महक और अरीशा

fig.g5.4

लव ट्रायंगल

रानिया अली जी एक गरीबों की बस्ती के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाती थी । स्कूल के छात्रों को सीखने – पढ़ने की रुचि बिल्कुल भी नहीं थी ।  रानिया अली जी को इस चुनौती का संपूर्ण ज्ञान था, अतः वह विद्यार्थिओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए नित नई विधियां खोजती थी ।  यह भी एक और दिलचस्प दिन था ।

दो लड़कियां, महक और अरीशा, क्लास में बैठी गपशप करते करते  खिसिया रही थी ।  रानिया अली जी उनसे पूछा कि वह क्लास में बातें क्यों कर रही थी और क्या इतनी दिलचस्प और हंसी वाली बात थी । लड़्कियों ने कोई उत्तर नहीं दिया, शायद डर के मारे ।   किंतु उनकी जगह रेहान एक लड़का जो उनके पास बैठा हुआ था, बोला, “वह एक लव ट्रायंगल वाले क्रमिक नाटक के बारे में बात कर रही थी, जो दोनो ने कल रात देखा था ।”

रानिया अली जी: महक, अरीशा और रेहान – तीनो इधर आओ ।

रेहान: मैने तो कुछ नहीं किया था, यही दोनो बातें करके खिसिया रही थी ।

रानिया अली जी: हां, पर तेरा ध्यान तो पूरी तरह उन पर था । तीनो इधर आओ और क्लास की ओर मुह करके एक त्रिकोण (triangle) बनाकर खड़े हो जाओ ।

पूरी क्लास खिसियाने लगी, सोच कर कि यहां भी एक लव ट्रायंगल बनाई जा रही थी ।

              विषमभुज, समद्विबाहु और समबाहु  त्रिकोण

fig.g5.1              रानिया अली जी: सब लोग, खिसियाना बंद करो । यह तीनो अब तुमें अलग अलग तरह की त्रिकोणों के बारे में सिखाएंगे । क्या महक और अरीशा. अरीशा और रेहान और रेहान और महक के बीच की दूरी में कोई सम्बंध है ?

एक लड़के ने कहा कि तीनो के बीच की आपसी दूरी बिल्कुल अलग है ।

रानिया अली जी: रानिया अली जी:  त्रिकोण जिसकी भुजाएं असमान हों, एक विषमभुज (scalene) त्रिकोण कहलाती है । अब तीनो इस तरह खड़े हो जाओ कि रेहाब महक से उतनी ही दूर हो जितना कि अरीशा से ।

एक त्रिकोण जिसकी दो भुजाएं समान हों, समद्विबाहु (isosceles) त्रिकोण कहलाती है । ध्यान से देखो कि कोण रेहन-महक-अरीशा और रेहान-अरीशा-महक, दोनो बराबर हैं । एक समद्विबाहु त्रिकोण का गुण है कि इसके दो कोण समान होते हैं ।

सामने खड़े हुए तीनो विद्यार्थी चंचल हो रहे थे जब अध्यापक उनसे कहा:  रेहान अब तुम ऐसे चलकर आ जाओ कि रेहान-महक और रेहान- अरीशा के बीच दूरी उतनी ही हो जितनी महक और अरीशा के बीच है । ऐसा करने से तीनो की एक दूसरे के बीच की दूरी समान हो गई । इस तरह एक समबाहु (equilateral) त्रिकोण बन गई जिसके तीनो कोण बराबर थे ।

त्रिकोणों का वर्गीकरण उनके कोणों से

fig.g.5.2              रजाब: मैडम जी, मेरे भाई ने तो मुझे बताया था कि त्रिकोणों का वर्गीकरण उनके कोणों से किया जाता है ।

रानिया अली जी: हां, तेरे भाई ने ठीक बताया था, त्रिकोणों का वर्गीकरण उनके कोणों से भी किया जाता है । मैं तीन त्रिकोण बोर्ड पर बनाऊंगी । एक त्रिकोण का एक कोण 90° है । इसे एक समकोण त्रिकोण (right angle triangle) कहते हैं । वह त्रिकोण यहां मध्य में है ।

रजाब: बाईं ओर वाली त्रिकोण तो मोटी लगती है ।

रानिया अली जी: इसका एक कोण 90° से अधिक है । इसलिए इसे एक अधिक त्रिकोण (obtuse triangle) कहते हैं, और तीसरी वाली के सारे कोण 90° से कम हैं और यह न्यून त्रिकोण (acute triangle) है ।

              त्रिकोण के तीनो आंतरिक कोणों का योग 180°

ताहीन ने हाथ खड़ा किया ।

रानिया अली जी: ताहीन, क्या बात है ?

