कनाट प्लेस की सैर – भाग 2

connaught0भाग एक में क्या हुआ

तानिया, एक सोलह वर्षीय होनहार पटना में रहने वाली लड़की, दशहरे की छुट्टियों में अपनी मौसी के पास दिल्ली आई है । मौसी का बेटा आदी उसका हमआयु है । तानिया उसे हर साल राखी भेजती है । बहन के अनुग्रह पर आदी उसे कनाट प्लेस घुमाने ले गया, इस शर्त पर कि वह उसे त्रिकोणमिती सीखने में सहायता करेगी ।  खैर, दोनो घूम आए और अब सांझ में सारा परिवार चाय पी रहा था ।

आदी के पिताजी: तो कैसी रही कनाट प्लेस की सैर ?

आदी की मांजी: हां, बेटी बता क्या देखा, क्या खरीदा, क्या खाया ?

तानिया: मौसी जी, बड़ा मजा आया । पहले तो हम केंद्रीय पार्क से ओडियन स्वीट की ओर गए और वहां से कनाट सर्कट पर चलते चलते उसके सबसे उत्तर वाले भाग तक पर पहुंचे । वहां से आदी मुझे जनपथ ले गया । मैने सखियों के लिए छोटी मोटी सौगातें खरीदी और फिर जलपान करके वापिस लौट आए ।

आदी: इसने मेरे लिए एक टी शर्ट भी दी थी, और घर आकर त्रिकोणमिती भी पढ़ाई थी ।

आदी के पिताजी: अच्छा !

आदी: स्कूल में और ट्यूशन में कोई भी ठीक तरह से नहीं समझाता । तानिया का सिखाया हुआ एक दम समझ में आ गया । सच में यदि तानिया थोड़ा और सिखा दे तो ट्यूशन की परमानेंट छुट्टी ।

तानिया: मौसाजी, मेरी सोच में तो कनाट प्लेस बनी ही त्रिकोणमती पढ़ाने के लिए थी – इसके तीन संकेंद्रिक वृत्त और सोच कर बनाई गई रेडियल रोड । पता है, आदी और मैं कल फिर जा रहे हैं ।

भाग 2

अगले दिन सुबह मौसी ने तानिया और आदी को भरपेट भोजन दिया । तत्पश्चात भाई बहन दोनो निकल गए, मैट्रो पकड़ा और कनाट प्लेस पहुंच गए । वहां केंद्रीय पार्क के बिल्कुल केंद्र बिंदु पर तानिया ने अपने मोबाइल कि ऐप को शुरू कर दिया और आदी को कहा कि आज पूर्व और उत्तर की दूरियां वह देखे । दोनो आज फिर पूर्व की ओर चले और कनाट सर्कस पर ओडियन के स्वीट हाउस तक पहुंच गए ।

आदी: हम 350 मीटर पूर्व की ओर, और शून्य दूरी उत्तर कि ओर जा चुके हैं ।

दोनो वामावर्त चलते गए, बातें करते करते और इधर उधर के दृश्य देखते । धीरे धीरे चलते हुए वह कनाट सर्कट के उत्तर पर पहुंच गए । रास्ते में आदी ने मोबाइल पर देखा कि पूर्व की दूरी कम होती जा रही थी और उत्तर की दूरी बढ़ रही थी ।

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आदी: अब हम रेडियल रोड 4 पर पहुच गए हैं । उत्तर की दूरी 350 मीटर हो गई है पूर्व की शून्य । आगे देखता हूं क्या होता है ।  अरे, लगता है कि मोबाइल में कुछ गड़बड़ है । अब उत्तर की दूरी घट रही है और पूर्व की दूरी तो माइनस में जा रही है ।

तानिया: कोई गड़बड़ नहीं । बल्कि यह तो होना  ही था । हम कनाट  सर्कस पर जितना उत्तर की ओर चलना था, वह जा चुके हैं ।  अब  वापिस दक्षिन की ओर जा रहे हैं । और याद है कि हम ग्राफ़ पेपर xy अक्ष बनाते हैं । तो हमने लंबिक Y- अक्ष पर जितना ऊपर चढ़ना था, जा चुके हैं और अब नीचे आएंगे । और लंबिक अक्ष के बाईं ओर जाने से क्षैतिज X-अक्ष पर मूल्यांक माइनस हो जाते हैं – देख इस चित्र में । हम ऐसे भी कह सकते हैं कि जब हमारा घुमाव  90° हो जाता है हम पूर्व की ओर नहीं, पश्चिम की ओर जाते हैं । मैने वृत्त में चार मंडल बना दिए हैं ।   प्रथम मंडल  0° से 90° तक को कहते हैं, दूसरा मंडल 90°  से 180° तक को तीसरा मंडल 180°  से 270° तक को और चौथा मंडल 270°  से 360° तक को । दूसरे मंडल में ऊंचाई तो positive पर आधार negative है क्योंकि यह origin के बाईं ओर है ।

