गणित समाज की टी-शर्ट

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गणित के अध्यापक शक्ती कक्कड़ जी चाहते थे कि विद्यार्थी इस विषय से आकर्षित हों ।  उन्होंने कुछ छात्रों और छात्राओं को बुला कर पूछा कि यदि वह स्कूल में एक गणित के लिए एक पाठ्येक्तर (extracuricular ) समाज का स्थापन करना चाहेंगे ।  इस समाज में मासिक प्रदर्शन होंगे । विद्यार्थी कोई भी विषय पर बात कर सकेंगे जिसका किसी भी तरह गणित का संबंध हो ।  शक्ती जी ने छात्रों और छात्राओं से पूछा कि कौन इस कार्य को आरंभ करना चाहता है । दो विद्यार्थी आगे आए – दीपिका और अर्जुन ।  दोनो पढ़ाई में तो मध्यम श्रेणी के थे पर बहुत मिलनसार थे ।  वह स्कूल में लगभग सब को मिले और उन्हें गणित समाज के बारे में बताया । यदि वह सदस्य्ता के लिए मान गए तो उनके हस्ताक्षर भी ले लिए ।  कुछ विद्यार्थिओं ने तो अपनी रुचि के कारण सदस्यता ली । औरों ने हां कही क्योंकि कुछ खोने को था ही नहीं, कोई शुल्क नहीं था और ना ही कोई प्रतिबद्धता ।

स्कूल के साथियों के बाद अर्जुन और दीपिका शक्ती सर जी के पास गए ।  पचास लोगों ने सदस्यता के लिए हस्ताक्षर किए हुए थे – अधिकतर 11 और 12 श्रेणी से और गिने चुने 10 से ।  अर्जुन और दीपिका ने शक्ती सर को बताया कि कई विद्यार्थी चाहते थे कि इस सदस्यता के चिन्ह के लिए टी शर्ट बनवानी चाहिए ।  दोनो की राय थी कि ऐसी टी शर्ट गणित समाज की सदस्यता में रुचि बढ़ा सकती है । वह शक्ती सर से जानना चाहते थे कि यदि स्कूल से इस टी शर्ट के लिए योगदान मिल सकता है ।  शक्ती सर नें प्रिंसिपल साहिबा से बात करके कहा कि स्कूल टी शर्ट की कीमत का 60% देगा और बाकी सदस्यों को देना होगा । पर यह योगदान  स्कूल से लोगो (logo) की स्वीक्रिति पर मिलेगा । इस समाज में से किसी को यह लोगो डिज़ाइन करके, उन्हें और प्रिंसिपल साहिबा को दिखाना होगा, तभी स्विक्रिति मिल सकती है ।  शक्ती सर  जी ने चेतावनी दी कि उन्हें गणित के किसी अच्छे सिद्धांत के बारे में सोचना होगा, बस दो और दो चार होते हैं कह कर काम नहीं चलेगा ।

              समाज का लोगो

अर्जुन और दीपिका ने गणित समाज के सदस्यों की एक मीटिंग बुलाई ताकि लोगो डिज़ाइन पर वार्तालाप हो सके । पहले तो सभी चुप थे, पर फिर एक सदस्य ने कहा के एक वृत्त बना कर बीच में  πr2 लिख दो  ।  एक राय थी कि अलग अलग भुजा संख्या की बहूभुज बनाओ ।  यह विचार ना तो इतने रुचिकर थे और ना ही आकर्षक, पर इन्होंने वार्तालाप तो आरंभ कर दिया ।

किसी ने राय दी कि पाइथागोरस प्रमेय के प्रदर्शन का चित्र बनाया जाए । इसके मध्य में एक समकोण त्रिकोण होगी और उसकी हर भुजा पर एक वर्ग । त्रिकोण और हर वर्ग अलग अलग रंग के होंगे तो यह लोगो सुंदर लगेगा ।  अर्जुन और दीपिका ने इस राय का समर्थन किया पर वह सोच रहे थे कि इसे कुछ और अग्रिम विचार से मिलाया जाए । वह यह तो बनाएंगे ही पर एक त्रिपक्षीय (tiple) त्रिकोण बनाना चाहते थे । एक त्रिपक्षीय त्रिकोण की तीनो भुजाएं पूर्णांक होती हैं । पहली ऐसी त्रिकोण की भुजाएं  3,4 और 5 होंगे क्योंकि 32 + 42  = 52  है । अगली त्रिपक्षीय समकोण त्रिकोण की भुजाएं 5, 12, 13   होंगी (52 + 122  = 132), और वह इतनी सुंदर नहीं लगेगी । उनके स्कूल का पता भी 345 ट्राएंगल पार्क था । उन्होंने इस विचार का पक्ष-प्रचार किया ।

Fig.4.1

यह लोगो सब को पसंद आया पर एक सदस्य ने हाथ खड़ा किया और फिर कहा: यह अच्छा लोगो है और शायद पास भी हो जाएगा पर हमें इसे समुन्नत करना चाहिए ताकि स्कूल वाले प्रभावित हो जाएं और योगदान करें ।  मुझे याद है कि जब बीजगणित पढ़ रहे थे, अध्यापक ने चुनौती दी थी की हम बीजगणित, रेखा गणित और अंक गणित को संयुक्त करें ।  सैरा ने यह कार्य बड़ी कुशलता से किया था ।  सैरा, क्या हम इस लोगो को भी गणित के दूसरे विषयों से संयुक्त कर सकते हैं ?

