सैरा और जानी में अनबन

saragetsmad

दोनो में झगड़ा हो गया

सैरा को जानी से प्रेम है । चार साल से, वह एक दूसरे के साथ अक्सर आते जाते हैं ।  स्कूल की समाप्ति से पहले ही दोनो ने मिल कर एक सुपर डुपर ग्रैजुएशन पार्टी भी की थी । वह एक दूसरे को सारी आप-बीती बताते  हैं – लगभग सारा कुछ । जीवन अच्छा चल रहा था लेकिन एक दिन, जानी के घर में स्कूल के बाद गपशप करते  करते दोनो में झगड़ा हो गया ।

जानी: सैरा, स्कूल में मेरे बहुत अच्छे नंबर आ रहे हैं और तेरी सहायता उसका एक बहुत बड़ा कारण है । मेरे पिता जी चाहते थे कि स्कूल के बाद मैं XYU जाऊं, जहां अब मुझे दाखिला भी मिल गया है ।

सैरा: हां, तूने बताया था । मेरा भी ZYU के विज्ञान के प्रोग्राम में दाखिला हो गया है, पिछले हफ़्ते तुझे उनकी चिट्ठी तुझे दिखाई तो थी । मैने तुझे बताया था कि नैना ने मेरे लिए कुछ पैसे एक एफ़ डी में डाले थे और मेरे माता पिता भी मेरे कालेज फ़ंड में पैसे डालते रहते हैं । कुल मिला कर 70 प्रतिशत खर्च के लिए पैसे हैं । आवश्यक हुआ तो नैना कुछ और सहायता करने को भी तैयार है । आशा करती हूं कि ZYU मुझे कुछ छात्रवृत्ति भी दे देगी ।

जानी: हां, यह सब कुछ तूने मुझे बताया था । मैने भी तुझे बताया था कि मेरे मां बाप ने भी मेरे लिए भी एक कालेज फ़ंड बनाया हुआ है जिसमें वह हर साल पैसे डालते हैं । मेरा एक और  रहस्यपूर्ण फ़ंड भी है ।

सैरा: हम कब से एक दूसरे से बातें छिपाने लगे हैं । मैने सदा तुझे सबकुछ बताया है जैसे मैं कौन सी यूनिवर्सिटी में जाना चाहती हूं, उसके लिए पैसे कहां से आएंगे, मेरे माता पिता कैसे मिले,  मेरी नैना के बारे में, सब कुछ । तूं क्यों मेरे से बातें छुपाता है ? मैं घर जा रही हूं ।

सैरा बड़े क्रोध में घर गई थी । जानी ने कई बार उसे फ़ोन करने की कोशिश की पर सैरा उसे काट देती थी । वह समझ नहीं सकी कि जानी क्यों इतना रहस्यमय था । आम तौर पर सैरा संतुलित स्वभाव की थी, पर जानी का उससे बातें छिपाना, उससे सहा नहीं गया । अब तो उसकी सोच थी, “ना जाने और क्या क्या छुपा रहा है ? शायद कोई और छिपी हुई गर्लफ़्रैंड भी हो । जहन्नुम में जाए ।”  कई दिन बीत गए, वह अब जानी से कोई बात नहीं की । वह स्कूल भी एक दूसरे रास्ते से जाती थी ताकि जानी से मुलाकात ना हो ।

कई दिन बाद जब सैरा अपने घर में थी, दरवाज़े की घंटी बजी । जानी आया था । नैना ने उसे अंदर आने को कहा था । जानी के हाथ में एक कागज़ था ।

निरंतर चक्रवृद्धि व्याज

जानी: सैरा, आइ अम सॉरी । मुझे बहुत देर पहले इसकी बत करनी चाहिए थी । इस पत्र में लिखा है जो भी मैने तुझे अभी तक नहीं बताया था ।

सैरा: पहले क्यों नहीं बताया था ?  स्पष्ट है कि तेरे पास कालेज के खर्चे के लिए और भी पैसे हैं । छुपाना क्यों आवश्यक था ?    क्या तू सोच रहा था कि मैं ईर्ष्या से जलूंगी ? जानी मैं तो खुश हूं यह सुन कर । मुझे तो तेरे बात को छुपाने पर गुस्सा आया था ।

जानी: छुपाया इस लिए था कि मैं बुद्धू हूं । मुझे समझ नहीं आया कि इस पत्र का पूरा मतलब क्या है ?