आदी चलता गया । उत्तर की दूरी कम होती रही और पूर्व की दूरी का नेगेटिव मूल्यांक बढ़ता गया । शहीद भगर सिंह मार्ग पहुंचने के बाद अब वह तीसरे मंडल में आ गया (चित्र देखें) । अब उत्तर की दूरी पहले शून्य हुई और फिर नैगेटिव में बढ़ी । पूर्व की दूरी का नैगेटिव मूल्यांक घटने लगा । फिर रेडियल रोड 1 पहुंचने के बाद वह चौथे मंडल में पहुंच गया जहां पूर्व की दूरी का नाप पोज़िटिव हो कर बढ़ने लगा और उत्तर की दूरी नैगेटिव तो थी पर शून्य की ओर जाने लगी । ओडियन स्वीट हाउस पर पूर्व की दूरी 350 मीटर (अधिकतम) थी और उत्तर की दूरी शून्य – बिल्कुल आरंभ की तरह ।

आदी: मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा है पर इसका त्रिकोणमिती से क्या लेना देना है ।

तानिया: घर चल कर सब समझ आ जाएगा । अभी तो आइस क्रीम खिला ।

दोनो ने आइस क्रीम खाई, थोड़ा इधर उधर घूमें और फिर घर वापिस चले आए  ।

conaughtaxesघर आकर तानिया ने एक चित्र खींचा और फिर आदी को बुलाया ।

तानिया: याद है न बीज गणित में हम लंबिक और क्षैतिज अक्ष बनाते हैं । मैने भी वही बनाया है । इसमें क्षैतिज अक्ष पर लंब अक्ष के दाईं  ओर को पोज़िटिव अंक आते हैं और बाईं ओर नैगेटिव । लंब अक्ष में ऊपर की ओर पोज़िटिव और  नीचे की ओर नैगेटिव ।

आदी: तानिया, तूने तो चार मंडल भी बना दिए हैं । और हर मंडल में एक त्रिभुज बना दी है । हर त्रिभुज समकोण है और उसका कर्ण 350 मीटर है । ∠BAC = 30°  है,  ∠BAE = 150°. ∠BAF = 210° और  ∠BAG = 330°   है ।

तानिया: अब इन कोणो के त्रिकोणमिती फलन निकाल ।

आदी: sin BAC = 0.5, sin BAE = 0.5, sin BAF = – 0.5 और sin BAG = -0.5 हो गए । cos BAC = 0.866, cos BAE =  -0.866, cos BAF = -0.866 और cos BAG = 0.866 हो गए । tan BAC = 0.577, tan BAE = – 0.577, tan BAF = 0.577 और tan BAG = – 0.577 हो गए ।  पहले मंडल वाले तो कल से याद थे, बाकियों के चिन्ह आज निकाले हैं । यह तो दिलचस्प है, पहलें मंडल में तो सब पोज़िटिव थे, दूसरे में केवल sin, तीसरे में केवल tan और चौथे में केवल cos ।                    जो बात तू कनाट प्लेस में कह रही थी,अब उसका नतीजा समझ में आया, पर यह सब याद कैसे रहेगा ?