रेखागणित और त्रिकोणमिति की संयुक्ति

सैरा: जानी और मैं त्रिकोण्मितीय सर्वसमिकाओं (trigonometric identities) की बात कर रहे थे, जिनमें से कई पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित हैं जैसे   sin2 x + cos2 x = 1 है  ।  ।  कई सर्वसमिकाएं इससे बनती हैं । उच्च श्रेणी वाले साथियों को यह याद होगा  ।

एक विद्यार्थी ने कहा: हां, मुझे याद है ।

सैरा:  sin2 x + cos2 x = 1 पाइथागोरस प्रमेय का एक त्रिकोणमितीय पुनः कथन मात्र है ।   इस  पर आधारित सरवसमिकाएं  हैं जैसे        sec2 x = 1 + tan2 x और cosec2 x = 1 + cot2x     ।                          कई सदस्यों ने हामी भरी कि उन्होंने इस सर्वसमिका का सबूत   पाइथागोरस प्रमेय से ही निकाला था ।

अर्जुन और दीपिका ने माना कि रेखा गणित और त्रिकोणमिति का संयुक्त उचित होगा पर वह त्रिपक्षीय सिद्धांत को भी इस लोगो में रखना चाहते थे ।

सैरा ने हाथ उठाया और फिर कहा: मैने अपने कैल्कुलेटर से देखा है कि sin 37° = 0.6018 जो लगभग  3/5 है, और cos 37° = 0.7986 जो 4/5 लगभग  है । इसका मतलब है कि एक समकोण त्रिकोण जिसकी भुजाएं 3,4,5 हों, उसका एक कोण 37° होगा ।  इस लिए हम वही लोगो रख सकते हैं पर उस पर कुछ लिख कर । वह बोर्ड पर गई और उसने पहले वाले चित्र पर कुछ लिखा ताकि अंत में यह लोगो बन गया ।

Fig.4.2             अर्जुन और दीपिका ने इस लोगो की स्वीक्रिति पर वोट मांगा । स्वीक्रिति शीघ्र और सर्वसम्म्ती से हुई ।

दीपिका: यह तो बढ़िया हो गया, पर मेरे दो समस्या हैं ।

अर्जुन: क्या हैं वह समस्या ?

दीपिका: यह 3,4,5 सैंटीमीटर का लोगो तो टी शर्ट पर छोटा रहेगा ।

एक सदस्य: तो इस को 3,4,5 इंच का लोगो कर दो ।

दीपिका: धन्यवाद, समस्या हल हो गई ।

अर्जुन: दीपिका, तूने कहा था कि दो समस्या थी ।

दीपिका: इस लोगो का शक्ती सर और प्रिंसिपल साहिबा के सामने प्रदर्शन कौन करेगा ?  वह सवाल भी पूछ सकते हैं ।

कई सदस्यों ने सैरा की ओर इशारा किया ।

सैरा: सारा काम तो तुम दोनो कर रहे हो ।  इस लिए प्रदर्शन भी तुम ही करो । यदि कहो तो मैं साथ जाने के लिए तैयार हूं ।

दीपिका, अर्जुन और सैरा ने मिल कर शक्ती सर और प्रिंसिपल साहिबा को पाइथागोरस प्रमेय, त्रिशिक्षीय त्रिकोण और रेखागणित और त्रिकोणमिति को संयुक्त करने के संकल्पों से बड़ा प्रभावित किया ।  स्कूल की ओर से टी शर्ट के दाम का 60% योगदान दिया गया । बाकी 40% सदस्यों ने दिया । इस तरह इस स्कूल की गणित समाज का स्थापन हुआ ।

चुनौती

सैरा ने अपनी मां जी से पूछा: इस साल आप मेरे जन्म दिन के लिए कितनी भेंट देंगी ?

मां जी ने सीधा साधा उत्तर दिया:  4 sin2 x + 2 – 2 tan2 x + 4 cos2x + 2 sec2 x ।

सैरा: धन्यवाद ।

सैरा तो समझ गई, आप भी समझने की कोशिश कीजिए ।

उत्तर:  4 sin2 x + 2 – 2 tan2 x + 4 cos2x + 2 sec2x  को सरल करो  ।

पाइथागोरस प्रमेय से मिला sin2 x + cos2x  = 1

समीकरण की दोनो भुजाओं  को  cos2x  से भाग करने पर tan2 x + 1 = sec2x   या sec2x = 1+ tan2 x

अब, 4 sin2 x + 2 – 2 tan2 x + 4 cos2x + 2 sec2x =  4(sin2 x + cos2x) +2 – 2tan2 x + 2(1+ tan2 x) =  4(sin2 x + cos2x) +2 – 2tan2 x +2(1+ tan2 x) = 4

लगता है मां जी थोड़ा ज्यादा ही सीधा जवाब देती हैं: 4 भेंट देंगी।

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