नैना की कहानी

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भाग 1 – कहानी

सैरा सोने से पहले कहानी की मांग करती थी

सैरा को अपनी दादी शांति से बहुत लगाव था । जब से सैरा ने पहले शब्द बोलने सीखे थे वह उसे नैना ही बुलाती थी । अक्सर सैरा को सोने से पहले लोरी सुनाती थी और या फिर कोई कहानी । सैरा 13-14 वर्ष की आयु में भी कभी कभी सोने से पहले कहानी की मांग करती थी । यह भी एक ऐसी ही रात थी ।

सैरा: नैना,  मुझे कोई कहानी सुनाओ, प्लीज़ ।  लंबी कहानी प्लीज़ ।

नैना: किस तरह की कहानी ? मुझे जितनी कहांनियां आती थी, सब तुझे सुना चुकी हूं ।

सैरा: कुछ भी सुना दो । जब आप इन्डिया में छोटी सी लड़की थी । उसी के बारे में सुना दो ना ।

नैना: लंबी कहानी ! जब मैं छोटी सी थी । अच्छा सुनाती हूं । मज़ेदार है पर अधिकतर यह बातें मुझे मेरी मां ने बताई थी ।

सैरा: मुझे ऐसी कहानियां बहुत अच्छी लगती हैं । अब शुरू भी कर दो ना ।

नैना: जब मेरा जन्म हुआ, हमारा परिवार गरीब भी नहीं था और अमीर भी नहीं था । बस खाने पीने के लिए अच्छी आय था ।

रईस अंकल

हमारे एक रिश्तेदार का नाम था शाह । वह मेरी माता जी शीला का मौसेरा भाई था ।  जब मैने बोलना सीखा तो मैं उसे अंकल बुलाती थी । वह अमेरिका में रहता था । जब भी हमें मिलने आता था, वह अपने बहुत अमीर होने की डींग मारता था । मेरी माता जी ने बताया कि मेरे पैदा होने पर वह हमारे घर आया था ।

शाह: शीला, तुमने मुझे एक सुंदर भांजी दी है । मैं उसे कुछ भेंट देना चाहता हूं ।

शीला: तू इस अवसर पर मिलने आ गया । बस यही तेरी भेंट है ।

शाह: शीला बहन, मुझे कुछ तो देने दो । मैं $10000 का चैक लिख देता हूं ।

शीला: नहीं चाहिए तेरा $10000 का चैक । अब तो अमीरी की डींग मार कर पैसे दे जाएगा और फिर तू सारी उमर हमें याद भी नहीं करेगा । यह उचित नहीं है ।

शाह: अच्छा, मैं $1000 दे देता हूं और अगले दस साल भी इतने ही देता रहूंगा ।

शीला की बुद्धि बहुत तेज़ थी, उसने कहा: बस उसे $1 का सगन दे दे पर हर साल आया कर ।

शाह: बस $1, यह तो शांती की बेइज़्ज़ती है ।

शीला: अच्छा अभी तो $1 ही दे दे, अगले साल चाहे तो इससे दुगना दे जाना ।

शाह: क्या इसका अर्थ है कि अगले साल से हर बारी $2 ही देकर जाऊं । यह तो बहुत कम है ।

शीला: ईश्वर तुझे दुनिया की सारी दौलत दे । ऐसे कर हर साल पिछले साल के दुगने दे दिया कर जब तक तू और शांती जीवित हो  । अब तो खुश है ?

शाह: शांती के विवाह के बाद भी ?

