गुड़ियों के पहनावे

 

 

fig.g12.1 तानिया का प्रस्ताव

तानिया की मां भागी के घर में लक्षमी मेड का काम करती थी । बहुत मेहनती थी वह । रोज़ प्रात: को 3 घंटे और सायंकाल को 3 घंटे वह इस घर में काम करती थी, और अपना घर भी संभालती थी । उसका पति मज़दूरी करता था – वह भी उसे हर दिन नहीं मिलती थी । उसके दो बच्चे भी थे –  12 साल का बेटा रामू और  9 साल की बेटी गौरी ।  दोनो बच्चे स्कूल जाते थे पर गर्मियों की छुट्टियों में केवल आवारागर्दी ही कर रहे थे ।

आज लक्षमी रामू और गौरी को अपने साथ काम पर ले आई । वह उन्हें मालकिन से मिलवाना चाहती थी, और पूछना चाहती थी कि क्या बच्चों को इस घर में कुछ काम दिया जा सकता है । वैसे ही उसकी आर्थिक अवस्था खराब थी और घर होने पर बच्चे भी मांगें करते रहते थे । भागी ने साफ़ साफ़ कह दिया कि वह नाबालिक बच्चों को काम पर नहीं रखेगी ।

तानिया भी छुट्टियों में घर रह कर ऊब सी गई थी । इस साल कहीं जाने का कार्यक्रम भी नहीं बन रहा था । उसने अपनी मां जी के कान में कुछ कहा और फिर सबके सामने बोली ।

तानिया: आंटी मेरा एक प्रस्ताव है, पता नहीं आप को कैसा लगेगा । मैने मां जी से तो अनुमति ले ली है ।

लक्षमी: तानिया बेटी, क्या है तेरा प्रस्ताव ?

तानिया: रामू और गौरी खाली बैठे हैं और मैं भी बैठे बैठे ऊब गई हूं । हम तीनों मिल कर कुछ कर सकते हैं जिसमें हमारा दिल लगा रहेगा, हमें कुछ शिक्षा भी मिलेगी और यदि हमारा भाग अच्छा निकला तो हम कुछ कमाई भी ।

लक्षमी: बेटी तूने तो मेरा दिल जीत लिया । मालकिन की अनुमति भी है ।  जा, गौरी और रामू को अपने साथ लेजा कर समझा तेरा प्रस्ताव  ।

हम तीनो व्यवसाय करना सीखेंगे

तानिया गौरी और रामू को अपने साथ ले गई और कहने लगी: हम तीनो व्यवसाय करना सीखेंगे । मेरी सहेलियों के पास सुंदर सुंदर बार्बी  डाल्ज़ हैं । वह बाज़ार में जा कर उनके लिए नई नई मंहगी मंहगी पोशाकें खरीदती हैं । हम भी पोशाकें बना कर बेच सकते हैं । क्यों कैसा लगा यह प्रस्ताव ?

रामू: मुझे तो सिलाई भी नहीं आती ।

तानिया: हम सिलाई नहीं करेंगे । टेप से कपड़े को चिपका देंगे । आर्ट की क्लास में तेरा हाथ कितना साफ़ है ?

रामू: थोड़ा थोड़ा, पर गौरी बड़े मजे का आर्ट वर्क कर लेती है । और,  शुरू में हमें कपड़ा इत्यादी खरीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे ?

तानिया: मैने जेब खर्ची के कुछ पैसे बचा रखे हैं । उनसे सब कुछ खरीद लेंगे । पहनावे बिकने पर मैं पहले वह पैसे वापिस ले लूंगी ।  बाद में हम तीनों लाभ को बराबर बराबर बांट लेंगे ।

रामू: और यदि यह व्यवसाय असफल रहा तो ?

गौरी: ऐसी बातें न किया कर भैया । मैं तो खुशी से इसमें भाग लूंगी  । यह तो खेल लग रहा है । रामू तू भी मान जा ।

