रूसी बबुश्का गुड़िया

fig.g6.6

नवीन आकर्षण

रानिया अली जी एक गरीबों की बस्ती के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाती थी । स्कूल के छात्रों को सीखने – पढ़ने की रुचि बिल्कुल भी नहीं थी ।  रानिया अली जी को इस चुनौती का संपूर्ण ज्ञान था, अतः वह विद्यार्थिओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए नित नई विधियां खोजती थी ।  आज रानिया अली जी कुछ खोई हुई थी । कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अगला रेखागणित का सबक कैसे शुरू करें पर अचानक उन्होंने प्रिंसिपल की मेज़ पर एक रूसी गुड़िया देखी इसे बाबुश्का डाल कहते हैं । जब रानिया अली जी ने प्रिंसिपल से यह गुड़िया मांगी तो कहा गया कि उसी दिन वापिस लानी होगी ।

fig.g6.1              रानिया अली जी ने उस गुड़िया को क्लास में लाकर अध्यापक वाले मेज़ पर रख दिया । सभी विद्यार्थी, लड़के और लड़कियां, असमंजस में थे कि मैडम जी आज क्लास में गुड़िया क्यों ले कर आईं ।

रानिया अली जी: क्लास, मैं आज तुम्हें एक नई तरह की गुड़िया दिखाउंगी ।  इसे बबुश्का डाल कहा जाता है । शायद कुछ छात्रों ने इसे प्रिंसिपल साहिब की मेज़ पर देखा भी हो पर क्या तुम जानते हो कि इस गुड़िया को खोला भी जा सकता है ?

जब अध्यापक ने उस डाल को खोला, तो उसके अंदर से एक और डाल निकली, जो थोड़ी सी छोटी तो थी पर बिल्कुल समरूप थी । फिर उसने पहले वाली डाल को बंद कर दिया । उसने दूसरी डाल को खोला तो उसमें से एक तीसरी डाल निकली । फिर तीसरी में से निकली चौथी और चौथी में से निकली पांचवी । सभी डाल्ज़ का आकार और उन पर बना दिज़ाइन तो वही था पर नाप अलग अलग थे – पहली > दूसरी  > तीसरी > चौथी > पांचवी ।  उसने पांचों डाल्ज़ को मेज़ पर रख दिया ताकि विद्यार्थी उनको ध्यान से देख सकें ।

कई छात्रों ने ऐसी जादू की गुड़िया पहले कभी नहीं देखी थी और वह तो, समझ लो, कि मंत्रमुग्ध हो ग​ए ।  सब छात्र इन डाल्ज़ को केवल सराह ही रहे थे पर अचानक बराक बोला: मैडम जी यह सारी गुड़िया तो एक समान हैं ।

महक: नहीं, इनमें कोई डाल बड़ी है और कोई और छोटी ।

उसके बाद क्लास के छात्रों में वार्तालाप हुआ कि यह डाल्ज़ समरूपी (similar) तो थी पर नाप अलग होने के कारण यह सर्वांगसम (congruent or identical) नहीं थी । यदि वह एक ही नाप की होती तो एक डाल दूसरी डाल के अंदर नहीं जा सकती ।

रानिया अली जी: क्लास अब मुझे बताओ कि अगर एक डाल लेट जाए तो क्या वह फिर भी बाकी डाल्ज़ के समरूपी होगी ?

छात्र सब खुसर फुसर करने लगे और अंत में ताहीन ने कहा: हां, क्योंकि लेटने से न तो उस डाल का आकार बदला है और न ही डिज़ाइन या रंग । और फिर डाल कभी भी उठ जाएगी और दूसरी डाल की तरह खड़ी भी हो जाएगी । क्लास ताहीन की बात से सहमत थी कि लेटी हुई, आधी लेटी हुई और खड़ी हुई डाल, सब समरूपी होंगी ।fig.g6.2 रानिया अली जी: इस चित्र में कई बिस्कुट हैं । कौन कौन से बिस्कुट समरूपी हैं ।

अरीशा: यह सब बिस्कुट  अलग अलग के आकार के हैं, कोई दो बिस्कुट भी एक दूसरे के समरूपी नहीं हैं ।

