भरत मिलाप

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राम कौन थे

अयोध्या नरेश दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम था ।  कई लोग तो राम को भगवान या विष्णू का अवतार मानते हैं ।  राम को भगवान ना भी मानने वाले उन्हें एक  आराध्य व्यक्ति या आदर्श पुरुष का पद देते हैं ।  अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राम ने 14 वर्ष का वनवास लिया । इसके लिए राम ने राजगद्दी और महलों के सुख को त्यागा, केवल पिता की आज्ञा और मान के लिए ।  वनवास के समय में बहुत कठिनाइयां आईं, राक्षसों ने उन पर अत्याचार किए । मायावाती राक्षस रावण ने राम की पत्नी सीता का अपहरण किया । एक सामान्य व्यक्ति तो कुछ भी नहीं कर पाता, पर कहते हैं कि राम ने एक वानर सेना से संगठन करके उन राक्षसों का सामना किया । महाशक्तिशाली राक्षस रावण को भी पराजित कर दिया । जब राम वनवास पर थे तो विवश हो कर उनके अनुज भ्राता भरत को देश पर राज करने का करतव्य निभाना पड़ा ।

रामलीला

भारत में राम के जीवन का नाटक नगरों और छोटे छोटे गावों में रामलीला के नाम से किया जाता है । बड़े नगरों में तो अब रामलीला के लिए नाटकघर बन गए हैं किंतु गांव में तो रामलीला होती है पूरे जोश से एक मैदान में मंच बना कर । अभिनेता आम तौर पर स्थानीय  उत्साहशील मनुष्य ही होते हैं, अब नगरों में तो कुछ नारियां भी इस नाटक में भाग लेती हैं । केवल हिंदू ही नहीं, कई और धर्मों के लोग भी इसमें अपना योग  देते हैं । रामलीला कई दिन तक चलती है । जिसके बाद बड़ी धूम धाम से विजयदशमी (दशहरा) का त्यौहार मनाया जाता है । इस दिन राम ने रावण का वध करके उस पर विजय पाई थी ।  एक मेला लगता है जिसमें रावण के पुतले को जलाया जाता है । अब राम का वनवास का समय समाप्त हो जाता है ।  उससे अगले दिन एक बहुत बड़ा जलूस निकलता है जिसमें राम और भरत का मिलाप होता है । जलूस में अक्सर एक विशाल बेड़ा भी होता है । बेड़े की मंच पर राम और भरत का मिलाप दिखाया जाता है और साथ में हर्षपूर्वक नृत्य करने वाले नर नारियां भी होते हैं । बड़ी धूम धाम होती है । कई लोग तो अपने घर की छत या छज्जे पर बैठ कर ही इसका आनंद लेते हैं । यह कहानी भी एक भरत मिलाप की है ।

दीपिका और अर्जुन केवल पड़ौसी ही नहीं थे, वह दोनो एक दूसरे को बचपन से जानते थे और एक ही स्कूल में एक ही क्लास में पढ़ते थे । दोनो एक दूसरे के घर आते जाते रहते थे और स्कूल का आना जाना भी साथ साथ होता था । दीपिका की सखियों ने तो उन्हें बायफ़्रैंड गर्लफ़्रैंड का रिश्ता दे ही दिया था पर अर्जुन और दीपिका इससे सहमत नहीं थे । चलो जो भी हो, दीपिका फिर अर्जुन के घर आई हुई थी ।

दीपिका: यह पैकिंग शैकिंग क्या हो रही है अर्जुन, क्या तू कहीं जा रहा है ?

अर्जुन की मांजी: हां दीपिका, हम चितौड़गढ़ जा रहे हैं – केवल चार दिन के लिए । मेरा भाई वहां रहता है और उसका बेटा यानी कि मेरा  भतीजा विवान इस वर्ष रामलीला में भरत का अभिनय कर रहा है । विवान बहुत होशियार है, वह सब कुछ कर लेता है – पढ़ाई भी और नाटक भी । अर्जुन और मैं दोनो जाएंगे ।

दीपिका: अच्छा. मज़े करना । अर्जुन, वापिस आकर मुझे सब कुछ बताना होगा । सफ़र के लिए शुभ कामनाएं । बाइ बाइ ।

अर्जुन और उसकी मांजी चार दिनो के लिए चितौड़गढ़ गए और निश्चित समय पर लौट आए । आकर अर्जुन ने दीपिका को बुलाया ।

दीपिका: तो कैसा था सफ़र, मज़ा आया क्या ? सब कुछ विस्तारपूर्वक बता ।

विवान भरत के स्वरूप में था

अर्जुन: हम उस दिन दोपहर के थोड़ी देर बाद ही चितौड़गढ़ पहुंच गए । शाम को राम लीला भी देखी । विवान भरत के स्वरूप में तो था पर उस दिन वह केवल एक मिनट के लिए ही मंच पर आया ।