सैरा: इस पत्र में लिखा है कि तेरे जन्म पर किसी ने $10,000 की भेंट तुझे दी थी, और वह राशी एक बैंक में 5% प्रति वर्ष निरंतर चक्रवृद्धि व्याज (continuously compounded interest) देगी जब तक तू इसे वहीं रहने देगा ।

जानी:  निरंतर चक्रवृद्धि व्याज, यही तो मेरी समझ में नहीं आया । मैं अपने आप को बुद्धू समझता रहा और इस कारण से इस पत्र को छिपाया ।

सैरा ने जानी को गले से लगाया और फिर एक लंबा सा चुम्मा दे कर  कहा: एक बारी मेरे पिता जी ने इसकी बात की थी । मुझे भी समझ नहीं आया था । दोनो मिलकर इसे समझेंगे ।

जानी को शांती मिली । एक तो, सैरा अब उस पर गुस्सा नहीं थी । दूसरा, कि वह बिना वजह ही अपने आप को बुद्धू समझ कर धित्कार रहा था । यह तो सैरा, जो उसकी गणित प्रवीण आदर्श थी, को भी नहीं पता था । इसे ना समझने में वह अब अकेला नहीं था ।

दोनो ने फिर थोड़ी देर गपशप और चुंबन शुंबन किया जिसके बाद जानी अपने घर चला गया । अगले दिन सैरा ने जानी का परिवर्जन नहीं किया और दोनो साथ साथ स्कूल गए । सैरा ने जानी को बताया कि उसने अपने पिता जी से बात की थी जिन्होंने उसे सब कुछ समझा दिया था । पर उसे जानी को बताने में समय लगेगा और इस लिए स्कूल के बाद बताएगी । स्कूल के बाद दोनो जानी के घर गए, कुछ जलपान किया और फिर जानी के रहस्यमय  निरंतर चक्रवृद्धि व्याज की  बात शुरू हो गई ।

द्विपद प्रमेय

सैरा: यह निरंतर चक्रवृद्धि व्याज की  धारणा मुझे पिता जी ने थोड़ा सा उच्च श्रेणी का बीजगणित प्रयोग करके समझाई थी ।  जो कुछ हमने पार्टी वाले दिन सीखा था, वह भी कम आएगा ।

जानी: क्या, यदि 100 मित्रों में से 10 को बुलाना हो तो कितनी संचय (combination) संख्या संभव हैं ?

सैरा: हां, और हत (factorial = !) भी । चल अब शुरू करें ।  (a + b)2  क्या होता है ?

जानी: सरल है । पहले  a+b को  a से गुणा करो, और b से गुणा करो, और फिर दोनो का योगदान निकाल लो

(a + b) x a = a2 +ab, (a + b) x b = ab +b2, अब योगदान निकाल लो

(a+b) x (a +b) = a2 + 2ab + b2

सैरा: हम के  a2, ab and b2  टर्मों के गुणांक, b के अलग अलग संचय को देखकर निकाल सकते हैं । b का संचय, a या b से हो सकता है पर किसी तरह भी a2 नहीं आएगा । इस लिए a2 टर्म का गुणांक  2C0  = 2!/(2!0!) = 1  हो जाएगा । टर्म ab बनती है b के a से एक संचय में,  इस लिए इसका गुणांक  2C1 = 2!/((2-1)!(2-1)!) =  2/(1 x 1) = 2 हो जाएगा ।  टर्म b2  के लिए b को दो में से दोनो बार प्रयोग करना पड़ेगा । इस लिए इसका गुणांक 2C2 =  2!/(0!2!) =  1 हो जाएगा ।

जानी: इधर उधर मुश्किल काम करने  की क्या आवश्यकता है । सीधा मेरे वाले गुणा और योग कर लो ।

सैरा: जानी मैं एक ढांचा बना रही हूं । अब बता   (a+b)क्या होता है ?

