 = 3/4; यानी यह रेखा चित्र y = 0 तक पहुंचता ही नहीं । इस लिए पक्का हो गया कि इस समीकरण का कोई हल नहीं है ।

मैडम बैनर्जी: टिंकू कहता है कि इस समीकरण का कोई हल है ही नहीं । तेरे अजीब से उत्तर का क्या मतलब है ?

समिश्र, वास्तविक, काल्पनिक और संख्या

सैरा: यह संकल्पना हमारी भौतिक-विज्ञान की क्लास में आया था । हम प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (alternating current) के बारे में पढ़ रहे थे जिसे हम AC भी कहते हैं । आम तौर पर विद्युत धारा वोल्टेज और प्रतिरोध (resistance) का अनुपात होता है (I = V/R) । किंतु, जब भी  एक तार में से एक विद्युत धारा जाती है, वह तार के इर्द गिर्द एक चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न करती है । प्रत्यावर्ती विद्युत धारा से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बदलती रहती है । इसके समक्षेत्र (plane) की दिशा हमेशा विद्युत धारा की दिशा से अधोलंब (perpendicular) होती है । और यह चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में बदलाव धारा को धीमा कर देता है । इसलिए हमने प्रतिबाधा (impedance) की बात की थी जो इन दोनो का योग होता है और इसे लिखा जाता है Z = R +jX,  यहां j = √-1,    R को वास्तविक गिना जाता है और को jX काल्पनिक ।

मैडम बैनर्जी: शाबाश सैरा । गणित में यही धारणा है, किंतु यहां हम Z को एक समिश्र संख्या (complex number) कहेंगे और कहेंगे कि इसके दो भाग हैं, R जो वास्तविक है और iX जो काल्पनिक है । हम गणित की क्लास में  √-1 को आयोटा  कहेंगे और इसे i लिखेंगे ।

सैरा ने हाथ खड़ा किया और कहा: तो मैडम जी क्या मुझे  x = -3/2 ± (√-3)/2 के स्थान पर   x = -3/2 ± i√3/2 लिखना चाहिए था ।

मैडम बैनर्जी: हां । अब मैं यह देखना चाहती हूं कि तुम्हें आयोटा की धारणा कितनी समझ में आई । मैं बोर्ड पर कुछ समीकरण लिखूंगी  और फिर तुम्हें 5 मिनट इन पर विचार करने के लिए दूंगी ।

i2= -1,    1/i= –i,   (a + ib) + (c + id) = a + c+ i(b + d), (a + ib)(a + ib) = a2 –  b2 + 2iab,

(a +ib)(a –ib) = a2 + b2, 1/(i – 1) = (i +1)/((i – 1)(i + 1)) = (i+1)/(i2-1) = – (i+1)/2

कुछ मिनटों के बाद मैडम बैनर्जी: दीपिका तूने द्विघाती समीकरण को हल करने के लिए गुणखंडन विधि का प्रयोग किया था । अब बोर्ड पर y = x2 + 3x + 3 = 0 का हल भी उसी विधि से कर के दिखा ।   याद रख, इसमें आयोटा का प्रयोग भी हो सकता है ।

दीपिका घबराहट में पड़ गई पर बोर्ड पर चली गई और मित्रों की सहायता से यह लिखा:

y = x2 + 3x + 3  = (x + 3/2+ i√3/2) (x + 3/2 – i√3/2) = 0

इस लिए, x = -3/2 + i√3/2 or x = -3/2 – i√3/2

मैडम बैनर्जी: जोगी, अब तो तेरे प्रश्न का उत्तर मिल गया ना ?

जोगी: हां, धन्यवाद । यह विषय भी बड़ा दिलचस्प निकला ।

चुनौती

1 का घनमूल ग्रीक अक्षर ओमेगा (ω) से लिखा जाता है यानि  ω3 = 1, इस समीकरण को हल करो ।

उत्तर: ω3 = 1 यानी (ω3 – 1) = 0 या (ω – 1)( ω2 + ω  + 1) = 0.

यदि (ω – 1) = 0, ω =1.

यदि  ω2 + ω  + 1 = 0, द्विघाती समीकरण के सूत्र से ω = -1/2 ± (i√3)/2

इस तरह ω = 1, (-1/2 + (i√3)/2) या -(1/2 – (i√3)/2).