अगले दिन तो विजयदशमी का मेला था, जाने सारा शहर ही रावण के पुतले को जलते देखने आया होगा । फिर अगला दिन तो विवान का था । एक बेड़े पर मंच थी जिस पर विवान था और एक और पुरुष जो राम के स्वरूप में था, और लगभग दस लोग और थे । भरत और राम, अक्सर गले मिलते थे और बाकी लोग बेड़े पर नाच रहे थे । हां, विवान की बड़ी बहन ईशा भी बेड़े पर मस्ती से झूम रही थी । बहुत भीड़ थी । हम तो किसी की छत पर जा कर बैठ गए थे और वहीं से हमने सब कुछ देखा । अगले दिन बस लौट आए ।

दीपिका: तो मस्त रहा सारा कार्यक्रम । तभी तू खुश लग रहा है ।

अर्जुन की खीज

अर्जुन: खुश तो हूं पर मुझे एक बात खीझ रही है ।

दीपिका: क्या ?

अर्जुन: मैं तुझे यह चित्र बना कर दिखाता हूं ।  यह एक समकोण त्रिभुक  है जिसमें ACB कोण 90° का है जहां हमने किसी के घर पर बैठ कर B  से  A की ओर जाते हुए जलूस को देखा था ।  हमारा प्रश्न था कि कब विवान और ईशा वाला बेड़ा हमारे से कम से कम दूरी पर था ।

fig,bharat1मैने कहा कि इसकी गणना तो सरल है । C से AB पर एक लंब रेखा CD खीच दो ।  तब हम सारा हिसाब कर सकते हैं ।  ईशा ने मुझे गणना का मौका भी नहीं दिया । बस एक दम कह दिया कि बेड़े के दूरी कम से कम तब थी जब वह B और A के बीच का एक पांचवां भाग मार्ग चल चुका था ।

दीपिका: क्या उसने अपने उत्तर का प्रमाण दिया ?

अर्जुन: नहीं, कहती थी कि प्रमाण ई-मेल से भेज देगी । अभी तक तो नहीं आया । इस बात से मैं तो खीज सा गया हूं  ।

दीपिका: तेरी कही बात तो मुझे उचित लग रही है ।  पता नहीं उसका उत्तर ठीक भी है या नहीं ।  यह तो रेखा गणित का प्रश्न है । स्कूल में मैडम रानिया अली जी से पूछ सकते हैं । मैं भी तेरे साथ चलूंगी ।

अगले दिन स्कूल से पहले दोनो मैडम रानिया अली के पास पहुंचे और अर्जुन ने अपनी दुविधा बताई ।

रानिया अली जी: अर्जुन, पहले तो हम पता करेंगे कि क्या ईशा का कहना ठीक  था ?

मान लो कि  CD = x, BD = a and DA = b  । चित्र में AC 200 और BC 100 मीटर हैं ।

क्योंकि  BA इस समकोण भुज का कर्ण है, पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार AB2 = AC2+ BC2 = 50000 यानी AB = 223.61 मीटर ।

अर्थात  BD + DA = a + b = 223.61 मीटर है ।

अब  BDC भी एक समकोण त्रिभुज है, इसलिए   DB2 (a2) = BC2 (1002) – CD2 (x2)   । अर्थात   a2 = 10000 – x2  

इसी तरह त्रिभुज   ADC से  b2 = 40000 – x2

अत:  b2 – a2 =40000 – x2 – (10000 – x2) = 30000 है ।

इसका मतलब है कि  b2-a2 यानी  (b+a) x (b-a) = 30000 है ।

हम जानते हैं कि a + b = 223.61 मीटर है ।

इसका मतलब है कि  b-a =30000/223.61 = 134.16 मीटर है  ।

आखिरी दो समीकरणो के योग से 2b = 357.77 या b = 178.89 मीटर, और a = 44.7 मीटर ।

जानी: देखो, ईशा ठीक थी क्योंकि a = 44.7 मीटर है और a + b = 223.61 मीटर है, और इसका मतलब है कि  a पांचवां भाग है a+b का (44.7/223.61= 1/5) ।

ज्यामितीय यानी गुणोत्तर माध्य

रानिया अली जी:  लगता है कि ईशा होशियार है पर फिर भी उसने इतनी जल्दी उत्तर कैसे निकाल लिया ? हो सकत है कि उसे ज्यामितीय यानी गुणोत्तर माध्य के बारे में पता हो ।

दीपिका: यह  क्या होता है ?