तानिया: रामू, तू पौशाकें बेचने का काम कर लेना ।

रामू: तो ठीक है । कब शुरू करें ।

तानिया: मैं आज मां जी के साथ जा कर सामान ले आऊंगी । कल सुबह शुरू कर देंगे ।

सामान की खरीददारी

तानिया मां जी के साथ कपड़े की दुकान में गई । वहां उसने पता किया कि थानो में से बचे हुए कपड़े यानि कटपीस कहां पर हैं । कटपीस अक्सर बहुत सस्ते होते हैं । दुकान में सारे कटपीस 1.5 मीटर के बर के थानो में से थे । तानिया ने अलग अलग डिज़ाइन और मैटीरियल  के तीन कपड़े लिए । पहला कटपीस तो केवल 0.5 मीटर ही था और दुकानदार ने उसका दाम 10 रुप​ए लिखा हुआ था । दूसरा 0.8 मीटर का और 30 रुप​ए का था । तीसरा पीस सुंदर भी था और बड़ा भी । यह 1.5 मीटर था  और 100 रुपए में मिला । तो तानिया को यह तीनो कपड़े 140 रुपए में मिल ग​ए । याद रहे कि यह सारे कपड़े 1.5 मीटर बर वाले थानो में से निकले थे । दुकानदार ने बतलाया कि यह अच्छे कपड़े थे और यदि कटपीस न होते, तो इनके लिए 1000 रुपए से ऊपर लग जाते ।

उसने दो तरह के स्काच टेप खरीदे – एक जो दोनो तरफ़ से चिपकने वाला था और दूसरा जो एक ही तरफ़ से चिपकता था । दोनों का बड़ा साइज़ ले लिया । उसने चिपकने वाली एक लाल पट्टी भी खरीदी जो 0.5 x 0.5 मीटर थी । उसने एक और मस्त चीज़ खरीदी । वह था एक रंग बिरंगे बिल्लौर पत्थर के चमकीले टुकड़ों से भरा डिब्बा  ।  इन सब चीज़ों पर लग गए 260 रुप​ए । तो तानिया ने कपड़ों को मिला कर कुल 400 रुपए व्यय किए ।

तानिया का डिज़ाइन

अगले दिन रामू और गौरी दोनो तानिया के पास आ ग​ए । तानिया ने तीनो कपड़े दिखाए । गौरी तो बहुत प्रभावित हुई कि किसी किस्मत वाली लड़कियों की गुड़िया से इस बढ़िया कपड़े की नई पोशाक मिलेगी ।

गौरी: हमारी पौशाकों का डिज़ाइन क्या होगा ?

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तानिया: मैं सोच रही हूं स्कर्ट और चुस्त ब्लाउज़ । स्कर्ट के लिए हम एक 30 से.मी. x 30 से.मी. वर्ग कपड़ा ले लेंगे । इसके कोनो से एक X बना लेंगे । कैंची से X पर कपड़े को काट  कर चार एक  समान समकोण समद्विबाहू त्रिकोणे बन जाएंगी ।  इस त्रिकोण को लम्बी भुजा पर लेटा देंगे । लम्बी भुजा 30 से.मी. और त्रिकोण की ऊंचाई 15 से.मी. । इस आकार की लम्बी भुजा से गोलधारा बनाने पर एक कोन बन जाएगा । हम इस कोन के ऊपर से 2 से. मी. को काट कर स्कर्ट बना देंगे । कोन वाले ऊपर वाले भाग को सुंदर बनाने के लिए इस लाल पट्टी की बैल्ट लगा देंगे । तो यह 13 से.मी. की ऊंचाई की स्कर्ट बन जाएगी ।

गौरी: हां अच्छा लगेगा । और ब्लाऊज़ ?

तानियां: उसी कपड़े का 3-4 से.मी. ऊचाई वाला ट्यूब टाप ब्लाऊज़ बना देंगे ।

गौरी: हां जचेगा । आज कल हर बालीवुड मूवी की हीरोइन अपना पेट दिखा कर नाचती है ।  पर सिलाई वगैरा कैसे करेंगे ?

तानिया: सिलाई तो बहुत परिश्रम का काम होगा । हम दो कपड़ों को दो तरफ़ चिपकाने वाली टेप से जोड़ देंगे ।

गौरी: हां, स्कर्ट के अंदर की तरफ़ एक तरफ़ वाली टेप भी लगा देंगे ताकि वह नीचे से भारी हो कर सुंदर लगे ।

तानिया:  पौशाक बना कर हम रंग बिरंगे बिल्लौर पत्थर के चमकीले टुकड़े चिपका देंगे ताकि वह और भी सुंदर लगे । चलो हम इस कटपीस से शुरू करते हैं । यह 50 x 150 से.मी. है । इसमें से पहले हम एक 30 से.मी. x 150 से.मी. का पीस काट लेंगे और फिर उसके 30 से.मी. वर्ग के 5 टुकड़े बना लेंगे । जैसे मैने पहले बताया है हर वर्ग टुकड़े से 4 स्कर्ट बन जाएंगी । तो इस कट पीस से कुल 20 स्कर्ट बनेगी ।