शीला: तो क्या शांती के विवाह के बाद उससे संबंध तोड़ देगा ? सारी उमर ।

शाह: क्षमा करना बहन, मुझे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी । जब तक शांती और मैं जीवित है, मैं हर साल उसकी भेंट को दुगना करता जाऊंगा ।

शीला: अच्छा, अब वचन मत तोड़ना । भगवान तुझे बढ़ से बढ़ कर धनी बनाता रहे ताकि तू अपना यह उदारचरित वचन निभा सके ।

अंकल शाह ने तो नहीं सोचा कि उनकी भेंट इतनी उदारचरित थी क्यों कि उनकी संपत्ती एक 1,000,000,000 से ऊपर थी । मुझे पता नहीं कि मेरे पिता जी उस समय प्रसन्न थे या नहीं की मेरी माता जी ने भाई का $10,000 का चैक ठुकरा दिया था । पिता जी ने कभी भी इसके बारे में कुछ नहीं कहा  ।

मुझे बताया गया है कि अंकल शाह ने मेरे हाथ में $1 दिया और चले गए । मेरी मांजी ने एक गुल्ल्क खरीद कर यह डालर उसमें डाल दिया ।

जब अंकल शाह अगली बारी आए तो मैं एक वर्ष की थी ।  मैने बोलना शुरू कर दिया था । मैने उन्हें अंकल कह कर पुकारा और उनके साथ खेलती रही । वह बहुत खुश थे । जाने से पहले वह मेरे हाथ में $2 दे गए । मां जी ने इनको भी गुल्लक में डाल दिया । इस तरह मेरी गुल्लक में $3 हो गए, एक पहले से और दो इस बार के ।

अगले वर्ष वह आए तो नहीं पर किसी के हाथ मुझे $4 भिजवा दिए । इस तरह मेरे पास तीन डालर मिला कर, कुल $7 हो ग​ए । मैं अभी दो वर्ष की ही थी ।

अंकल शाह हमारे घर फिर आए । तब मैं तीन वर्ष की हो गई थी और मैं इतना तो समझती थी कि अंकल मुझे प्यार करते थे । मैं उनके इर्द  गिर्द नाचती रही और उनके साथ बातें भी करती रही । थोड़े दिनो बाद वह वापिस चले ग​ए पर जाने से पहले मेरी मुट्ठी में $8 रख गए जो कि पिछले वर्ष के $4 के दुगने थे ।

फिर वह अगले तीन साल नहीं आए । पर वह अपना भेंट का वचन निभाते रहे । इन तीन वर्षों मे मुझे 16, 32 और 64 डालर मिले ।  मैं तो 6 वर्ष की थी । मुझे तो कुछ भी समझ नहीं थी पर मांजी ने कहा: किसी दूसरे को मत बताना । वह तेरे से ईर्श्या से जलेंगे और तेरे से नफ़रत भी कर सकते हैं ।

मैं तो मां जी की बात सुनने के बाद अपने पड़ोस की लड़लियों के साथ स्टापू खेलने चली गई  ।

पता है इस उमर में थोड़ा सा योग करना और घटाना सीख गई थी । मैं सोच रही थी कि इस बार तो अंकल ने मुझे $64 दिए थे, अगली बार तो इससे भी दुगने  यानी $128 देंगे  ।

अगले तीन सालों में अंकल ने मुझे $128,  256 और 512 दिए  ।  मैं 9 वर्ष की थी । मेरी गुल्लक तो जल्दी ही भर गई थी । हमारे छोटे से शहर में ऐसा कोई बैंक नहीं था जहां हम विदेशी मुद्रा का खाता खोल सकें । इस लिए मेरी मां जी ने सारे पैसे मेरे सिरहाने के उछाड़ में डाल दिए । मैं उसी सिरहाने के ऊपर सिर रख कर रोज़ सोया करती थी । कितनी अविश्वासनीय  बात  है (हंसी) ?

अंकल शाह अपना वचन निभाते रहे और अगले तीन साल में उन्होंने मुझे 1024, 2048 और 4096 डालर दिए  । मैं अब बारह वर्ष की हो गई थी – किशोर आयु की । मैने गिना कि कुल मिला कर सब सालों की भेंट $8191 हो गई थी ।

मेरी मां जी ने पिता जी से कहा कि घर पर इतना धन रखना उचित नहीं था, और उन्हें कोई आयोजन करने के लिए कहा । एक दिन मैं पिता जी के साथ एक समीप वाले बड़े शहर में गई और वहां एक बैंक में पिता जी ने अमेरिकन डालर का खाता खोल लिया । वहां सारे डालर जमा करा दिए हालांकि बैंक वालों ने कहा कि वह विदेशी मुद्रा पर कोई व्याज नहीं देंगे । पिता जी ने पैसे बैंक में ही रखना उचित समझा क्यों कि इतने धन से डाकू भी आकर्शित हो सकते हैं और इससे अपनी जान भी खतरे में पड़ सकती है ।

