ताहीन का भित्ति चित्रण

रानिया अली जी का स्कूल

              रानिया अली जी एक गरीबों की बस्ती के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाती थी । स्कूल के छात्रों को सीखने – पढ़ने की रुचि बिल्कुल भी नहीं थी ।  रानिया अली जी को इस चुनौती का संपूर्ण ज्ञान था, अतः वह विद्यार्थिओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए नित नई विधियां खोजती थी ।  यह कहानी उस समय की है जब रानिया अली जी ने एक सृजनशील छात्र ताहीन को शरारत करते हुए पकड़ा ।  वह स्कूल की दीवार पर भित्ति चित्र बना रहा था ।

              स्कूल के ताहीन ने उस दिन स्कूल से एक चाक चुराया और स्कूल की दीवार पर भित्ति चित्रण करने लगा । बाद आम छात्र तो घर चले जाते थे, पर कुछ वहीं इर्द गिर्द या कहीं और जाकर आवारागर्दी करते थे । ,ताहीन ने उस दिन स्कूल से एक चाक चुराया और स्कूल की दीवार पर भित्ति चित्रण करने लगा ।  वह खराब या अश्लील चित्र नहीं बना रहा था, बस दीवार पर केवल लकीरें खींच रहा था ।  जब रानिया अली जी ने उसे यह करते हुए देखा तो ताहीन भाग गया – शायद शर्म या डर के मारे ।

              अगले दिन क्लास में रानिया अली जी ने कहा ताहीन ।  ताहीन तो बिल्कुल डर गया क्योंकि उसे याद था कि उसने पिछले दिन क्या किया था, और यह भी कि अध्यापक ने उसे देख लिया था । फिर भी वह बोला: जी, मैडम जी ।

समांतर रेखाएं

       रानिया अली जी: ताहीन, कल मैने तुझे स्कूल की दीवार पर लकीरें खींचते देखा था । इधर आ और बोर्ड पर बिल्कुल वैसे ही रेखाएं खींच जैसे कल  दीवार पर किया था । यह रहा चाक ।

              ताहीन ने केवल दो ही रेखाएं खींची थी जब रानिया अली जी ने उसे रोक दिया ।

रानिया अली जी: ताहीन, तूने इन सीधी रेखाओं को इस तरह क्यों खींचा ?  तुझे इन में क्या अनोखापन लगा  ?

ताहीन (शर्मीला और अनिश्चित): शुरू से अंत तक इन रेखाओं के बीच की दूरी वही रहती है ।

कुछ छात्र खुसर फुसर कर रहे थे कि ताहीन ने समांतर रेखाएं खींची थी ।

रानिया अली जी: यह सब काना फूसी क्यों चल रही है ? सीधे से कहो कि ताहीन ने समांतर रेखाएं खींची हैं । कोई उदाहरण दो जहां तुमने समांतर रेखाएं देखी हों ।

महक: रेल गाड़ी की पटरियां एक अचूक उदाहरण है । एक ही गाड़ी के वही पहिए इन पर दूर दूर तक जा सकते हैं । पहियों के बीच में वही दूरी रहती है और दोनो पटरियों के बीच में भी । कई सड़कों के किनारे भी समांतर होते हैं ।

रजाब: मेरे अंकल ने लकड़ी के फट्टे खरीदे थे, इनके किनारे भी समांतर थे । मैने कई ईटों के मकान देखे हैं, दो ईटों के बीच भी समांतर रेखा जैसी दूरी रहती है ।

रानिया अली जी: शाबाश । जब भी दो रेखाओं के बीच की दूरी अपरिवर्तित रहती है, वह समांतर रेखाएं होती हैं ।

फिर रानिया अली जी ने चाक से एक रेखा बनाई जो इन समांतर रेखाओं को काट रही थी । छात्र असमंजस में थे कि अध्यापक ने ऐसा क्यों किया ।