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रामू, जो अभी तक चुप था बोला: नहीं, हम इससे ज्यादा स्कर्ट बना सकते हैं ।

तानिया: अभी तक तो चुप था । मैने सोचा सो गया है । बता जीनियस कैसे ।

रामू: इस कटाई से एक 30 से.मी. वर्ग में से 4 त्रिकोण बनेंगी । हर त्रिकोण का आधार है 30 से.मी. । क्यों कि यह एक समकोण समद्विबाहू त्रिकोण है, मैने पाइथागोरस की थ्योरम से गणन किया है कि हर दूसरी भुजा 30/√2  यानि 21.2 से.मी. होगी । तो, क्यों न हम कपड़े में से एक 30 से.मी का लम्बा पीस काटने की जगह दो 21.2 x 150 से.मी. के बना पीस लें । एक लम्बे पीस में से 21.2 से.मी. वर्ग के 7, यानि सारे कपड़े में से 14 टुकड़े बन जाएंगे । इन टुकड़ों को कोनो से काट कर दो त्रिकोण बन जाएंगी उसी आकार और नाप की जो तुमने अभी बनाई थी । पर इस तरह हमें 20 नहीं 28 स्कर्ट मिल जाएंगी और हां, ट्यूब टाप्स के लिए भी कपड़ा बच जाएगा । (दोनो की काटने की विधि के लिए चित्र देखें)

गौरी: भैया तुमने तो हमारा लाभ बढ़ा दिया, है न तानिया ?

तानिया: मजा आ गया । अब बताओ बाकी कपड़ों को कैसे काटना है ।

रामू थोड़ी सोच में पड़ गया और फिर उसने कहा: यह चित्र देखो । इस 80 x 150 से.मी.  वाले टुकड़े में से तीन लम्बे टुकड़े बनाओ – एक 30 से. मी. चौड़ा और दो 21.2 से. मी. । यह चित्र देखो । इस तरह 48 स्कर्ट बन जाएंगी और 6.6 x 150 से. मी. कपड़ा ब्लाउज़ बनाने के लिए बचेगा ।

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तानिया: और सबसे बड़ा कपड़ा ?

रामू: यह 150 x 150 से.मी. है । इसमें से 30 x 30 से.मी. के 25 पीस बन जाएंगे । यदि 3 पीस ट्यूब टाप्स के लिए रख लें, तो 22 बचेंगे जिन में से 88 स्कर्ट बन जाएंगी ।

गौरी: तो भैया, इसका अर्थ है कि सारे कपड़े से 28 + 48 + 88 यानि 164 स्कर्ट बन सकती हैं ।

तानिया: पर मेहनत का कम होगा इतनी सारी पौशाकें बनाना । कोई बात नहीं, गर्मी की छुट्टियां सारी पड़ी हैं ।

रामू: एक पौशाक कितने की बेचेंगे हम ?

तानिया: रामू, अब तू डाल्ज़ की दुकानो में जा कर देख कि वह कितने पैसे लेते हैं । फिर हम फ़ैसला करेंगे ।

रामू तो बाज़ार चला गया और तानिया और गौरी ने मिलकर पहली पौशाक बना ली ।

अगले दिन रामू फिर बाहर के काम पर था । तीन घंटों में तानिया और गौरी ने मिलकर 3 पौशाक और बना लीं ।

रामू दोपहर को आया और उसने कहा: अधिकतर पौशाकें तो गुड़ियों के साथ ही बिकती हैं । कभी कभी 3-4 पौशाकों का डिब्बा बिकता है – 700 से 1100 रुपए का । बहुत ही कम दुकानो में एक पौशाक का डिब्बा बिकता है । तब उसके लिए 300 से 500 रुपए लेते हैं ।

गौरी: तो भैया, हम एक पौशाक कितने की बेचेंगे ?

तानिया: देखो, न तो हम कोई बड़ी दुकान हैं और न ही हम सुंदर डिब्बों में सजा रहे हैं । तो मेरे विचार से 50 रुपए की एक पौशाक उचित रहेगा, क्यो रामू ?