अब अगले जन्म दिन पर मैं 13 वर्ष की हो गई । मुझे बताया गया कि अब मेरा जिस्म एक जवान लड़की की तरह दिखता था । मैने खुशी से अपनी फ़ोटो शाह अंकल को भेज दी । उन्होंने मुझे पिछले साल से दुगने यानि $8192 भेज दिए । मेरे पिता जी ने इन्हें बैंक में जमा करवा दिया । मेरे पिता जी ही बैंक का सारा काम करते थे  ।  मैं तो कम आयु होने के कारण उनके साथ अपना नाम भी नहीं लिखवा सकती थी ।

अंकल शाह की पत्नी पुष्पा को शक हो रहा था

मैने अचानक अपनी मां जी को पिता जी के साथ अंकल शाह के बारे में बातें करते सुना । ऐसा लगा कि अंकल शाह की पत्नी पुष्पा को शक हो रहा था कि अंकल एक जवान लड़की को हर साल बड़ी बड़ी रकम देते थे – जाने क्यों ? मुझे लगा कि उनका विवाहित जीवन भी खंडहर में मिल जाएगा । मेरे दिल को  अपराधबोध खाने लगा ।

अंकल शाह और आंटी पुष्पा दोनो मेरे चौदहवें जन्म दिन पर आए । हमारे घर में यह जन्म दिन एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जा रहा था । कई मित्र और परिजन निमंत्रित थे । जब सब लोग चले गए तो अंकल शाह पिछले वर्ष से दुगनी रकम यानी $16384 ले कर हंसते हुए मेरी ओर आए । मैने यह पैसे लेने से मना कर दिया क्यों कि मुझे पहले से ही बुरा लग रहा था कि शायद यह बात अंकल शाह और आंटी पुष्पा के बीच एक दरार डाल रही थी । अंकल बहुत अप्रसन्न हुए और मेरी मां जी के पास गए ।

`शाह: शीला बहन, यह क्या हो रहा है ? हमारा एक अभिसंधान था कि जब तक मैं और शांती जीवित हैं, मैं हर साल उसे ऐसे ही भेंट देता रहूंगा ।

`            शीला: भाई तूने अपना वचन निभाया है पर तू अब तक बहुत दे चुका है इस तरह  । अब मैं इस अभिसंधान को आगे नहीं चलने दूंगी ।

शाह: पर क्यों ?

शीला: पुष्पा भाभी को अजीब सा लगता है जब तू एक जवान सुंदर लड़की को इतने पैसे देता है । मैं यह नहीं सह सकती । बस, बहुत हो गया ।

शाह: मुझे अब समझ में आई कि  मेरी प्यारी भांजी ने क्यों इस बार भेंट लेने से मना किया है । बहन, यह आखिरी बार देने दो । अगले साल से आप की बात चलेगी ।

पुष्पा: शीला बहन, भाई का दिल न तोड़ो । यह हमारे समर्थ से बाहर नहीं है । जब यह मेरे सामने देते हैं तो मुझे भी अजीब नहीं लगता । शांती को कहो कि इस बार  मना न करे ।

शीला: अच्छा पुष्पा, यह अंतिम बार होगा और वह भी एक शर्त पर  ।  तू यह रकम शांती को देगी न की शाह ।  तेरे से भेंट लेना इतना अजीब नहीं लगता ।

पुष्पा आंटी मेरी ओर आई, गले लगी और मुझे वह रकम दे गई ।

16 वर्ष की आयु में मेरा विवाह हो गया । यह सारे पैसे एक न​ए  बैंक के खाते में चले ग​ए जहां व्याज भी मिलता रहा । तेरे दादाजी भी अच्छा कमाते थे, और अब तेरे माता पिता मुझे खर्च के सारे पैसे देते हैं  ।  तो अंकल शाह वाले पैसे बस एक बैंक में व्याज कमा रहे हैं ।