तानिया: मेरे पिताजी को सिखाया गया था     “After school time cinema” यानी   all, sin, tan, cos । जिस को सिनेमा जाना अच्छा नहीं लगता उनके लिए “After school time chocolates” या “All Silver Tea Cups”.  तुझे जो भी अच्छा लगता है, याद कर ले । मुझे तो चाकलेट पसंद हैं । एक बात और  ।

व्यवसाय संबंधी कार्य में कोण को अधिकतर डिग्री की जगह रेडियन (radian) में नापा जाता है । सिद्धांत यह है के एक बिंदु पर घूम कर वापिस वहीं आने में   2π  रेडियन या 360° का कोण बनता है । याद है हमने रेखागणित में पढ़ा था कि एक (वृत्त) गोलधारे की परिधि (circumference) और व्यास (diameter)  का अनुपात (ratio)  π  होता है । π लगभग 22/7  होती है । इसलिए एक रेडियन लगभग 360°/ 2π ≈ 57° होता है । इस प्रणाली के अनुसार, पहला मंडल होता है   0 से  π/2 तक, दूसरा  π/2  से  π तक, तीसरा π  से  3π/2  तक और चौथा 3π/2  से  2π  तक ।

शायद आदी के लिए आज का उपदेश जटिल था । फिर भी तानिया ने उसे  0 से 2π तक के   sin x, cos x और tan x  के रेखा चित्र दिखाए ।

Fig.2.2

आदी ने देखा कि sin x  और cos x की मूल्य  संख्या 0 और 1  के बीच में ही रही । यह तो होना ही था क्योंकि एक समकोण त्रिकोण की कोई भी भुजा उसके कर्ण से बड़ी नहीं हो सकती । पहले और दूसरे मंडल में sin x पोज़िटिव था और पहले और चौथे में cos x  । यह भी तानिया ने पहले ही उसे चित्र में दिखाया था । उसने इन दोनो फलन का एक और गुण देखा । जब sin x बढ़ता था तो cos x  कम हो जाता था और जब cos x बढ़ता था तो sin x कम हो जाता था । उसे याद आया यह भी प्राक्रितिक था क्योंकि पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार  sin2x + cos2x =1 या sin2x = 1 – cos2x  होता है ।

सबसे लुभावना था  tan x का रेखा चित्र । यह  sin x और  cos x  के रेखा चित्रों से अलग था, क्योंकि इसकी मूल्य संख्या  1 पर नहीं रुकती थी । बल्कि पहले मंडल के अंत पर (90° पर) यह असंख्य थी और फिर दूसरे मंडल के आरंभ होते ही नीचे नैगेटिव असंख्य । फिर तीसरे मंडल से अंत (270° पर) से चौथे मंडल में जाने पर भी यही हुआ: पोज़िटिव असंख्य से एक दम नैगेटिव असंख्य ।  आदी को तो एक लड़के की याद आ गई । वह हंसना शुरू करता था और उसकी हंसी पहले तो इतनी ज़ोर की होती थी कि

सब देखते रह  जाएं, फिर बिना रुके, हंसी उतने ही ज़ोर के रोने  में बदल जाती थी ।

आदी तो अपनी त्रिकोणमिती की पुस्तक से लगा रहा । यह विश्वास ही बहुत था कि यदि कुछ समझ ना आए तो तानिया से पूछ सकता है । दो दिन बाद तानिया वापिस चली गई । एक माह बाद आदी ने तानिया को फ़ोन पर एक फ़ोटो भेजी । यह था उसका टैस्ट का परिणाम  – त्रिकोणमिती में 100% आए थे ।   पता नहीं तानियां ने यह फ़ोटो किस किस को दिखाई; जताने के लिए कि उसका भैया कितना योग्य था या बताने के लिए कि उसने भैया को इतना योग्य बना दिया था । आप अपनी सोच के अनुसार ही निर्णय कर लीजिए ।

 

चुनौती

तानिया को तो जैसे हर जगह त्रिकोणमिती ही सूझती है । अब देखो, एक कुताब मीनार का चित्र आदी को दिया और बताया कि यह मीनार 93 मीटर ऊंची है । चित्र की एक दीवार पर ऊपर से नीचे एक रेखा AC खींच दी और धरती की ओर एक लंब रेखा AB ।  इनको मिलाती हुई रेखा BC की लंबाई 5.8 मीटर बताई । दो प्रश्न कर दिए । एक तो दीवार की ऊपर से नीचे तक लंबाई और दूसरा कोण BCA का नाप । अब बताइए ।

connaughtqutabminarउत्तर

दीवार की लंबाई तो पाइथागोरस प्रमेय से सीधी  √(932+5.82) = 93.18 मीटर आ गई ।

tan BCA = 93/5.8, इसलिए कोण  BCA का नाप   arctan (93/5.8) = arctan 16.03  हो गया । इंटरनैट या किसी किताब से  arctan 16.03 =  86.43° ।