जानी: वही करूंगा  (a+b)  को दो बारी  (a+b)  से गुणा कर दूंगा । या फिर ऐसे, कि मुझे पता है  (a+b)2 = (a2+ 2ab + b2), तो इसको (a+b)    से गुणा कर दूंगा ।

(a2+ 2ab + b2) x a = a3 + 2a2b +ab2

(a2+ 2ab + b2) x b = a2b + 2ab2 +b3

दोनो समीकरण का योग कर दो तो (a+b)3 = a3 + 3a2b + 3 ab2 + b3

सैरा: मेरे लिए तो वही ढांचा है a3 का गुणांक 3C0 = 1, a2b का गुणांक 3C1 = 3, ab2 का गुणांक 3C2 = 3 और b3  का गुणांक 3C0 = 1, इस लिए उत्तर a3 + 3a2b + 3 ab2 + b3 आ गया ।

जानी: मुझे पता है तूने क्या किया है पर फिर भी तूने कोई तीर थोड़ी मार लिया ।  गुणा तो मैने भी कर दी थी ।

सैरा: अब तो मेरा ढांचा बन गया । अब  (a+b)6  को हल करते हैं ।  मैं इस विधि से करूंगी और तू बार बार गुणा करके करना ।

सैरा ने खटाखट लिख दिया

(a+b)6 6C0 a6 + 6C1 a5b +6C2 a4b2 +6C3 a3b3 + 6C4 a2b4 + 6C5 ab5 +6C6b6

=  a6 + 6 a5b +15 a4b2 + 20 a3b3 + 15 a2b4 + 6 ab5 + b6.

जानी ने बहुत देर परिश्रम करके वही उत्तर निकाला, और फिर कहा: सैरा मैं जानता हूं कि तू मेरे से ज्यादा होशियार है । साबित क्या करना चाहती है ?

सैरा: यह ढांचा चलता रहेगा, जिससे मैं यह लिख सकती हूं

(a + b)n = nC0an + nC1 a(n-1) b+ nC2 a(n-2) b2 ………..+ nCn-2 a2b(n-2) +nCn-1 abn-1 + nCnbn.

इस से मैं द्विपद प्रमेय (binomial theorem) को सारांश रूप में ऐसे लिख सकती हूं

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द्विपद प्रमेय का   निरंतर चक्रवृद्धि व्याज से  संबंध

जानी: समझ गया, पर इसका मेरे  निरंतर चक्रवृद्धि व्याज से क्या संबंध है ?

सैरा: यदि हम कहें की मूल a है, सालाना व्याज b, तो हम n वर्षों के बाद राशी की मात्रा को  (a+b)n  लिख सकते हैं ।

जानी: मुझे पता है, यही तो  चक्रवृद्धि व्याज का सिद्धांत है ।

सैरा: तुझे 5% सालाना चक्रवृद्धि व्याज दिया जा रहा है । यदि तूने $1 जमा करवाया हो तो वह एक साल बाद $(1 + .05)  बन जाएगा, दो साल बाद $(1 + .05)2 और बीस साल बाद $(1 + .05)20  हो जाएगा ।

जानी: यह कोई नई बात नहीं है । मैं जानता हूं । कैल्कुलेटर से मैने 1.0520 = 2.6533 निकाल लिया है । मेरे $10000 जमा हुए थे तो कुल  $26533 मिलेंगे ।  इस सब में द्विपद प्रमेय कहां से आया ।

सैरा: यदि मैं तुझे कहूं कि तुझे इससे अधिक राशी मिलेगी, तो क्या मैं बाकी रख सकती हूं ?