रामू: हां, ठीक है ।

तानिया: रामू, गौरी के हाथ में अच्छी सफ़ाई है । इस लिए हम दोनो पौशाकें बनाएंगे और तू बाहर लेन देन का और बेचने का काम करना । पहले हम तीनो अपनी दोस्तों से बात करेंगे कि वह कितनी पौशाकें खरीदेंगी और उसके बाद यदि आवश्यक हुआ तो तुझे घर घर जा कर भी पौशाकें बेचनी होंगी । अच्छा अनुभव होगा कि चीज़ें कैसे बेची जाती हैं ।

पहली 8 पौशाकें तो तानिया के मित्रों ने ही खरीद लीं । यह 400 रुपए तो तानिया ने वापिस ले लिए । उसके बाद रामू जितने भी पैसे लाता था, तीनो बराबर बराबर बांट लेते थे । गर्मियों में 150 पौशाकें और बिकीं जिन से मिले 7500 रुपए । तानिया, गौरी और रामू ने 2500-2500 रुपए कमा लिए । लक्षमी तो हैरान थी कि उसके छोटे छोटे बच्चों ने व्यवसाय करना सिखा और दोनो ने मिल कर 5000 रुपए कमाए ।

रामू ने तानिया और गौरी को बताया कि उसने 80 पौशाकें तो दुकानो को बेची थी । दुकानो ने उने बढ़िया से डिब्बों में सजा कर 300 से 400 रुपए में बेचा था । दुकानदार तो और भी पौशाकों की मांग कर रहे थे ।

तानिया: स्कूल के दिनो में तो मां जी मुझे यह नहीं करने देंगी । गौरी की  तीन चार सहेलियों को साथ लगा लो ताकि तुम स्कूल की पढ़ाई भी कर सको ।   हां, कभी कभी राय देने में मुझे प्रसन्नता होगी ।

 

चुनौती

अर्जुन कहता है कि वह 24 से.मी. परिमिति वाला एक से.मी. मोटी चांदी समबाहु अश्टभुज चादर चाहता है । चांदी का भाव 41 रुपए/ग्राम है । एक घन से.मी. चांदी के भार 10.5 ग्राम होता है ।

उत्तर: एक अश्टभुज ABCDEFGH बनाओ । इसकि परिमिति 24 से.मी. और 8 समान भुजाएं हैं, अत​: एक भुजा की लम्बाई 24/8 – 3 से.मी. है । पहले हमने इसका क्षेत्रफल निकालना है । पहले इसकी चार भुजाओं को विस्त्रित करके चतुर्भुज LIJK बनाओ (चित्र देखें) ।

fig.g12.5अश्टभुज ABCDEFGH = चतुर्भुज  LIJK  – (त्रिकोण BCI + त्रिकोण DJE + त्रिकोण FKG + त्रिकोण HLA  )

पहले त्रिकोण BCI का क्षेत्रफल निकालेंगे ।

रेखा  BC  को   X तक बढ़ाओ । कोण BCI कोण XCD का शीर्षभिमुख कोण होने के कारण इसके समान है ।

एक अश्टभुज के सारे  बहिश्कोणो का योग 360° है, इस लिए हर बहिश्कोण 360/8 = 45° होगा । कोण IBC =  कोण XCD = 45°.  तो कोण BIC, त्रिकोण का तीसरा कोण होने के कारण, 180°- 45°- 45° = 90°  है ।

पाइथागोरस थ्योरम के अनुसार BC2 = BI2 + CI2   ।  किंतु कोण IBC और BCI  समान होने के कारण BIC एक समद्विबाहु त्रिकोण है  जिस में BI = CI, अत: BI2  = BC2/ 2   ।  क्यों कि BC = 3 से.मी., BI = CI = 3/√2  = 2.12 से.मी ।

अत: त्रिकोण BIC का क्षेत्रफल होगा 2.12 x 2.12 = 2.25 से. मी.2  (आधार x ऊंचाई/2) ।

समबाहु अश्टभुज से बनी यह चारों त्रिकोण एक जैसी होंगी ।

अब LIJK का क्षेत्रफल निकालें

LI = LA + AB = BI = 2.12 + 3 + 2.12 = 7.24 से.मी. ।

क्योंकि यह एक समबाहु अश्टभुज है, चतुर्भुज की चारों बाहुएं समान होंगी । हर कोण 90° का होगा और एक वर्ग बन जाएगा ।

LIJK का क्षेत्रफल = 7.24 x 7.24 = 52.42 से. मी.2  ।

अश्टभुज ABCDEFGH = चतुर्भुज  LIJK  – (4 x त्रिकोण  BIC ) = 52.42 – 4 x 2.25 = 43.42 से. मी.2

चांदी के टुकड़े का घनफल = क्षेत्रफल x ऊंचाई 43.42 x 1 से. मी.

चांदी के टुकड़े का भार = 43.42 x 10.5 = 455.88 g .

चांदी के टुकड़े का मूल्य  = 455.88 x 41.5 =  18919.02 रुपए ।