रानिया अली

rekhafig.3.1रानिया अली जी का स्कूल

रानिया अली जी एक गरीबों की बस्ती के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाती थी । अधिकतर छात्र वहां आते थे क्योंकि उन्हें मजबूर किया जाता था । स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को थोड़ा सा धन उपजीविका के लिए दिया जाता था । अत: माता पिता बच्चों को ज़बरदस्ती स्कूल भेजते थे ।  स्कूल के छात्रों को सीखने पढ़ने की रुचि शायद नाम मात्र भी नहीं थी । रानिया अली जी को इस चुनौती का संपूर्ण ज्ञान था, अतः वह विद्यार्थिओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए नित नई विधियां खोजती थी । यह उस दिन का व्याख्या है जब रानिया अली जी ने रेखागणित की क्लास में कोण का लैसन पढ़ाना था ।

360° का कोण

रानिया अली जी ने एक छात्र को आगे बुला कर क्लास की ओर मुंह कर के खड़ा होने को कहा । फिर उससे बाएं घूमने को कहा, फिर थोड़ा और बाएं, फिर थोड़ा और बाएं, करते करते उसका मुंह फिर क्लास की ओर आ गया । कुछ लड़के लड़कियां इस क्रिया को देख कर हंसने लगे और कुछ उत्सुक हुए । तब उसने क्लास को बताया कि लड़का एक पूरा गोलचक्कर घूमा था । घूमने का पैमाना कोण होता है और पूरा गोलचक्कर घूमने से उसने 360° का कोण बनाया था ।

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घूमने वाली बात से कुछ छात्रों का मन थोड़ा सा बहला किन्तु बाकियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह काफ़ी नहीं था ।

सी-सा

अब रानिया जी ने उन्हें एक सी-सा का चित्र दिखाया । सी-सा तो एक फट्टा होता है जो बीच में से अंकित होता है और उसके पक्ष ऊपर या नीचे जा सकते हैं । रानिया जी ने बताया कि इसका ऊपर का भाग 180° का कोण बनाता है और बाकी का 180° का कोण फट्टे के नीचे बनता है । इस तरह अंकुर के ऊपर और नीचे वाले दोनो कोणो का योग एक गोलचक्कर बना देता है यानि 360° का कोण । नीचे चित्र देखें ।

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क्लास को सी-सा से थोड़ा सा मज़ा आया, इतना कि अब सभी सोच रहे थे कि रानियाजी के पटोले में से आगे क्या निकलेगा ।

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रानिया जी: अभी तुमने देखा कि एक फट्टे के ऊपर के भाग का कोण 180° था । यदि इस कोण को दो या तीन भागों में काट दो, तो उनका योग तो 180° ही रहेगा । तो याद रखना की एक सीधी रेखा के ऊपर जितने भी कोण बना लो उनका योग 180° ही रहेगा, और एक गोलचक्कर में बने सब कोणो का योग 360° होगा । उदाहरण है यह रेखा abc (चित्र देखें), इसके ऊपर तीन कोण बने हैं । एक कोण है 45°, दूसरा 30° तो तीसरा कोण एब्द 180 – 45- 30 यानि 105° होगा ।

बच्चों को यह बात ठीक लगी पर ध्यान इधर उधर होने लगा । क्या रानिया जी कुछ मस्त चीज़ दिखाएंगी भी या नहीं ?  पर जल्द ही रानिया ने बच्चों को फिर से अपने काबू में कर लिया ।

फ़ैरिस झूला

रानियाजी ने क्लास से पूछा, “किसी को याद है फ़ैरिस झूला ?” यह चित्र एक आठ गंडोलों वाले फ़ैरिस झूले का है जो तुमने पिछले मेले में देखा होगा । मैंने इसके केंद्र पर C लिख दिया है । हर गंडोला एक स्पोक से केंद्र से जुड़ा हुआ है । आलिया, अरीशा, महक, फ़तह और रेहान गंडोलों पर बैठे हैं जहां जहां इस चित्र में दिखाया गया है । पहले मुझे बताओ की आलिया के गंडोले के स्पोक, केन्द्र, और अरीशा के गंडोले के स्पोक का कोण कितना बड़ा है । चलो, आलिया और अरीशा तुम दोनो बताओ ।

rekhafig.3.3.आलिया: मैडमजी, इस फ़ैरिस झूले में 8 स्पोक हैं । इसका मतलब कि दो स्पोक के बीच का कोण 360 भाग 8 यानि 45° होगा । तो आलिया-केंद्र-अरीशा कोण 45° है ।