जानी: इतनी चतुर मत बन । बैंक तो हिसाब लगाएगा, और जो मेरा है वह मुझे दे ही देगा । तुझे क्यों दूं ?

सैरा: मैं तो मज़ाक कर रही थी । अब ध्यान से सुन, तूने कभी सुना है कि कई बार बैंक कहते हैं कि वह 5% सालाना व्याज को प्रति माह चक्रवृद्धि करते हैं ?

जानी: हां, मैने सुना है । तो वह 5% प्रति वर्ष से,  0.05/12 यानी 0.004166667%  प्रति माह बना देंगे । तो  20 वर्ष की जगह 240 माह हो जाएंगे और अंतिम राशी $1 से  (1 + . 0.004166667)240 = $2.7126 बन जाएगी । तो मेरे $10000 के $27126  बन जाएंगे । अरे यह तो पहले से $593  ज्यादा हैं । तो प्रति माह चक्रवृद्धि का मुझे फ़ायदा होता ।

सैरा: आजकल कई बैंकों ने प्रतिदिन चक्रवृद्धी करना भी देना शुरू कर दिया है । सालाना 5% ही रहेगा पर इस विधि से 20 साल में $1 से   बन जाएंगे । प्रतिदिन का व्याज केवल  0.05/365 होगा पर 7300 बारी चक्रवृद्धि करने से यह  राशी (1+.05/365)7300  बन जाएगी ।

जानी तो उत्तेजित था और अब कैल्कुलेटर की जगह लैपटाप प्रयोग करने लगा ।  (1+.05/365)7300 = 2.7181 बना । तो मेरे $10000 के $27181  बन जाएंगे । और बड़ा लाभ देखते हुए उसने सैरा से पूछा: क्या कोई प्रति घंटा चक्रवृद्धी भी करता है ?

सैरा: अरे हर घंटे को छोड़, बैंक तो हर पल चक्रवृद्धि भी करते हैं और उसे निरंतर चक्रवृद्धि कहते हैं ।

जानी: वह कैसे करेंगे ?

सैरा: हम यदि b के स्थान पर 1/n लिख दें तो

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क्योंकि 1n-k  = 1, k =0 से n तक  (nCk (1/n)k)  के योग को हम लिख सखते हैं

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जब  n →∞,  (1+1/n)n= 1+ 1 + 1/2 +1/6 +1/24 +1/120………………………….

यूलर का नियतांक

इस क्रम संख्या के योगदान को यूलर का नियतांक (Euler’s constant) या   e कहा जाता है । इसका मूल्य कोई भी पूरी तरह नहीं जानता पर यह लगभग 2.7183  है । तो निरंतर चक्रवृद्धि व्याज से $10000 से लगभग $27183  बन जाएंगे ।

जानी: मेरे दो प्रश्न हैं । पहला कि क्या यह वही यूलर का नियतांक  e है जो log कि पढ़ाई में आया था ?

सैरा: हां, जब logarithm का आधार e हो तो उन्हें natural log (ln)  कहा जाता है । तेरा दूसरा प्रश्न क्या है ?

जानी: हम यह हिसाब 20 साल पैसे जमा रखने के लिए लगाया था । यदि मैं 18 वर्ष के बाद निकलवाऊं तो कितनी राशी मिलेगी ?

सैरा: निरांतर चक्रवृद्धि व्याज का सूत्र है A = Pert,  इसमें P है मूल, r  है प्रति वर्ष के हिसाब से व्याज  जैसे 5% प्रति वर्ष हो गया 0.05,  और t  है वर्ष संख्या ।

जानी: मेरे $10000 जमा हुए थे । तो r = 0.05 and t =18 वर्ष के हिसाब से  $24596  मिलते । पर यदि 50 वर्ष तक जमा रखूं तो   $121,825  मिलेंगे ।

सैरा: तू भाग्यशाली है, क्योंकि मैने यह स्थिति भी पिता जी के साथ जांची थी ।

जानी: इसमें जांचने वाला क्या है ?