सैरा ने नैना से कहा: आप 14 वर्ष की आयु में बहुत सुंदर लगती होंगी । तभी तो आपकी आंटी पुष्पा को आप से ईर्श्या हुई  ।

अपने किशोर अवस्था के दिनों को याद करके नैना की आंखें भर आई  ।  सैरा तो सो गई,  नैना की कहानी के सपने देखते देखते ।

भाग 2 – कहानी का मंथन

सैरा अपने बायफ़्रैंड जानी के साथ

अगले दिन सैरा अपने बायफ़्रैंड जानी के साथ चल कर स्कूल गई ।

रास्ते में उसे नैना वाली कहानी सुनाई ।  जानी तो इस कहानी से प्रभावित सा हो गया  ।  स्कूल के बाद दोनो थोड़ी देर के लिए जानी के घर गए । दोनो को एक दूसरे की संगत बहुत भाती थी ।

जानी: क्या शाह अंकल अभी जीवित हैं ?

सैरा: नहीं, 20 वर्ष पहले उनका देहांत हो गया था ।

जानी: इसका मतलब अंकल के देहांत के समय तेरी नैना 40 वर्ष की थी । मैं सोच रहा हूं कि यदि पुष्पा आंटी शक न करती और अंकल पहले की तरह हर साल दुगने कर के पैसे देते रहते, तो उनकी आखिरी भेंट कितने डालर की होती  ।  तूने बताया था न कि जब नैना 14 वर्ष की थी अंकल शाह ने $16384 दिए थे ? इसका मतलब है कि अंकल ने $1 की रकम को 14 बारी दुगना किया था ।

f(t) = bat

सैरा: मेरी मां जी ने बताया था कि इसको सरलता से समझने के लिए इसे एक चरघातांकी फलन जैसे समझो  । इस फलन का निरूपण होता है f(t) = bat   जिसमें b एक आरंभ की नियत संख्या होती है, a इसका आधार, और t घात होती है । यहां b=1 क्यों कि जन्म के समय एक डालर दिया था । क्यों कि हर साल भेंट को दुगना कर दिया था a = 2    ।  जब आधार एक से ऊपर हो तो यह बढ़ने वाला घातांक हो जाता है  ।  तो हम इस घातांक को   214   यानी 2 की घात 14  भी लिख सकते हैं । यदि अंकल शाह इस घातांक को 40 वर्ष तक कायम रखते तो अंतिम वर्ष में 2 की घात 40 यानी $240  जो बनता है,  $1,099,511,627,776,    डालर ।

जानी: यह तो बहुत सारा धन है – एक हज़ार बिल्लियन डालर से भी ऊपर । अमीर से अमीर आदमी के पास भी इतनी संपत्ती नहीं है । आजकल के सब से अमीरों की धन संपत्ती एक सौ बिल्लियन से कम है । इसका मतलब है पुष्पा आंटी के नाराज़ हुए बिना भी अंकल शाह को अपना वचन तोड़ना पड़ता । तो उनका अपना वचन रखना एक कोरी कल्पना मात्र ही थी । जब हम कोरी कल्पना ही कर रहे हैं तो मान लो की अंकल शाह मरे ही नहीं । आज नैना की आयु 60 वर्ष है । यदि अंकल जीवित होते और अपना वचन निभाते रहते तो इस वर्ष की भेंट कितने डालर की होती ।

an x am = a(n+m)

सैरा: हमारी बीजगणित की पुस्तक में घातांक का यह नियम लिखा है: an x am = a(n+m) ।  क्यों कि 60 = 20 + 40 हम लिख सकते हैं m = 40 और  n = 20 और  m + n = 60    । तब 260 = 240 +220

हमें पता है कि  240 = $1,099,511,627,776,  और 220 = 1,048,576 है मेरे कैल्कुलेटर के अनुसार ।  तो इस $260 = $1,099,511,627,776 x 1,048,576 जो एक बिल्लियन बिल्लियन डालर से भी अधिक होगा ।