रानिया अली जी:  आम तौर पर हम केवल समांतर माध्य की ही बात करते हैं । दो संख्याओं का माध्य निकालने के लिए हम उनके योगफल को दो से भाग कर देते हैं । किंतु और भी तरह के माध्य होते हैं । एक है ज्यामितीय (गुणोत्तर) माध्य  । यह दो वास्तविक धनात्मक के गुणज का वर्गमूल होता है ।

अर्जुन: यह तो ऐसे हो गया कि आप को एक आयत दी गई हो और उसी क्षेत्रफल का वर्ग बनाने के लिए कहा जाए । यदि आयत की भुजाएं a और b हों तो वर्ग की चारों भुजाएं √ab हो जाएंगी (ज्यामितीय (गुणोत्तर) माध्य  के लिए नोइडा से मथुरा की सैर  की कहानीदेखें)  । पर यह सिद्धांत यहां कैसे लागू होगा ?

fig.bharat1aरानिया अली जी:  यदि आयत कि क्षैतिज भुजा AD  हो और लंब भुजा DB , और हम लंब भुजा के समान एक क्षैतिज भुजा बना दें तो तेरे चित्र वाली रेखा ADB  बन जाएगी जिसमें DB = a और AD = b   । अब यदि AB के ऊपर एक समकोण त्रिभुज ABC  बना दो तो C  से निकलती हुई AB  पर लंब रेखा CD की लंबाई  a और  b का ज्योमितीय माध्य होगा ।

अर्जुन: तो क्या इसका मतलब हौ कि   x = √ab  या   x2 = ab?

रानिया अली जी: हां तू इससे शुरू कर, और याद रख कि   a + b = 223.61 मीटर । अब त्रिभुज BDC में , x2  =1002 – a2   होगा ।

अर्जुन: तो इसका मतलब है कि ab = 1002 – a2 or b = 10000/a – a यानी a + b = 10000/a यानी 223.61 =10000/a यानी a = 10000/231.61 = 44.7 मीटर । बिल्कुल तब तो   a/(a+b) = 44.7/223.61 = 1/5 है । यह तो मज़ेदार है ।  किंतु, इसमें एक कमी है । हम ने बिना किसी सबूत के मान लिया कि  x2 = ab  है – बस एक परिभाषा समझ कर ।

रानिया अली जी: सबूत भी निकाल लेते हैं । अब देख कि ∠ADC = ∠ACB = 90°.

∠DAC = 90° -∠DCA क्योंकि एक त्रिभुज के सारे कोणो का योगफल 180° होता है ।

और क्योंकि ACB एक समकोण है ∠BCD = 90° -∠DCA ।

इससे मिला कि ∠DAC =∠BCD ।

इस लिए दोनो त्रिभुज के तीसरे कोण भी एक दूसरे के समान होंगे, यानी ∠ACD =∠DBC  ।

इसलिए त्रिभुज  ABC और BCD स्वरूप हैं ।

अर्जुन: इस कारण  BD/CD = CD/AD यानी b/x = x/a यानी  x2 = ab  । यह तो मस्त बात हो गई ।

दीपिका: अर्जुन इसका मतलब तेरी बहन ईशा बड़ी होशियार है ।

अर्जुन: हां, विवान और ईशा, दोनो भाई बहन होशियार हैं । विवान रामलीला में भरत भी बन जाता है और पढ़ाई में भी क्लास में अक्सर प्रथम पद पर आता है । रात को तो ईशा भरत मिलाप वाले बेड़े पर नाचती रही और सुबह उठ कर उसने अपनी गणित कि यह निपुणता दिखा दी – कहती हि कि सिविल इंजीनियर बनेगी ।

चुनौती

एक समकोण त्रिभुज  ABC की भुजाएं     AB = a and BC =b हैं । एक वर्ग BDEF  इसमें नक्ष किया गया है, जैसे कि इस चित्र में दिखाया गया है । वर्ग की भुजा की लंबाई  p है ।  p, a  और b  में संबंध बताओ ।

fig.bharat2उत्तर: इस चित्र में दिखते हुए निम्नलिखित आकारों के क्षेत्रफल हैं

त्रिभुज: ABC = ab/2,  ADE = (a-p) x p/2,    EFC = (b-p) x p/2,

वर्ग: BDEF = p2

त्रिभुज  ABC का क्षेत्रफल, त्रिभुज  ADE और त्रिभुज EFC और वर्ग BDEF के क्षेत्रफल का योगफल है । इस लिए

ab/2 = (a-p) x p/2 + (b-p) x p/2 +  p2   or

 ab/2 = (a + b) x p/2 – p2/2 – p2/2 + p2   या

ab/2 = (a+b) x p/2 या

p/2 = ab/(2(a+b)) या

p = ab/(a+b) या p = 1/(1/a + 1/b)

a  और b का हरात्मक माध्य 2/(1/a + 1/b) होगा  ।

इसलिए p = a  और b का हरात्मक माध्य का आधा है ।

हरात्मक माध्य के लिए नोइडा से मथुरा की सैर  की कहानी देखें  ।