ताहीन: आपने कहा था कि मैं स्कूल की दीवार पर नहीं लिखूं । क्या मैं बोर्ड पर कुछ रेखाएं बना सकता हूं ।

रानिया अली जी: ठीक है पर कुछ अच्छा बनाना ।

ताहीन ने बोर्ड पर यह चित्र बना दिया (नीचे देखें) ।

fig.g.5.3

रानिया अली जी: ताहीन, यह क्या बनाया है ?

ताहीन: पता नहीं, जो मुझे अच्छा लगा ।

रानिया अली जी: यह एक त्रिकोण का चित्र है जिसकी हर भुजा को तूने बाहर की ओर विस्त्रित कर दिया है । इसमें तीन कोण तो त्रिकोण के अंदर (आंतरिक, interior) हैं और तीन उनके बहिश्कार कोण (exterior angles) हैं । मैं अंदर वाले कोणो को काले रंग से बना देती हूं और बाहर वालों को लाल रंग से ।

रानिया अली जी  कुछ पलों के लिए रुकी पर फिर बोली: मैं यह अगली क्लास में पढ़ाना चाहती थी पर चलो आज ही सही । त्रिकोण के सारे बहिश्कोणों का योग 360° होता है ।

ताहीन: मैडम जी, यदि मैने त्रिकोण के बदले एक चतुर्भुज बनाई होती, तो उसके सारे बहिश्कोणों का योग भी क्या 360° ही होता ?

रानिया अली जी: तुम चाहे 3,4,5,6 या किसी भी संख्या की भी बहुभुज बना लो, उसके बहिश्कोणों का योग सदा ही  360°  होगा ।

रजाब: मैडम जी । ताहीन का चित्र तीन रेखाओं से बना है । हमने पढ़ा था कि एक रेखा पर बने सारे कोणों का योग 180° होता है । अत: यदि  तीनो अंदर वाले और तीनो बहिश्कोणों का योग 3 x 180° यानि 540° होगा । आपने बताया है कि बहिश्कोणों का योग 360° है । इसका मतलब कि त्रिकोण के तीनो आंतरिक कोणों का योग 540 – 360 यानि 180° है ।

रानिया अली जी: मैं यहां किस लिए आई हूं ? ताहीन ने चित्र बना दिया और उसे लेकर रजाब ने अगली प्रमेय (theorem) बना दी कि एक त्रिकोण के आंतरिक कोणों का योग 180° होता है ।

महक: मैडम जी, मैं क्लास के शुरू में बातें कर रही थी । अब मैं पूरी तरह ध्यान दे रही हूं । क्षतिपूर्ति के लिए मैं कहना चाहूंगी कि एक त्रिकोण में दो समकोण नहीं हो सकते ।

रानिया अली जी: क्यों नहीं हो सकते ?

महक​: क्यों कि दो समकोण का योग 180° हो जाएगा तो तीसरे कोण को शून्य होना पड़ेगा ।

अरीशा: महक ठीक कह रही है कि एक त्रिकोण में केवल एक ही समकोण हो सकता है ।

रानिया अली जी: मुझे बहुत अच्छा लगा कि तुम दोनो पूरी तरह से ध्यान दे रही थी । इसलिए आज की गपशप के लिए तो मैं क्षमा कर देती हूं पर आगे से यह नहीं करना ।

क्लास के बाद रजाब रानिया अली जी के पास आया और उसने एक प्रश्न पूछा ।  क्या यह उचित होगा कि किसी भी n भुजाओं वाली बहुभुज के आंतरिक कोणों का योग   (n x180°) – 360°  होगा ? वर्ग में चार भुजाएं होती हैं तो n = 4 तो आंतरिक कोणो का योग 4x 180 -360 यानि 360° होगा ।

रानिया अली जी: रकाब, तू तो जीनियस है । मैने इस तरह कभी सोचा ही नहीं  पर तेरा यह नवीन सूत्र बिल्कुल ठीक है ।

            चुनौती

रेखा AB पर रेखा CD अभिलंब (perpendicular) है, और रेखाओं AC और CE की लम्बाई समान है (चित्र देखें) । इनमें से विषमभुज, समद्विबाहु, समबाहु, अधिक कोण, न्यून कोण और समकोण तरह की त्रिकोण ढूंढो । हो सकता है कि किसी एक प्रकार की त्रिकोण शून्य, एक या दो बार बनी हो ।

fig.g5.5

इस चुनौती का उत्तर नहीं दिया जाएगा ।