रानियाजी: ठीक बताया, क्या आलिया की बात सब को समझ आ गई ?  महक, अब तुम आलिया-केंद्र-महक कोण का नाप बताओ ।

महक: यह कोण एक गोलचक्कर का 3/8 भाग यानि 360 x 3/8 यानि 135° होगा ।

रानियाजी: रेहान, अब तुम बताओ, तुम्हारे और आलिया के बीच कितने अंश का कोण है ?

रेहान: मैडमजी, यदि आलिया मेरी ओर फ़ैरिस झूले के नीचे से आए तो वह तीन गंडोले दूरी है, यानि यह कोण बन जाएगा 360 x 3/8 यानि 135° । पर यदि मैं झूले से ऊपर से हो कर मैं उसके पास जाऊं तो पांच गंडोले दूर जाना होगा तो यह कोण हो जाएगा 360 x 5/8 यानि 225°।

रानियाजी: शाबाश रेहान । क्लास रेहान ने बताया कि एक ओर से कोण 135° और दूसरी ओर से 225° । यदि कुल मिलाएं तो झूले के इर्द गिर्द जाकर रेहान का वापिस आने का कोण 135° + 225° यानि 360° हो जाएगा क्यों कि यह एक पूरा गोलचक्कर बन जाएगा ।

रजाब: केवल पांच लोग ही झूले पर बैठे थे । मेरी बारी तो आई ही नहीं ।

रानियाजी: सबकी बारी आएगी । एक नया झूला आ रहा है । देखो यह चित्र । रजाब, इस में कितने गंडोले हैं ?

rekhafig.3.4रजाब: इस में 36 गंडोले हैं । हमारी क्लास  के हर छात्र के लिए एक एक गंडोला है और फिर कुछ गंडोले खाली भी रह जाएंगे ।

रानियाजी: रजाब, अगर तुम एक गंडोले पर हो और इम्तियाज़ अगले वाले पर, तो रजाब-केंद्र-इम्तियाज़ का कितने अंश का कोण बनेगा ?

रजाब: कुल वृत्त में 360° होते हैं, और यह कोण उसका 1/36° भाग यानि 10° होगा ।

रानियाजी: शाबाश, ठीक हिसाब लगाया । लगता है कि सबको फ़ैरिस झूलों का मज़ा आया है । घर जाकर, इंटरनैट पर देखो, बहुत अलग अलग तरह के फ़ैरिस झुले देखेंगे । स्पोकों के बीच के कोण के बारे में सोचो । और अगर झूले नहीं देख सकते,तो गाड़ियों के पहिए देखो । वहां भी कोण दिखेंगे । आज कोई होमवर्क नहीं है । बस फ़ैरिस झूलों के मज़े लो ।

चुनौती

नीचे दिखाए गए अलग अलग समय पर घड़ियों के घंटे और मिनट की सुईयों के बीच छोटे से छोटा कोण क्या है ?

fig.g3.5उत्तर

पूरे गोलचक्कर में 360° होते हैं । घड़ी में 1 से 12 तक अंक बने हुए हैं । दो अंकों के बीच का कोण 360/12 यानि 30° होगा  ।

एक बजे घंटे की सुई 1 पर है और मिनट की सुई 12 पर, केवल 1 ही अंक दूर तो, इनके बीच का कोण 1 x 30 यानि 30° होगा ।

तीन बजे घंटे की सुई 3 पर है और मिनट की सुई 12 पर,  3 अंक दूर तो, इनके बीच का कोण 3 x 30 यानि 90° होगा ।

चार बजे घंटे की सुई 4 पर है और मिनट की सुई 12 पर,  4 अंक दूर तो, इनके बीच का कोण 4 x 30 यानि 120° होगा ।

आठ बजे घंटे की सुई 8 पर है और मिनट की सुई 12 पर,  4 अंक दूर तो, इनके बीच का कोण 4 x 30 यानि 120° होगा ।

दस बजे घंटे की सुई 10 पर है और मिनट की सुई 12 पर,  2 अंक दूर तो, इनके बीच का कोण 2 x 30 यानि 60° होगा ।