सैरा: आयकर ।  अब तू 18 वर्ष का है और स्कूल जा रहा है । तेरी और कोई खास आय नहीं है । ऐसी भेंट पर तो कोई आरकर नहीं होता पर व्याज को आय माना जाता है ।

जानी: तो यदि मैं अभी सारी राशी निकलवा लूं तो $24596 – $10,000  = $14596 व्याज मेरी आय होगी । कितना आयकर देना होगा मुझे ?

सैरा: बहुत कम । पर अगले कुछ वर्षों में शायद कोई छात्रवृत्ति मिल जाए और उसके बाद तू कोई काम करने लगे, तेरी आय बढ़ती रहेगी । अगर तब निकालेगा तो इसका व्याज भी अधिक हो जाएगा । तब आयकर अधिक होगा ।

जानी: क्या तू कह रही है कि मुझे अभी यह राशी निकाल लेनी चाहिए ?

सैरा: बिल्कुल नहीं । एक विधि है कि तू अभी तो पैसे निकलवा ले पर फिर उन्हें बैंक में एक कर मुक्त बचत खाते में डाल दे । इस तरह अभी तक की आय पर थोड़ा सा कर दे देना । उसके बाद वाले व्याज पर कोई कर नहीं होगा ।

जानी: पर यदि मैं ऐसे करूं तो मुझे कर देने के लिए पैसों की आवश्यकता होगी ।

सैरा: अपने डैड से बात कर । मुझे पूरा विश्वास है कि वह तेरी सहायता करेंगे – अच्छी राय देकर और आवश्यकता होई तो तेरा कर दे कर ।

जानी: आइ एम सॉरी कि मैने इतनी देर यह बात तेरे से छुपाई । मैं डैड से बात करूंगा ।

सैरा: मैं सोच रही थी कि तू एक कर मुक्त बचत खाते में पैसे डाल देगा और कुछ वर्ष बाद हम दोनो मिल कर हमारा पहला घर खरीद लेंगे, मज़ाक कर रही हूं ।

जानी ने सैरा को कहा कि वह लोमड़ी जैसे चालाक है, उससे गले मिला, एक चुम्मा दिया और घर चला गया ।

चुनौती

फ़ैरा, एक ग्यारहवीं श्रेणी की छात्रा, अपने मित्रों के साथ गप शप कर रही थी । वह अपनी विरासत की डींग मार रही थी । जब फ़ैरा 10 वर्ष की थी, मरते समय फ़ैरा के दादा जी, उसके लिए  $120,000  छोड़ गए थे । वह धन एक बैंक में 5 % प्रति वर्ष चक्रवृद्धि व्याज देता था और फ़ैरा 18 वर्ष  के होते ही अपनी राशी ले सकती थी । द्विपद विकासन (binomial expansion) से बताओ कि फ़ैरा को कितने डालर मिलेंगे ।

उत्तर:  क्योंकि मूल राशी  $120,000  है, व्याज दर  5% प्रति वर्ष है, 8 वर्ष चक्रवृद्धि व्याज मिलेगा, इसको द्विपद रूप में  120,000 x (1+.05)8   लिखा जा सकता है यदि हम । (1+.05)8  को लिखें a = 1और b = 0.05 , तो द्विपद विकासन से

(a+b)= 8C0 + 8C1 b + 8C2 b2 + 8C3 b3+ 8C4 b4+ 8C5b5+ 8C6 b6 + 8C7 b7+ 8C8 b8

= 1 + 8 b + 28 b+56 b3+ 70 b4+ 56b5+ 28b6 + 8b7+ b8

a= 1, b = 0.05, से यह 1.477455 हो गया  ।  तो  फ़ैरा को $120000 x 1. 1.477455 ≈ $177295 मिलेंगे  ।