दो दृष्टिकोण

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जानी की मां भी साथ आकर बैठ गई

जानी और सैरा की परीक्षाएं हो चुकी थी और वह छैमाही के समाप्त होने पर प्रसन्न थे । अंतिम परीक्षा के बाद दोनो ने सोचा कि घर जा कर अब नींद पूरी करेंगे । अगले दिन, शायद दोपहर का समय होगा, जब जानी ने सैरा को फ़ोन करके अपने घर बुलाया । सैरा ने कहा कि नैना ने उसके लिए खाना बनाया हुआ है, वह खाना खा कर और नैना के साथ थोड़ी बात चीत के बाद आएगी ।

सैरा जानी के घर गई । दोनो आपस में गपशप कर रहे थे । जानी की मां भी साथ आकर बैठ गई ।

जानी की मां: तुम दोनो की छुट्टी थी । मैने सोचा कि आज मैं भी काम पर ना जाऊं ताकि हम तीनो मिल कर बातें करें ।

सैरा: धन्यवाद, मैं  बहुत खुश हूं कि हम तीनो मिलकर बातचीत करेंगे ।

जानी की मां: तुम दोनो को इकट्ठे समय व्यतीत करते देख कर मुझे प्रसन्नता होती है । एक समय था, जब जानी के डैड और मैं भी ऐसे ही साथ बैठ कर घंटों गपशप करते रहते थे । पत फिर जानी पैदा हुआ, और हम दोनो अपनी अपनी नौकरियों और घर की दैनिक दिनचर्या में व्यस्त हो गए । अब तो हम रात को डिन्नर पर ही मिलते हैं और कभी कभार हमें  मौका मिलता है कि दोनो इकट्ठे बाहर जा कर कुछ करें  । कभी कभी तो मुझे यह बुरा भी लगता है ।

दृष्टिकोण

सैरा: यह सब आपके  दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि आप उसी बात को कैसे लें ।

जानी: क्या मतलब है इसका ?

सैरा: मैं आप को डिन्नर के बाद आकर बताऊंगी ।

जानी: आज डैड भी यहां नहीं हैं, क्यों ना हम तीनो बाहर डिन्नर के लिए जाएं ?

जानी की मां: चलो । तुम दोनो रैस्टोरांट चुन लो और जानी गाड़ी चला सकता है । देखें, कहां ले जाते हो ।

नैना से मिलने सैरा घर गई । थोड़ी देर बाद जानी और उसकी मां आए, और सैरा को साथ लेकर चले गए । जानी ने एक स्थान पर गाड़ी पार्क की । वह जानी और सैरा के होटल के सामने थे – वही रैस्टोरांट जहां जानी और सैरा अपनी पहली डेट पर गए थे । जानी की मां को अच्छा नहीं लगा कि वह एक छोटी सी झोंपड़ी जैसी सस्ती सी जगह पर उसे ले आए हैं, पर अभी तो वह चुप रही ।

तीनो बैठ गए तो एक महिला मैनू लेकर आई, और ज़ोर से बावर्ची से बोली: देख जानी कौन आया है । जानी और सैरा एक महिला को साथ ले कर वापिस आए हैं । आपका, जानी और सैरा के होटल में, स्वागत है । मैं प्रसन्नता से आप का निर्देश ले कर सेवा करूंगी ।

तीनो ने सूप और बर्गर मंगवाए । भोजन स्वादिष्ट  था । मजे से खाते खाते इधर उधर की भी हांकी । क्यों कि वही तीनो ग्राहक बैठे थे, वह महिला वेटर अपने पति को भी उनसे मिलवाने के लिए ले आई ।

जानी की मां: मैं जानी की मां हूं । क्या तुम दोनो यहां सारा दिन हर दिन आकर ऊब नहीं जाते ? कुछ प्रयत्न करके तुम कोई अच्छा कैरियर बना सकते थे ।

महिला वेटर: हमें यह धीमी गति का जीवन पसंद है, और फिर इस तरह हम दोनो हमेशा साथ साथ होते हैं ।

जानी की मां ने बिल चुकाया और तीनो उसके घर चले ग​ए । जानी की मां ने देखा कि सैरा के पास लैपटाप है ।

क्या तू लैपटाप को हमेशा अपने पास रखती है

जानी की मां: सैरा, क्या तू लैपटाप को हमेशा अपने पास रखती है ?