रानिया अली जी: आज हम सीखेंगे कि उन कोणो में क्या सम्बंध होता है जो दो समांतर रेखाओं को एक तीसरी रेखा के काटने से बनते हैं ।  मैने इन कोणों के नाम A, B, C, D  रख दिए हैं । कौन बता सकता है कि यदि कोण A का नाप  पता हो तो कोण B, C  और D कितने होंगे ।

कई छात्रों ने हाथ खड़े किए पर अध्यापक ने फ़तह को चुना ।

फ़तह​: हम जानते हैं कि एक सीधी रेखा के ऊपर बने ग​ए सब कोणों का योग 180°  होता है । इसलिए कोण B =  180° – कोण A  । कोण   C और A शीर्षभिमुख (opposite or vertical ) कोण हैं, इसलिए यह दोनो कोण समान होंगे । इसी तरह कोण D भी कोण B के समान होगा ।

रानिया अली जी: शाबाश फ़तह । हम यह भी कह सकते हैं कि कोण B और D, कोण A के आसन्न कोण हैं (supplementary angles), और A ओर C एक दूसरे के शीर्ष कोण या शीर्षभिमुख कोण (opposite or vertical ) हैं ।  ताहीन, अब तुम बताओ कि कोण E और A में क्या संबंध है ?

ताहीन: हमने अभी तक यह नहीं सीखा पर मैं अनुमान लगा सकता हूं । क्या यह दोनो कोण समान हैं ?

रानिया अली जी: ताहीन तूने ठीक कहा कि कोण E और A समान हैं । यह एक दूसरे के संगत कोण हैं जो कि एक दूसरे के समान होते हैं । अरीशा, अब तुम बताओ कि कोण G का कोण A से क्या संबंध है ।

अरीशा: कोण G और E एक दूसरे के शीर्षभिमुख होने के कारण समान होंगे और कोण E कोण A का संगत कोण है । इसलिए कोण G, कोण A के समान होगा ।

रानिया अली जी: हां, G और A एकांतर अभ्यांतर (alternate interior) कोण हैं जो कि एक दूसरे के समान होते हैं ।

रैहान पिछली सीट पर बैठ कर पैंसिलों से खेल रहा था जैसे वह किसी बैंड में हो । जब रानिया अली जी ने उसका नाम पुकारा तो वह चौकन्ना हो गया ।

रैहान: मैडम, आप ने हमें एकांतर अंदर वाले यानि अभ्यांतर कोणो के बारे में बताया । क्या बाहर वाले एकांतर कोण भी होते हैं ?

रानिया अली जी: हां, उने एकांतर बहिश्कोण कहते हैं और वह भी एक दूसरे के समान होते हैं । यहां F ओर D एक दूसरे के एकांतर ब बहिश्कोण होंगे ।

आलिया: लगता है कि ताहीन बहुत चतुर है । उसने यह भित्ति चित्र इस लिए बनाया ताकि आप हमें इन कोणो के संबंध के बारे में बता सकें ।

ताहीन: हां, अब मुझे अगली क्लास के लिए कुछ सोचना होगा ।

रानिया अली जी: ताहीन, खबरदार  । इस बार तो तुझे छोड़ दिया । दोबारा कभी भित्ति चित्रण किया तो सख्त सजा मिलेगी ।

चुनौती

ताहीन ने बोर्ड पर दो समांतर रेखाएं खींच दी । एक और छात्र आया, और एक रेखा और बना गया । यह रेखा ताहीन की दूसरी रेखा के ऊपर और समांतर थी  । फिर महक ने एक रेखा और बना दी । यह पहली रेखाओं के समांतर नहीं थी बल्कि तीनो को काट रही थी । और फिर पूछती है कि बताओ क्या लाल और नीले वाले कों समान होंगे (चित्र देखें) ।

इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया पर यह रही एक सहायक-सूचना । यदि तीसरी रेखा दूसरी के समांतर है तो वह पहली रेखा के भी समांतर होगी क्यों कि पहली और दूसरी रेखाएं तो एक दूसरे के समांतर हैं ।