जानी: मेरा कैल्कुलेटर तो इतनी बड़ी गुणा करके एक दम ठीक उत्तर भी नहीं दे सकता । मैं तो इतनी बड़ी संख्या से अत्यंत प्रभावित हूं ।

सैरा: जानी, प्रभावित होने वाली बात तो आगे देख ।  हम यह सब गणना बिना किसी कैल्कुलेटर के भी कर सकते थे । तुझे यह तो पता है कि 2 x 2 x 2 x 2 x  2  = 32 और तू 32 को 32 से हाथ से गुणा करके 1024 निकाल सकता है   । इस लिए 2 x 2 x 2 x 2 x  2 x2 x 2 x 2 x 2 x  2 = 210 = 1024   हो गया  जो लगभग 1000 है  ।

जानी: हां, मैं देख रहा हूं तू इसे कहां ले जा रही है । तू आगे घातांक नियम  an x am = a(n+m) लगा देगी । इसी नियम को 6 बार प्रयोग कर के 60 =10 + 10 +10 +10 +10 +10,

260 = 210 x 210 x 210 x 210 x 210 x 210 =t 1000 x 1000 x 1000 x 1000 x 1000 x 1000 = 1,000,000,000,000,000,000 जो लगभग $1,099,511,627,776 x 1,048,576 ही हो जाएगा ।  यह बढ़िया विधि है । मैने कभी ऐसे करने का सोचा ही नहीं ।

जानी थोड़ी देर के लिए रुका और फिर बोला: यह सारी गणना तो एक काल्पनिक  सिनेरियो की ही तो है । पिछले हिसाब में तो उन्होंने दुगने करते करते अंतिम वर्ष मे $16384 दिए । क्यों न हम कल्पना करें की अंकल शाह और भी अधिक दयालू थे ? वह हर साल पिछले साल से 4 गुणा डालर देते थे । तो इस हिसाब से उन्हें   इसी रकम तक पहुंचने में कितने वर्ष लगा जाते ?

(an)m = anm

सैरा: हमारी बीजगणित की पुस्तक में एक और नियम है (an)m = anm  ।  हम जानते हैं कि 4 = 22   

जानी: अच्छा, तो हम कह सकते हैं कि (22)m = 22m या 4m = 22m या 47 = 22 x 7

इसका मतलब अगर हर साल दुगने करने से $16384 तक पहुंचने में 14 साल लग गए तो हर साल 4 गुणा कर के केवल 7 साल लगेंगे ।  यह तो हो गया । पर मान लो वह हर साल पिछले साल से 3 गुणा पैसे देते थे तो क्या इसका उत्तर भी घातांक नियम से निकल सकता है ?

सैरा: बिल्कुल, पर पहले हमें  पता करना पड़ेगा कि   जब   for 2n = 3, n  की क्या संख्या होगी । यह ले, मैने इन्टरनैट से देखा है कि   3 = 21.584963 । (an)m = anm  में 214 = (21.584963)m = 21.584963m या 1.584963m = 14 या m =14/1.584963 = 8.833   । इसका मतलन है कि  8.333  साल लगेंगे । पर अंकल तो नैना को केवल जन्म दिन पर ही पैसे देते थे, तो हमारा उत्तर एक पूर्णांक होना चाहिए । आठ साल के बाद तो कम होंगे इस  लिए हमें 9 साल कहना पड़ेगा ।    यह उत्तर उचित लगता है क्यों कि यह 7 और 14 के बीच में है ।

घातांक के अनुप्रयोग

जानी: यह सब तो एक कहानी से संबंधित था । क्या हमारे वास्तविक जीवन में घातांक कभी काम आते हैं ?