रानिया अली जी: शाबाश अरीशा । यह एक और बिस्कुटों का चित्र है ।

fig.g6.3              अरीशा: इनमें से अगर मैं कुछ बिस्कुटों को घुमा दूं तो वह दूसरों जैसे लगेंगे । इसलिए मेरे विचार में बिस्कुट 1 से 6 एक जैसे हैं, 7 और 8 उसी आकार के हैं पर छोटे हैं ।

रानिया अली जी: रेहान, आज तू चुपचाप बैठा हुआ है । बता कि जो बिस्कुट समरूपी हैं, क्या वह एक जैसे होंगे यदि वह एक ही नाप के हों ।

रेहान: यदि मैं घुमा फिरा कर भी एक के ऊपर दूसरी कर के स्टैक कर सकता हूम तो, हां, वह बिल्कुल एक जैसे बिस्कुट होंगे ।

रेखागणित की भाषा में हम कहेंगे कि त्रिकोण 1 से 8 तक समरूप हैं पर 1 से 6 तक सर्वांगसम भी हैं । यह समरूप और सर्वांगसम  होने की धारा केवल त्रिकोणों पर ही नहीं, बल्कि हर आकार पर लागू होती है । अब एक चतुर्भुजों का चित्र दिखाती हूं । महक, बता इन में से कौन सी चतुर्भुज सर्वांगसम या समरूप हैं ।

fig.g6.4             महक: आकार 1 से 4 तक वर्ग हैं और इसलिए समरूप हैं । आकार 2 का आकार 1 सर्वांगसम भी है, और आकार 4 आकार 3 का ।  आकार 5, 6 और 7 सब आयतें हैं और लगता है कि वह एक दूसरे के समरूप भी हैं, पर नाप कर ही पूरी तरह कह सकेंगे । और हां, और आकार 5 और 7 सर्वांगसम भी लगते हैं ।

ताहीन: मैडम जी, क्या यह कहना उचित होगा की सारे समकोण एक दूसरे के समरूप होते हैं, सारे वर्ग एक दूसरे के, सारे समबाहु पंचभुज एक दूसरे के, और यहां तक कि सारे वृत्त (circles) एक दूसरे के ?

रानिया अली जी: समरूप पर सर्वांगसम नहीं । ताहीन, मैं तेरी इस तरह की लंबी सोच से बहुत खुश हूं, शाबाश ।

ताहीन: मैडम जी, मुझे अभी तक समझ नहीं आया कि समरूप के बारे में सोचने की क्या आवश्यकता है ।

fig.g6.5              रानिया अली जी: मैने अलग अलग नाप के दो समरूप त्रिकोण बनाए हैं ABC और   A’B’C’  ।  क्योंकि दोनो त्रिकोण समरूप हैं, हम कह सकते हैं कि कोण ABC = A’B’C’, कोण BAC = B’A’C, कोण ACB = A’C’B’ ।  हम यह भी कह सकते हैं कि इन त्रिकोणो की भुजाओं के अनुपात भी समान होंगे यानि AB/A’B’ = BC/B’C’ = CA/C’A’  । एक त्रिकोण की भुजाएं नापने के बाद, दूसरी की केवल एक ही भुजा नापनी पड़ेगी, बाकी अनुपात से निकाली जा सकती हैं ।

इतनी देर में घंटी बज गई और बच्चे भाग गए, हां, बिना अध्यापक की अनुमति के ।

चुनौती

ABCD एक वर्ग है । दिखाओ कि  रेखाएं AD  और BC अमिलंब रेखाएं (perpendicular lines) हैं ।

उत्तर

fig.g6.7

चित्र देखें  ।

क्योंकि  ABCD  एक वर्ग है,  AB = BC = CD = DA,  कोण  ABC = BCD = CDA = DAB = 90°, और   AB और CD    समांतर रेखाएं हैं, और  BC   और   DA  भी ।

ABC   एक समद्विबाहु त्रिकोण है क्योंकि AB = BC  । इसलिए कोण BAC = BCA । अत​:    त्रिकोण  AEB और  DEB सर्वांगसम हैं क्योंकि रेखा EB दोनो में है, और कोण BAC = BCA । अत​:  कोण  AEB = कोण BEC ।  पर    AEB = कोण CED और कोण BEC = कोण DEA (शीर्षकोण) ।   तो चारों कोण समान हैं और वह मिलकर एक वृत्त बनाते हैं यानि उनका योग 360° है । अत: प्रत्येक कोण  90° का है अर्थात   रेखाएं AC  और BD अमिलंब रेखाएं हैं ।