सोनिया और वीरू

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सोनिया और वीरू का परिचय

सोनिया है सोनू और विद्या बंसल की पुत्री । सोनू और विद्या दोनो अपनी अपनी नौकरी में अच्छा कमाते थे, और विवाह के दो वर्ष बाद उनके जीवन में एक शिशु आई । शिशु का नाम उसके पिता पर सोनिया रखा गया । विद्या, सोनू, दादा-दादी और सब परिजन, सोनिया सब की प्यारी थी । वह क्रेच, नर्सरी स्कूल और किंडरगार्टन से गुजर कर अब पहली श्रेणी में आ पहुंची ।अड़ौस पड़ौस में भी सोनिया के बहुत मित्र थे ।

लगभग दो वर्ष पहले सोनिया का बताया गया था कि अब वह बड़ी बहन बनने वाली है । कुछ माह बाद उसके भाई का जन्म हुआ ।  नामकरण संस्कार से पहले ही सोनिया ने उसे प्यार से वीरू कह कर पुकारना शुरू कर दिया ।  बड़ी बहन को कौन टाल सकता था, बस भाई का नाम वीरू ही रखा गया । सोनिया को उससे खेलने में बड़ा मज़ा आता था । उसका भी बहन से बड़ा लगाव हो गया ।

परिजनो का कहना ही कि वीरू ने मा कहना बाद में सीखा और सोना कहना पहले । वह सोनिया को सोना कह कर बुलाता था । दोनो इकट्ठे खेलते थे । सोनिया उससे स्नेह तो करती ही थी पर उसकी रक्षक भी थी । उसे हमेशा लगा रहता था कि कहीं वीरू को चोट ने लग जाए । उसे गुस्सा आ जाता था यदि उसकी मांजी भी वीरू को कभी झिड़क दें तो । अब  18 माह का वीरू, इधर उधर की छान – बीन तो करता ही रहता था । बस यह भी एक ऐसा ही दिन था ।

देखो वीरू का करनामा

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जब विद्या रसोईघर में थी, तब वीरू ने एक नोटबुक देखी । उसने इस नोटबुक को खोला और ज़ोर ज़ोर से एक पैन की नोकीली चोंच से  उस पर घसीटे मारे । कई बार उसने पैन से नोटबुक के पन्ने को खरोच भी दिया । यह नोटबुक विद्या की थी । जब उसने यह सब देखा तो उसे बड़ा गुस्सा आया । विद्या उसे ऊंची आवाज़ में झिड़कने लगी । मांजी को इस तरह वीरू पर चीखते हुए सुन कर सोनिया भागती हुई आई । डरा हुआ वीरू सोनिया से चिपट गया । सोनिया ने मांजी से पूछा क्यों वह उसके छोटे भाई पर गुस्सा हैं । विद्या ने सोनिया को वीरू का कारनामा दिखाया और रसोईघर चली गई । सोनिया ने वीरू को पकड़ कर गले लगा लिया और फिर उसके साथ बातें करने लगी ।

rekhafig.1.3सोनिया: आज स्कूल में हमने पढ़ा था – प्लेन, पोइंट और लाइन क्या होते हैं । पता है जब एक स्थान में चढ़ाव उतार न हो तो इसे कहते हैं प्लेन जैसा इस नोटबुक का पृष्ठ है ।

वीरू: पेन ।

सोनिया: जब तूने पैन से मार कर निशान लगाया था, उसे कहते हैं पोइंट । पोइंट बहुत छोटा होता है और इसे बिन्दु भी कहते हैं ।

वीरू ने नोटबुक पर कई निशानों को हाथ लगाया और साथ में एक ऐसी अवाज़ निकाली जैसे कह रहा हो पोइंट । फिर उसने एक झरीट पर हाथ लगाया ।

सोनिया: यह लाइन है । इसे रेखा भी कहते हैं । रेखा दो बिंदुओं को मिलाती है । यह पतली होती है पर बिन्दु से लम्बी । देख मैं दो बिंदुओं के बीच सीधी रेखा खींच रही हूं ।

वीरू सोनिया के पास सीधा भाग कर आया । फिर उठ कर दूर चला गया और दोबारा भागता हुआ आया और बोला लाइन ।

सोनिया: हां यह सीधी लाइन थी । तू भाग कर सीधा मेरे पास आया कम से कम दूरी में ।

यह कह कर सोनिया ने वीरू को गले लगा लिया ।

सोनिया और वीरू एक दूसरे से गले मिल रहे थे कि इतने में विद्या आ गई ।

सोनिया: मांजी, आज स्कूल में हमने प्लेन, पोइंट और लाइन के बारे में पढ़ा ।

विद्या: वीरू को मेरी नोटबुक में घसीटे नहीं मारने चाहिएं थे ।

सोनिया: मांजी आपका कहना ठीक है पर बेचारे के पास अपनी नोटबुक तो है भी नहीं । मैं आज पिताजी के साथ जाकर इसे एक पैन और नोटबुक ला दूंगी और एक रंग भरने वाली चित्रों की किताब भी ।

वीरू खुश था क्यों कि सोनिया उसके उसके लिए कुछ ले कर आएगी और अब मांजी भी  नहीं झिड़क रही थी ।