सैरा: अब मैं अपने घर जा रही हूं । क्यों न हम अपनी बीजगणित की पुस्तक में देखें ?  शायद कोई उदाहरण हों ।  मै अपनी मां जी और पिता जी से भी पूछूंगी ।

सैरा घर चली गई पर अगले दिन दोनो फिर मिले ।

सैरा: जानी, मैने अपनी पुस्तक में देखा था और अपने माता पिता से भी बात की थी  ।  घातांक के अनुप्रयोग तो हमारे दैनिक जीवन में बहुत हैं । एक अनुप्रयोग है मानव जन संख्या कैसे बढ़ती है समय के साथ । इनको जीवाणु के बढ़ाव गति में भी इस्तेमाल करते हैं । किंतु सबसे बड़ा अनुप्रयोग है आर्थिक गणित में । पता है न लोग साधारण  और चक्रवृद्धी व्याज की बात करते हैं । जैसे अगर तुम बैंक में पैसे जमा करवाओ तो वह 10% प्रति वर्ष व्याज देते हैं । यदि हमारा मूल 1 हो तो प्रति वर्ष व्याज 0.1 हो जाएगा । साधारण व्याज के अनुसार तुम्हें दो वर्ष के बाद मूल और व्याज को मिला कर कुल  1  + 0.1 x 2   मिलेंगे । पर चक्रवृद्धी  व्याज में तुम्हें 1.1 x 1.1 यानि 1.12 या 1.21 मिलेंगे । वर्ष संख्या के साथ साधारण और चक्रवृद्धी  व्याज में अंतर बढ़ता जाता है । जैसे मेरे जन्म पर नैना ने एक बैंक में $1000 जमा किए थे जिसमें 10% प्रति वर्ष   चक्रवृद्धी व्याज मिलता है और जब मैं 18 वर्ष की हो जाऊं इन पैसों को निकलवा सकती हूं । यदि यह साधारण व्याज होता तो 18 वर्ष के बाद मुझे 1000 + 100 x 18 यानि $2800 मिलते । क्यों कि यह चक्रवृद्धी व्याज है मुझे 1000 x 1.118 यानी  लगभग  $5600  मिलेंगे ।

जानी: हां, यह तो बहुत बड़ाअंतर है  ।  शायद इसी लिए घरों की मारगेज इतनी मंहगी होती है ।

सैरा: अर्थशास्त्री भी घातांक का प्रयोग करते हैं । देखो नैना ने मुझे कितनी अच्छी कहानी सुनाई ।

चुनौती

दीपिका और अर्जुन छिप छिप कर एक दूसरे को डेट कर रहे थे और किसी को बताना नहीं चाहते थे । गल्ती से दीपिका ने सुबह 9 बजे स्कूल में बातूनी गुलाबो को बता दिया । उसे याद नहीं रहा कि गुलाब तो अफ़वाहों की मशीन है ।  एक ही घंटे में गुलाबो ने अपने तीन बातूनी मित्रों को बता दिया । अगले घंटे में उन में से हर एक ने तीन न​ए मित्रों को बताया । यदि अफ़वाहों की मशीन इसी विधि से चलती रहे तो स्कूल के बंद होने तक (दोपहर के तीन बजे) कितने लोगों को दीपिका का राज़ पता लग जाएगा ?

उत्तर: सुबह 9 बजे केवल तीन लोगों को इस राज़ का पता था: दीपिका, अर्जुन और गुलाबो । हम इस को शून्य संख्या घंटा का समय कहेंगे ।  एक घंटे बाद 3 और लोग जान ग​ए, यानि 3 x 31 लोगों को पता था । दो घंटे बाद 3 और लोग जान ग​ए, यानि 3 x 32 लोगों को पता था । यदि यह कार्य 6 घंटे यानी ३ बजे तक चलता रहा, तो 3 x 36 यानी 37 =  2187   लोगों को पता चल गया होगा ।

तुम तो जानते हो कि तुमारे स्कूल में कितने  लोग हैं । तो क्या यह अफ़वाह मशीन स्कूल के बाहर भी काम कर रही है ?  यदि हां, तो 24 घंटे में 3 x 324 यानी 325 लोगों को पता चल जाएगा । यह बनते हैं 847 बिल्लियन से ऊपर लोग जब कि दुनिया में 8 बिल्लियन से कम लोग हैं । तो बातूनी गुलाबो की अफ़वाह मशीन को कभी न कभी तो धीरे होना ही पड़ेगा ।