सैरा: नहीं, मैं हमारी दोपहर के वार्तालाप के बारे में आप को कुछ दिखाना चाहती थी । इसमें मैने अपने अनुमान से ही आंकड़े लगाए हैं पर फिर भी यह चित्र एक मनोभावना को स्पष्ट करेंगे । पहला चित्र एक बार ग्राफ़ है ।  एक लड़का और लड़की मिलते हैं, एक दूसरे में दिलचस्पी लेते हैं और घंटों साथ साथ रहते हैं । फिर उनका विवाह हो जाता है, कारोबार और घर के कामों में व्यस्त हो जाते हैं तो कम समय साथ साथ बिताते हैं । बच्चे होने पर यह समय और भी कम हो जाता है । इस बार ग्राफ़ काक्षैतिज अक्ष है पहली मुलाकात के बाद बीते वर्ष और लंब अक्ष है हर वर्ष कितने घंटे उन्होंने साथ साथ बिताए थे ।  यह बार चित्र नीचे नीचे जा रहा है ।

जानी की मां: यही तो मैं कह रही थी । मुझे तो यह बुरा लगता है, और यह मुझे खुश कैसे कर सकता है ?

Fig.c7.1

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सैरा: यह तो अपने अपने   दृष्टिकोण की बात है । उन्हीं डेटा को मैं आपको एक अलग चित्र में दिखाऊंगी । इसका क्षैतिज अक्ष है पहली मुलाकात के बाद बीते वर्ष, और लंब अक्ष है कुल समय, जो किसी वर्ष तक उन्होंने अपने संबंध को दृड़ रखने के  लिए साथ साथ बिताया है । महत्वपूर्ण बात है कि इस दम्पति ने जीवनकाल में कितना समया साथ साथ बिताया ना कि प्रति वर्ष में । जैसे आप इस चित्र में देख रही हैं यह रेखा तो 30 वर्ष के बाद भी ऊपर ही जा रही है । इससे तो प्रसन्नता मिलनी ही चाहिए ।

जानी की मां: सैरा, तू तो एक हीरा है । मेरा दृष्टिकोण ही बदल दिया । तूने ठीक कहा है । इससे तो मुझे खुशी होती है कि हमारा संबंध में आनंद लेने का कुल समय आज तक बढ़ता ही जा रहा है ।

सैरा: यह तो जानी भी सीखेगा area under the curve के बारे में calculus II   में ।

इस प्रवचन के बाद सैरा ने अलविदा कहा और अपने घर चली गई ।

चुनौती

एक छोटी लड़की डिंपल cubic blocks से खेल रही है । वह पहले 15 block  को नीचे रखती है, फिर 14 को उनके ऊपर, फिर  13 को उनके ऊपर । वह ऐसा करती  जाती है जब तक सबसे ऊपर वाली पंक्ती में 10 block  होते हैं क्यों की अब उसके  block खत्म हो ग​ए ।

उसका भाई एक रेखा चित्र बनाता है जिसमें क्षैतिज अक्ष पर पंक्ती संख्या है और लंब अक्ष पर उस पंक्ती की block संख्या । डिंपल रो पड़ी क्योंकि वह रेखा नीचे जा रही थी । डिंपल के पापा आए बेटी को खुश  करने और उसके भाई को कहा कि एक नया चित्र बनाए जिस में लंब अक्ष पर उस पंक्ती तक लगाए गए कुल block की संख्या हो । अब डिंपल खुश है ।

इसका उत्तर नहीं दिया जाएगा । तुम स्वयं ही दोनो तरह के ग्राफ़ बना कर देख लो ।